नई दिल्ली। सनातन धर्म में देवी-देवताओं की पूजा का विशेष महत्व है और पूजा पूर्ण तभी होती है जब दीपक जलाया जाता है. दीपक ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर से जोड़ने का एक साधन है जो ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक भी माना गया है. ऐसे में बिना दीपक जलाए तो कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपक जलाने के नियम और मंत्र क्या हैं? वो नियमों जिनका दीपक जलाते समय पालन करना और वो मंत्र जिसका जाप करने से देवी-देवता को प्रसन्न किया जा सकता है. आइए इस बारे में विस्तार से जानें ताकि कोई भी पूजा अधूरी न रह जाए.
दीपक जलाने के फायदे
ज्योतिष शास्त्र में ऐ पूजा पाठ के समय घी या तेल का दीपक जलाना अति शुभ होता है. दीपक जलाने से घर में मौजूद सभी नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर के लोग यश और प्रसिद्धि की प्राप्ति करते हैं.
दीपक जलाते समय किस मंत्र का जाप करें?
पूजा में दीपक जला रहे हैं तो इसी के साथ शुभ और कल्याणकारी मंत्र का जाप करें ताकि पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके और घर के लोगों का शरीर आरोग्य रहे और धन-संपदा घर में बनी रहे और शत्रु बुद्धि का नाश हो सकें. दीपक जलाते समय अगर मंत्र जाप किया जाए पूरे घर में सकारात्मकता फैलती है. मंत्र जाप करें और दीपक की ज्योति को नमस्कार करें.
मंत्र है-
शुभम करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते।
दीपक जलाने से जुड़े नियम
शास्त्रों में दीपक जलाने के संबंध में कुछ नियम बताए गए हैं जिसका पालन करने से पूजा पूर्ण होती है और पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है. कुछ नियमों पर ध्यान दें-
- दीपक जलाएं उसे सीधे जमीन पर न रखें नहीं तो पूजा का पुण्य पृथ्वी तत्व में मिल जाएगा.
- दीपक जलाएं और जब भगवान के सामने रखें तो इससे पहले अक्षत रखे और उसके ऊपर दीपक को रखें.
- पूजा पाठ के समय दीपक का पूरा ध्यान रखें कि वो बीच में न बूझे. इसके लिए समय समय तेल या घी डालते रहें.
- दीपक जलाकर इधर-उधर कहीं भी न रखें बल्कि इसे बिल्कुल देवी देवताओं की प्रतिमा के सामने रखें.
- दीपक जलाकर रखते समय उसकी दिशा का पूरा ध्यान रखें. दीपक की लौ का मुख पूर्व या उत्तर दिशा में होना शुभ होता है.







