मुंबई (स्पेशल डेस्क) l महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित टूट की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच गुरुवार को संसद भवन स्थित पार्टी कार्यालय में बुलाई गई शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में कुल नौ सांसदों में से केवल तीन सांसद ही शामिल हुए, जबकि छह सांसद अनुपस्थित रहे। सांसदों की बड़ी संख्या में गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
बैठक में लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे उपस्थित रहे। इनके अलावा पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सांसद संजय राउत भी बैठक में शामिल हुए। हालांकि पार्टी के छह अन्य सांसदों की अनुपस्थिति ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद अनिल देसाई ने कहा कि जो सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए हैं, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पार्टी की ओर से बैठक के लिए व्हिप जारी किया गया था, इसके बावजूद सांसदों ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया।
अनिल देसाई ने कहा, “जो सांसद बैठक में नहीं आए हैं, उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। उन्हें नोटिस भेजकर पूछा जाएगा कि व्हिप जारी होने के बावजूद उन्होंने बैठक में भाग क्यों नहीं लिया।”
टूट की चर्चाओं ने बढ़ाई सियासी हलचल
शिवसेना (यूबीटी) की यह बैठक ऐसे समय आयोजित की गई जब पार्टी के भीतर संभावित टूट को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ सांसद नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं और उनके भविष्य को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसदों की गैरमौजूदगी केवल संयोग नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा हो सकता है।
शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलें
राजनीतिक जानकार प्रकाश मेहरा के अनुसार, ऐसी चर्चाएं चल रही हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसदों में से छह से सात सांसद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। इसके अलावा यह संभावना भी जताई जा रही है कि कुछ सांसद अलग समूह बनाकर शिंदे गुट को समर्थन दे सकते हैं।
हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने या शिंदे गुट में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है। लेकिन संसदीय बैठक में बड़ी संख्या में सांसदों की अनुपस्थिति ने इन अटकलों को और बल दिया है।
उद्धव ठाकरे के लिए नई चुनौती
यदि सांसदों का कोई बड़ा समूह वास्तव में पार्टी से अलग होता है, तो यह उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुई बड़ी बगावत के बाद पार्टी पहले ही संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है।
अब सभी की नजरें उन छह सांसदों पर टिकी हैं जो बैठक में शामिल नहीं हुए। उनके अगले कदम से महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।





