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CBI कैसे करेगी 6500 केसों की जांच और पुलिस पर भरोसा नहीं; मणिपुर पर SC भी पसोपेश में

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 1, 2023
in राष्ट्रीय
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नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने संबंधी वीडियो को ‘बेहद परेशान’ करने वाला बताते हुए मंगलवार को कहा कि घटना के संबंध में केस दर्ज करने में काफी देरी हुई। जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर में उस समय तनाव और बढ़ गया था जब पिछले सप्ताह एक वीडियो सामने आया जिसमें एक समुदाय के कुछ लोगों की भीड़ दूसरे समुदाय की दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाती नजर आई थी। घटना चार मई को हुई थी। केंद्र सरकार ने इन मामलों को सीबीआई को ट्रांसफर करने की पेशकश की थी। जिसपर सुप्रीम कोर्ट पसोपेश में है। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 6500 एफआईआर की जांच सीबीआई को सौंपना असंभव है। वहीं, राज्य पुलिस को इसका जिम्मा नहीं सौंपा जा सकता, तो हम क्या करें?

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पीठ ने मौखिक टिप्पणी की, ”एक चीज बहुत स्पष्ट है कि वीडियो मामले में केस दर्ज करने में काफी देरी हुई।” सुनवाई शुरू होने पर मणिपुर सरकार ने पीठ को बताया कि उसने मई में जातीय हिंसा भड़कने के बाद 6,523 प्राथमिकियां दर्ज कीं। केंद्र तथा मणिपुर सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले में राज्य पुलिस ने ‘जीरो’ केस दर्ज की थी।

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मेहता ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि मणिपुर पुलिस ने वीडियो मामले में एक नाबालिग समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने पीठ को बताया कि ऐसा लगता है कि राज्य पुलिस ने घटना का वीडियो सामने आने के बाद महिलाओं के बयान दर्ज किए। उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर पुलिस से नाराजगी जताते हुए कहा कि घटना की जांच बहुत सुस्त है और राज्य में कानून एवं व्यवस्था और संवैधानिक तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है। इसने कहा कि यह साफ है कि पुलिस ने राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर से नियंत्रण खो दिया है और अगर कानून एवं व्यवस्था तंत्र लोगों की रक्षा नहीं कर सकता तो नागरिकों का क्या होगा। इसने कहा कि राज्य पुलिस जांच करने में अक्षम है, उसने स्थिति से नियंत्रण खो दिया है।

उच्चतम न्यायालय ने पूछा कि क्या महिलाओं को भीड़ को सौंपने वाले पुलिसकर्मियों से पूछताछ की गयी। इससे पहले, आज उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को मणिपुर में यौन उत्पीड़न से पीड़ित महिलाओं के बयान दर्ज न करने का निर्देश देते हुए कहा कि वह इस मामले से जुड़ी कई याचिकाओं पर अपराह्न दो बजे सुनवाई करेगा।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने महिलाओं की ओर से पेश वकील निजाम पाशा की दलीलों पर संज्ञान लिया। सीबीआई ने इन महिलाओं को आज अपने समक्ष पेश होने तथा बयान दर्ज कराने को कहा था। उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर में संबंधित महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने के वीडियो को सोमवार को ‘भयावह’ करार देते हुए केस दर्ज करने में हुई देरी की वजह का पता लगाने का निर्देश दिया था। इसके अलावा न्यायालय ने जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति या फिर विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का सुझाव भी दिया था।

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