Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

एक फैसला और बजट की एक 92 साल पुरानी परंपरा खत्म, क्या बदल गया?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 31, 2026
in राष्ट्रीय
A A
budget
19
SHARES
621
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली: भारत का रेल बजट, जो कभी देश के वित्तीय कैलेंडर का एक अलग और आकर्षक हिस्सा हुआ करता था, अब केंद्रीय बजट का हिस्सा बन चुका है। वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने इस 92 साल पुरानी परंपरा को खत्म कर दिया, जिससे भारतीय रेल की वित्तीय व्यवस्था, संसदीय समीक्षा और बुनियादी ढांचा योजना में बड़े बदलाव आए। आपको बता दें, औपनिवेशिक काल से आजादी तक अलग रेल बजट की परंपरा की शुरुआत 1924 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी।

रेलवे भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा था

इन्हें भी पढ़े

fighter aircraft

भारत में अब बिना पायलट के उड़ेंगे लड़ाकू विमान! AI संभालेगा कमान

August 26, 2026
modi

मोदी कैबिनेट में आएंगे युवा चेहरे? इन राज्यों से बन सकते हैं नए मंत्री, क्या होंगे समीकरण

August 25, 2026
एंटोनियो गुटेरेस

UN चीफ बोले- चीन-अमेरिका नहीं थोप सकते मनमानी, भारत का बढ़ रहा दबदबा

August 25, 2026
DRDO

DRDO की घातक मिसाइल तकनीक से अब निजी कंपनियां बनाएंगी हथियार!

August 25, 2026
Load More

खबर के मुताबिक, एक्वर्थ कमिटी की सिफारिश पर यह फैसला लिया गया था, क्योंकि उस समय रेलवे भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा था-कुल राजस्व का 70-80% तक योगदान देता था। 1947 में आजादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही। हर साल रेल मंत्री केंद्रीय बजट से कुछ दिन पहले अलग से रेल बजट पेश करते थे, जिसमें नई ट्रेनें, किराया/भाड़ा बदलाव, नई लाइनें और अन्य घोषणाएं होती थीं।

विलय का फैसला: क्यों और कैसे?

2016 में नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली समिति ने एक व्हाइट पेपर “रेलवे बजट को खत्म करना” प्रस्तुत किया। समिति (बिबेक देबरॉय और किशोर देसाई) ने निष्कर्ष निकाला कि भारत अब दुनिया का एकमात्र देश था जहां अलग रेल बजट पेश होता था। रेलवे का कुल बजट में हिस्सा घटकर मात्र 11-15% रह गया था। अलग बजट से दोहराव, देरी और वित्तीय अस्पष्टता बढ़ती थी। यह औपनिवेशिक अवशेष था, जिसकी अब कोई व्यावहारिक जरूरत नहीं।

तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। अंततः 21 सितंबर 2016 को कैबिनेट ने मंजूरी दी। 1 फरवरी 2017 को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहला संयुक्त केंद्रीय बजट पेश किया, जिसमें रेलवे की सभी घोषणाएं शामिल थीं।

विलय के बाद प्रमुख बदलाव और फायदे

इस सुधार ने भारतीय रेलवे और समग्र वित्त व्यवस्था को मजबूत बनाया: पारदर्शिता में वृद्धि: अब केंद्र सरकार की सारी आय-व्यय एक ही दस्तावेज में आती है, जिससे संसद, निवेशक और जनता के लिए निगरानी आसान हुई।

डिविडेंड का बोझ खत्म: पहले रेलवे को सरकार को वार्षिक लाभांश (डिविडेंड) देना पड़ता था। विलय के बाद यह दबाव हट गया, जिससे रेलवे के पास अपने विस्तार, सुरक्षा और आधुनिकीकरण के लिए अधिक धन उपलब्ध हुआ।

बेहतर समन्वय: रेल, सड़क, जलमार्ग जैसे परिवहन क्षेत्रों में एकीकृत योजना संभव हुई। फंड आवंटन और परियोजनाओं की मंजूरी तेज हुई।

प्रक्रिया सरलीकरण: अब केवल एक Appropriation Bill बनता है। संसदीय चर्चा और क्रियान्वयन में समय की बचत हुई।

रेलवे की वित्तीय स्थिति मजबूत: वंदे भारत ट्रेनें, अमृत भारत स्टेशन योजना, कवच सिस्टम जैसी पहलें इसी वित्तीय स्वतंत्रता का नतीजा मानी जाती हैं।

आज रेलवे की वित्तीय व्यवस्था कैसे चलती है?

रेल मंत्रालय अब भी स्वतंत्र रूप से काम करता है, लेकिन केंद्रीय बजट में रेलवे के लिए अलग अनुदान की मांग और विस्तृत ब्योरा दिया जाता है। रेलवे की योजनाएं, खर्च और राजस्व अब वित्त मंत्रालय के साथ बेहतर तालमेल से तय होते हैं। यह बदलाव भले ही किराया बढ़ोतरी या नई ट्रेनों जितना सुर्खियां न बटोरे, लेकिन यह भारत की सार्वजनिक वित्त व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार साबित हुआ। औपनिवेशिक परंपरा का अंत कर, दोहराव कम कर और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर-यह फैसला आज भी रेलवे के निवेश, फंडिंग और विकास की दिशा तय कर रहा है।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
NDA and opposition

आपसी मतभेदों के साथ NDA का मुकाबला कैसे करेगा I.N.D.I.A.?

August 2, 2023

कविताओं से आती गांव-माटी-अपनत्व की महक

July 19, 2025
ब्रिटेन में आर्थिक संकट

गलत रास्ता, गलत नतीजा

December 5, 2022
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • दिल्ली में पानी की किल्लत होगी दूर, सरकार ने मंजूर किए 11,427 करोड़, क्या है पूरा प्लान?
  • टपकेश्वर महादेव की भव्य शोभायात्रा में शामिल हुए CM धामी, प्रदेश की खुशहाली की मांगी मन्नत
  • दिल्ली लक्ष्मी योजना शुरू, महिलाओं को मिलेंगे ₹2,500 हर माह

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.