नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में डॉलर की आवक बढ़ाने और रुपये को मजबूती देने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने हाल में देश के बड़े सरकारी और निजी बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ एक बैठक में विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रयासों को तेज करने का निर्देश दिया है। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार आरबीआई ने बैंकों से प्रवासी भारतीयों (NRIs) के जरिए FCNR(B) यानी फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) डिपॉजिट स्कीम के तहत ज्यादा से ज्यादा विदेशी फंड जुटाने को कहा है।
बैठक की जानकारी रखने वाले बैंकरों के मुताबिक, रिजर्व बैंक ने बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है कि इस समय देश को विदेशी मुद्रा की सख्त जरूरत है। आरबीआई के इस रुख के बाद लगभग सभी बड़े बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में 200 से 300 बेसिस पॉइंट्स (bps) का इजाफा कर दिया है। अब बैंकों की ओर से 3 से 5 साल के FCNR(B) डिपॉजिट पर 5.25% से 7.1% तक ब्याज ऑफर किया जा रहा है। इस स्कीम का सबसे आकर्षक पहलू यह है कि आरबीआई खुद पूरी हेजिंग कॉस्ट का बोझ उठा रहा है, जिससे बैंकों के लिए यह सौदा बेहद फायदेमंद हो गया है।
रुपये को संभालने की कवायद
पिछले वित्त वर्ष में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया करीब 11% तक कमजोर हुआ था। इसी साल मई महीने में रुपया गिरकर 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था, जो शुक्रवार को सुधरकर 95.11 पर बंद हुआ।
अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद वैश्विक बाजार में मची उथल-पुथल के कारण आरबीआई को लगातार दखल देना पड़ा है। फरवरी में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था, जो जून की शुरुआत तक घटकर 681 अरब डॉलर रह गया। यही वजह है कि आरबीआई अब बाजार को स्थिर करने के लिए आक्रामक रूप से डॉलर वापस देश लाने की कोशिश में है।
कितना फंड आने का अनुमान?
अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई के इन कदमों से देश में बड़े पैमाने पर विदेशी डॉलर आएगा।
जानकारों के मुताबिक इस कदम से रुपया मजबूत होकर दोबारा 92 से 93 के स्तर पर आ सकता है।
इस अभियान से देश में 30 से 50 अरब डॉलर आने की उम्मीद है, जबकि ICICI बैंक की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा 70 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
आरबीआई ने बैंकों के लिए कई पाबंदियां भी हटा दी हैं, जिससे इन डिपॉजिट्स के बदले लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) या गारंटी जारी की जा सकेगी। इससे पूंजी का प्रवाह 10 से 20 गुना तक बढ़ सकता है।
रिटेल निवेशकों के लिए भी निर्देश
विदेशी मुद्रा के अलावा डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने बैंक प्रमुखों से घरेलू स्तर पर भी कुछ खास प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बैंक आम रिटेल निवेशकों के लिए यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI), रिटेल सरकारी सिक्योरिटीज और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी तक पहुंच को और आसान बनाएं ताकि देश की डिजिटल इकॉनमी को मजबूती मिल सके।







