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पीएम सूर्य सरोवर योजनाः 5,070 करोड़ का निवेश 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर का लक्ष्य

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 2, 2026
in राष्ट्रीय
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पीएम सूर्य सरोवर योजना
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नई दिल्ली। देश में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार और जमीन पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को 5,070 करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी। इस योजना के तहत देशभर के जलाशयों, बांधों और औद्योगिक तालाबों में 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक (एफएसपीवी) परियोजनाएं ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ईएसएस) के साथ विकसित की जाएंगी। वर्तमान में देश में फ्लोटिंग सोलर क्षमता लगभग 700 मेगावाट है, जबकि राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (नाइस) ने इसकी संभावित क्षमता करीब 102 गीगावाट आंकी है।

एक करोड़ प्रति मेगावाट की सहायता

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योजना के तहत प्रत्येक मेगावाट परियोजना पर एक करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की केंद्रीय वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा व्यवहार्यता अध्ययन, बाथीमेट्री, हाइड्रोग्राफी और पर्यावरणीय आकलन जैसे प्रारंभिक कार्यों के लिए 50 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। परियोजनाओं का आवंटन 2026-27 से 2030-31 के बीच किया जाएगा, जबकि वित्तीय सहायता 2032-33 तक जारी रहेगी।

दो घंटे का स्टोरेज होगा जरूरी

योजना की खास बात यह है कि सभी परियोजनाओं के साथ कम से कम दो घंटे की ऊर्जा भंडारण प्रणाली (10,000 एमडब्ल्यूएच ईएसएस) अनिवार्य होगी। इससे सौर ऊर्जा का बेहतर उपयोग होगा और राज्यों को पीक डिमांड के समय भी बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। सरकार का अनुमान है कि इससे हर साल करीब एक करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा तथा 16,000 से 17,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

भूमि संबंधि समस्याओं से मिलेगी निजात

फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इनके लिए अतिरिक्त जमीन की जरूरत नहीं होती। इन्हें मौजूदा जलाशयों और औद्योगिक तालाबों पर स्थापित किया जा सकता है, जिससे भूमि अधिग्रहण की समस्या कम होगी। साथ ही जल का वाष्पीकरण घटेगा और सौर पैनलों पर धूल कम जमने से उनकी दक्षता भी बेहतर बनी रहेगी। सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र उड़ीसा बंगाल गुजरात ने इसके लिए आवश्यक स्टडी कर ली है। वहीं अन्य राज्यों के साथ भी एमएनआरई मंत्रालय जल्द ही बैठक करेगा।

ग्रिड पर दबाव होगा कम

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना उन राज्यों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जहां ग्रिड क्षमता सीमित होने के कारण दूसरे राज्यों से बड़ी मात्रा में बिजली लाना या भेजना आसान नहीं है। स्थानीय जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर और बैटरी स्टोरेज विकसित होने से राज्य अपनी जरूरत के अनुसार बिजली उपलब्ध करा सकेंगे और अपने ग्रिड को अधिक मजबूत बना सकेंगे।

एनओसी व पीपीए की राज्य सरकार की जिम्मेदारी

हालांकि योजना की सफलता में राज्य सरकारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। परियोजनाओं के लिए जलाशयों के उपयोग की अनुमति, वन, मत्स्य एवं अन्य विभागों से आवश्यक एनओसी, पर्यावरणीय मंजूरियां और बिजली खरीद समझौते (पीपीए) समय पर कराने होंगे। इससे निजी डेवलपर्स को निवेश की सुरक्षा मिलेगी और परियोजनाओं के समय पर पूरा होने का रास्ता साफ होगा।

योजना की प्रमुख बातें

  • कुल परिव्यय : 5,070 करोड़ रूपए
  • लक्ष्य : 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर क्षमता
  • न्यूनतम ऊर्जा भंडारण : 10,000 एमडब्ल्यूएच (2 घंटे ईएसएस)
  • केंद्रीय सहायता : 1 करोड़ रूपए प्रति मेगावाट
  • कुल संभावित निवेश : करीब 28,500 करोड़ रूपए
  • परियोजनाओं का आवंटन : 2026-27 से 2030-31
  • वित्तीय सहायता : 2032-33 तक

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