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Home राष्ट्रीय

लेबर कोड: कर्मचारियों की मौज, कंपनियों पर बोझ?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 14, 2026
in राष्ट्रीय
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labor code
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नई दिल्ली: क्या आपने कभी सोचा है कि जब टाटा (TCS) और एचसीएल (HCL) जैसे दिग्गज आईटी कंपनियां अपनी तिजोरी खाली होने की बात करें तो मामला कितना गंभीर होगा? दोनों कंपनियों के तिमाही नतीजे आ चुके हैं और मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई है. इस बार मुनाफे में गिरावट की वजह कोई वैश्विक मंदी या काम की कमी नहीं, बल्कि 21 नवंबर 2025 से लागू हुए भारत के नए ‘लेबर कोड्स’ को बताया जा रहा है. महज एक कानूनी बदलाव ने इन आईटी दिग्गजों के मुनाफे से 3,084 करोड़ रुपये झटक लिए. आइए जानते हैं आखिर ये पूरी कहानी है क्या?

कहानी की शुरुआत होती है इस बार के तिमाही नतीजों से. नए श्रम कानूनों के पालन करने में TCS को अपने कर्मचारियों की ग्रैच्युटी और बची हुई छुट्टियों के लिए अलग से 2,128 करोड़ रुपये का इंतजाम करना पड़ा. इसका नतीजा यह हुआ कि कंपनी का शुद्ध मुनाफा साल-दर-साल 14 प्रतिशत गिरकर 10,720 करोड़ रुपये पर आ गया. वहीं, HCL टेक्नोलॉजीज की हालत भी कुछ अलग नहीं रही. उसे भी 956 करोड़ रुपये का एकमुश्त झटका लगा, जिससे उसका मुनाफा करीब 11 प्रतिशत गिरकर 4,082 करोड़ रुपये रह गया.

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लेबर कोड में सरकार ने क्या बदलाव किया?

दरअसल, सरकार ने दशकों पुराने 29 श्रम कानूनों को समेटकर चार नए कोड्स में बदल दिया है. इसका सबसे बड़ा असर सैलरी (Wages) की परिभाषा पर पड़ा है. अब ग्रैच्युटी और छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसों का हिसाब नए तरीके से होगा, जिससे कंपनियों को अपने फंड में भारी इजाफा करना पड़ा. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने पहले ही आगाह किया था कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में कंपनियों को यह कड़वा घूंट पीना पड़ेगा, और हुआ भी बिल्कुल वैसा ही. कंपनियों को अब पुराने और नए नियमों के बीच के अंतर को पाटने के लिए भारी-भरकम राशि का प्रावधान करना पड़ रहा है.

हालांकि, शेयर बाजार के बड़े खिलाड़ियों का मानना है कि यह सिर्फ एक अस्थायी झटका है. ब्रोकरेज निर्मल बंग का कहना है कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) आज भी बाजार का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद खिलाड़ी है. उन्होंने TCS के शेयर को Buy रेटिंग देते हुए 3,905 रुपये का लक्ष्य रखा है. वहीं, मोतीलाल ओसवाल (MOFSL) ने भी भरोसा जताया है कि अगले क्वार्टर से हालात सुधरने लगेंगे.

दूसरी तरफ, HCL टेक को लेकर विशेषज्ञों की राय थोड़ी बंटी हुई है. नोमुरा ने माना कि HCL की भविष्य की रणनीति सही है और लक्ष्य 1,810 रुपये तय किया है, जबकि नुवामा का मानना है कि फिलहाल इसके शेयर में बहुत बड़ी बढ़त की गुंजाइश कम है. यह देखना दिलचस्प होगा कि ये कंपनियां इस कानूनी बदलाव से खुद को कितनी जल्दी उबार पाती हैं.

कर्मचारियों के लिए नए लेबल कोड्स के क्या हैं फायदे?

नए लेबर कोड्स (Labour Codes) का उद्देश्य सिर्फ कंपनियों के लिए नियम बदलना नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों कर्मचारियों को सशक्त बनाना और उनके भविष्य को सुरक्षित करना भी है. इन नए कानूनों से आम कर्मचारी को मिलने वाले कुछ प्रमुख फायदे यहां विस्तार से दिए गए हैं-

रिटायरमेंट के समय ज्यादा पैसा: नए लेबर कोड के तहत मजदूरी (Wages) की परिभाषा बदल दी गई है. अब आपकी बेसिक सैलरी आपकी कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए. इसका सीधा फायदा यह होगा कि आपके भविष्य निधि (PF) और ग्रैच्युटी (Gratuity) में कटने वाला हिस्सा बढ़ जाएगा. भले ही अभी आपकी टेक-होम सैलरी (हाथ में आने वाला पैसा) थोड़ी कम हो जाए, लेकिन जब आप नौकरी छोड़ेंगे या रिटायर होंगे, तो आपको एक बहुत बड़ी और सुरक्षित राशि मिलेगी.

छुट्टियों का बेहतर मैनेजमेंट: अब कर्मचारियों के लिए अपनी बची हुई छुट्टियों (Leaves) को मैनेज करना आसान होगा. नए नियमों के अनुसार, अगर कर्मचारी के पास साल के अंत में छुट्टियां बच जाती हैं, तो वह उन्हें अगले साल के लिए जोड़ सकता है या कुछ मामलों में उनके बदले पैसे (Encashment) ले सकता है. इससे कर्मचारियों को अपनी मर्जी से ब्रेक लेने या जरूरत पड़ने पर छुट्टियों को पैसों में बदलने की लचीलापन मिलेगी.

असंगठित क्षेत्र और गिग वर्कर्स को सुरक्षा: यह शायद इन कानूनों का सबसे बड़ा क्रांतिकारी बदलाव है. पहले जो लोग स्विगी, जोमैटो या ओला-उबर जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए काम करते थे (जिन्हें गिग वर्कर्स कहा जाता है), उनके लिए कोई सामाजिक सुरक्षा नियम नहीं थे. अब नए कानूनों के तहत इन डिलीवरी पार्टनर्स और फ्रीलांसर्स को भी बीमा, स्वास्थ्य लाभ और अन्य सरकारी सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाया जाएगा.

महिलाओं के लिए समान अवसर और सुरक्षा: नए श्रम कानूनों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है. अब महिलाएं अपनी मर्जी से हर तरह के काम (जैसे नाइट शिफ्ट) कर सकती हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना कंपनी की जिम्मेदारी होगी कि उन्हें सुरक्षित कामकाजी माहौल मिले. साथ ही, समान काम के लिए समान वेतन के नियम को और अधिक सख्ती से लागू किया जाएगा, जिससे पुरुष और महिला कर्मचारियों के बीच वेतन का अंतर खत्म होगा.

स्वास्थ्य और सुरक्षा: कंपनियों के लिए अब यह अनिवार्य होगा कि वे अपने कर्मचारियों का नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं. इसके अलावा, कार्यस्थल पर सुरक्षा के मानकों को और कड़ा किया गया है ताकि किसी भी दुर्घटना की संभावना को कम किया जा सके. साथ ही, नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) देना अब हर कंपनी के लिए अनिवार्य होगा, जिससे कर्मचारियों के पास अपने रोजगार का कानूनी प्रमाण रहे

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