प्रकाश मेहरा
अयोध्या (स्पेशल डेस्क)। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी, गबन और वित्तीय अनियमितताओं के मामले पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया है। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की भी अपील की है।
मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी अपने वक्तव्य में कहा कि श्रीराम मंदिर जैसे आस्था के प्रमुख केंद्र में चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं की खबरें अत्यंत गंभीर और चिंताजनक हैं। उनका कहना था कि यदि किसी स्तर पर चोरी, गबन या हेराफेरी हुई है तो इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए और कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि इस पूरे प्रकरण को राजनीतिक लाभ-हानि का विषय बनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों को राजनीतिक विवाद का माध्यम बनाने से बचना चाहिए।
पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग
बसपा प्रमुख ने सुझाव दिया कि देश के अनेक प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे के संग्रह, लेखा-जोखा और ऑडिट के लिए जो पारदर्शी व्यवस्थाएं लागू हैं, उसी प्रकार की प्रणाली अयोध्या के श्रीराम मंदिर में भी प्रभावी रूप से लागू की जानी चाहिए। उनका मानना है कि इससे भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं की संभावना कम होगी तथा श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
राजनीति और धर्म को लेकर अपील
मायावती ने अपने बयान में व्यापक सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ का भी उल्लेख किया। उन्होंने राजनीतिक दलों और देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि देश में राजनीति का अपराधीकरण, अपराध का राजनीतिकरण, धर्म का राजनीतिकरण तथा राजनीति का अंध-धर्मीकरण लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इन प्रवृत्तियों से बचने की आवश्यकता पर बल दिया।
मामले में अब तक की कार्रवाई
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। विपक्षी दल इस मामले में दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और पूरी जांच की मांग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने आठ आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है और उन्हें गिरफ्तार भी किया जा चुका है। जांच एजेंसियां मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही हैं तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण ने धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। मायावती ने जहां दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है, वहीं उन्होंने इस संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक रंग देने से बचने की सलाह देते हुए धार्मिक संस्थानों में पारदर्शी लेखा व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया है।







