नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से देश के सामने विकसित भारत 2047 का विजन रखते हुए भारतीय बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़ा लक्ष्य तय किया है. PM मोदी ने कहा था कि अब समय आ गया है कि दुनिया के टॉप-5 बैंकों में कम से कम एक भारतीय बैंक शामिल हो. इसके साथ ही उन्होंने टॉप-5 ग्लोबल फार्मा कंपनी में भी एक भारतीय कंपनी को शामिल करने का लक्ष्य रखा. इसके ठीक बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकिंग सेक्टर के अगले चरण के सुधारों के लिए हाई-लेवल कमिटी ऑन बैंकिंग फॉर विकसित भारत बनाने का ऐलान किया है. ये कमेटी बैंकिंग सेक्टर की भविष्य की दिशा, सुधारों और बदलती अर्थव्यवस्था की जरूरतों पर सुझाव देगी.
भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे में केवल बड़ी GDP होना पर्याप्त नहीं है. देश के पास ऐसे बड़े वित्तीय संस्थान भी होने चाहिए जो दुनिया के बड़े बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें. एक बड़ा ग्लोबल बैंक होने का मतलब सिर्फ ज्यादा मार्केट कैप नहीं है. बैंक का साइज, टोटल एसेट्स, कारोबार, इंटरनेशनल प्रजेंस, कैपिटल स्ट्रेंथ, टेक्नोलॉजी, प्रोफिटेबिलिटी और ग्लोबल लेंडिंग क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है. यही वजह है कि सरकार अब बैंकिंग सेक्टर को अगले 20 साल की जरूरतों के हिसाब से तैयार करना चाहती है.
दुनिया के सबसे बड़े बैंकों की लिस्ट
कुल संपत्ति के आधार पर दुनिया के सबसे बड़े बैंकों की लिस्ट में चीन के बैंकों का दबदबा कायम है. शीर्ष पांच में चार बैंक चीन के हैं, जबकि अमेरिका का जेपी मॉर्गन चेज पांचवें स्थान पर है. ICBC 7.64 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की कुल संपत्ति के साथ पहले स्थान पर है. वहीं, जेपी मॉर्गन चेज 4.42 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ शीर्ष पांच में शामिल एकमात्र अमेरिकी बैंक है.
भारत के सबसे बड़े बैंक कौन से हैं?
अगर टोटल एसेट्स के आधार पर देखें तो SBI भारत का सबसे बड़ा बैंक है. इसके बाद HDFC बैंक और ICICI बैंक जैसे बड़े निजी बैंक आते हैं. S&P Global के आंकड़ों में भी SBI, HDFC बैंक और ICICI बैंक भारत के सबसे बड़े लेंडर्स में लगातार शीर्ष पर रहे हैं. वहीं, मार्केट कैप यानी शेयर बाजार में बैंक की कुल वैल्यू के आधार पर तस्वीर थोड़ी अलग है.
क्या सिर्फ मार्केट कैप बढ़ाना काफी है?
नहीं. यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. ग्लोबल टॉप-5 बैंक बनने के लिए केवल शेयर बाजार की वैल्यू बढ़ना पर्याप्त नहीं होगा. इसके लिए बैंक को कई मोर्चों पर मजबूत होना पड़ेगा-
- बड़े स्तर की टोटल एसेट्स और बैलेंस शीट
- मजबूत कैपिटल बेस
- कम NPAs
- तेज लेकिन सुरक्षित क्रेडिट ग्रोथ
- दुनिया के अलग-अलग देशों में इंटरनेशनल प्रजेंस
- ग्लोबल कंपनियों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करने की क्षमता
- अत्याधुनिक डिजिटल बैंकिंग और AI टेक्नोलॉजी
- मजबूत रिस्क मैनेजमेंट
दुनिया के बड़े बैंकों के बराबर प्रोफिटेबिलिटी और एफिशिएंसी
S&P Global के अनुसार भारतीय बैंकों की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ है और बड़े बैंकों के कैपिटल बफर भी मजबूत हैं. जुलाई 2026 के S&P ग्लोबल/विज़िबल अल्फा एनालिसिस में HDFC बैंक, ICICI बैंक, SBI और Axis बैंक जैसे बड़े लेंडर्स की एसेट क्वालिटी और कैपिटल पोजीशन को भी मजबूत बताया गया.
सरकार की हाई-लेवल बैंकिंग कमिटी क्यों महत्वपूर्ण है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 17 अगस्त को कहा है कि सरकार जल्द ही बैंकिंग सेक्टर के लिए एक हाई-लेवल कमिटी बनाएगी. इसका उद्देश्य केवल मौजूदा समस्याओं को देखना नहीं, बल्कि अगले दो दशकों के लिए बैंकिंग सेक्टर की दिशा तय करना है. कमेटी के सामने जिन विषयों पर चर्चा हुई, उनमें युवाओं के लिए बैंकिंग, इन्वेस्टमेंट साइकिल को सपोर्ट करना, ग्लोबल कैपबिलिटी सेंटर, एग्रीकल्चर और हॉर्टिकल्चर वैल्यू चेन, प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग और क्रेडिट कार्ड बिजनेस को नए तरीके से देखना शामिल हैं. वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर इस समय बड़े सुधारों के लिए पहले से बेहतर स्थिति में है और NPAs अपने सबसे निचले स्तर पर हैं.
क्या भारत का कोई बैंक ग्लोबल टॉप-5 में पहुंच सकता है?
संभावना जरूर है, लेकिन चुनौती बहुत बड़ी है. भारत के पास पहले से तीन बेहद बड़े और मजबूत बैंक हैं. SBI, HDFC बैंक और ICICI बैंक. इनके पास विशाल कस्टमर बेस, बड़ी बैलेंस शीट्स और मजबूत डोमेस्टिक प्रजेंस है. लेकिन, ग्लोबल टॉप-5 तक पहुंचने के लिए इन बैंकों को दुनिया के सबसे बड़े बैंकिंग जायंट के स्केल तक पहुंचना होगा.
PM मोदी का टॉप-5 ग्लोबल बैंक वाला लक्ष्य भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ा लॉन्ग टर्म बेंचमार्क है. भारत के पास पहले से मजबूत आधार मौजूद है. SBI एसेट्स के मामले में देश का सबसे बड़ा बैंक है, जबकि HDFC बैंक मार्केट कैप के मामले में सबसे बड़ा लिस्टेड बैंक है और ICICI बैंक उसके करीब है.







