प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू ने सोमवार को राजधानी के प्रतिष्ठित खान मार्केट का दौरा कर वहां चल रहे विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के अधिकारियों को कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा वैश्विक स्तर की सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए।
खान मार्केट में विकास कार्यों की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान उपराज्यपाल ने खान मार्केट की मध्य लेन में चल रहे सुधार एवं पुनर्विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने एनडीएमसी अध्यक्ष केशव चंद्र, उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल और वरिष्ठ अधिकारियों से परियोजना की वर्तमान स्थिति तथा निर्धारित समय-सीमा के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर उपराज्यपाल ने स्थानीय दुकानदारों और बाजार में आए आगंतुकों से भी संवाद किया तथा उनकी आवश्यकताओं और सुझावों को जाना।
अंतरराष्ट्रीय स्तर का बाजार बनाने पर जोर
उपराज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक सोच के अनुरूप खान मार्केट को एक सुव्यवस्थित और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाजार में ऐसा आधुनिक वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और आगंतुकों को नया अनुभव प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधाओं का विस्तार, यातायात और पैदल यात्री प्रबंधन में सुधार तथा स्थानीय व्यापारियों और आगंतुकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
गुणवत्ता और अग्नि सुरक्षा पर विशेष निर्देश
उपराज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि “सभी विकास कार्यों में गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों, विशेषकर अग्नि सुरक्षा संबंधी प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि शेष कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करते हुए वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि “दिल्ली को आधुनिक, टिकाऊ और विश्वस्तरीय शहरी वातावरण में परिवर्तित करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
सत्य मार्ग पर वर्षा जल संचयन प्रणाली का निरीक्षण
खान मार्केट के निरीक्षण के बाद उपराज्यपाल ने एनडीएमसी क्षेत्र के सत्य मार्ग पर स्थापित मॉड्यूलर वर्षा जल संचयन प्रणाली का भी निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजना की संरचना, संचालन क्षमता और दीर्घकालिक उपयोगिता की जानकारी प्राप्त की तथा जल संरक्षण प्रणाली के विकेंद्रीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत और विकेंद्रीकृत करना पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ तथा जलवायु-अनुकूल राजधानी के निर्माण के लिए आवश्यक है।
भूजल संरक्षण और जलभराव रोकने में मिलेगी मदद
उपराज्यपाल ने कहा कि मॉड्यूलर वर्षा जल संचयन प्रणालियां भूजल स्तर को बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर जलभराव की समस्या कम करने और प्रभावी शहरी जल प्रबंधन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
मानसून के मद्देनजर उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लंबित कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए तथा ऐसी पर्यावरण-अनुकूल प्रणालियों का शहरभर में विस्तार किया जाए।
290 वर्षा जल संचयन संरचनाएं तैयार
एनडीएमसी अध्यक्ष केशव चंद्र ने बताया कि “परिषद की 340 मौजूदा एवं प्रस्तावित वर्षा जल संचयन संरचनाओं में से 290 का कार्य पूरा कर उन्हें संचालन योग्य बना दिया गया है। शेष 50 संरचनाओं, जिनमें 28 मॉड्यूलर और 22 पारंपरिक संरचनाएं शामिल हैं, का कार्य तेजी से चल रहा है और जून 2026 के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।”
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 के दौरान एनडीएमसी ने 61 मॉड्यूलर वर्षा जल संचयन गड्ढों का निर्माण किया है, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 30 किलोलीटर है।
स्वच्छ, हरित और स्मार्ट नई दिल्ली के लिए प्रतिबद्ध: चहल
एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन तथा उपराज्यपाल के मार्गदर्शन में परिषद स्वच्छ, हरित, स्मार्ट और विश्वस्तरीय नई दिल्ली के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि “खान मार्केट राजधानी के सबसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में से एक है, जहां बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। बाजार के समग्र पुनर्विकास, बेहतर पहुंच और आधुनिक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
चहल ने बताया कि “कार्यों की समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं। साथ ही, बाजार क्षेत्र में स्वच्छता को मजबूत करने हेतु विशेष रात्रिकालीन सफाई अभियान भी शुरू किया गया है।”
विकसित भारत के विजन को मिलेगा बल
उन्होंने कहा कि खान मार्केट का पुनर्विकास और वर्षा जल संचयन प्रणालियों का विस्तार एनडीएमसी की बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने, पर्यावरणीय स्थिरता को मजबूत करने तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप जलवायु-अनुकूल राजधानी के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।







