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अमेरिका–इजरायल बनाम ईरान, कितनी बार हुई सीधी टकराव की जंग, और हर बार क्या रहा नतीजा?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 28, 2026
in विशेष, विश्व
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us-iran war
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प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर


नई दिल्ली। पश्चिम एशिया की राजनीति में अमेरिका, इजरायल और ईरान के रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि इन देशों के बीच कभी औपचारिक, लंबी और पारंपरिक जंग नहीं हुई, लेकिन सीधे हमलों और सीमित सैन्य टकराव की घटनाएँ कई बार सामने आई हैं। ये लड़ाइयाँ आमतौर पर मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलों तक सीमित रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अब तक पाँच से छह बार ऐसी प्रत्यक्ष भिड़ंत हो चुकी है।

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पारंपरिक युद्ध नहीं, लेकिन कई बार सीधा हमला

तीनों देशों के बीच पूर्ण पैमाने पर जमीनी युद्ध नहीं हुआ। अधिकांश टकराव “लिमिटेड एंगेजमेंट” यानी सीमित अवधि और सीमित लक्ष्य वाले सैन्य अभियानों के रूप में रहे। इनमें आमतौर पर— ड्रोन हमले, बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाना,हवाई हमले, साइबर हमले, और प्रॉक्सी समूहों के जरिए कार्रवाई शामिल रही है।

क्या रही टकरावों की झलक

1. सीरिया और इराक में परोक्ष भिड़ंत

इजरायल ने कई बार सीरिया में ईरान समर्थित ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिका ने भी इराक और सीरिया में ईरान-समर्थित मिलिशिया पर कार्रवाई की। ईरान ने प्रत्यक्ष जवाब कम दिया, लेकिन अपने सहयोगी समूहों के माध्यम से जवाबी रणनीति अपनाई।

2. ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएँ

ईरान और इजरायल के बीच सीधे ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाएँ सामने आईं, जिनमें सीमित नुकसान हुआ लेकिन तनाव चरम पर पहुँच गया। कई बार अमेरिका ने इजरायल की रक्षा प्रणाली को तकनीकी और सैन्य सहयोग दिया।

3. जून 2025 की 12 दिन की सबसे बड़ी भिड़ंत

अब तक की सबसे बड़ी सीधी टकराव की घटना जून 2025 में सामने आई, जब 12 दिनों तक दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और हवाई हमले हुए। इस दौरान— इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान ने जवाब में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले किए। अमेरिका ने इजरायल की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाई और क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई। हालांकि यह संघर्ष लंबा नहीं चला, लेकिन इसे हाल के वर्षों की सबसे गंभीर सैन्य भिड़ंत माना गया।

हर बार कौन जीता ?

इन सीमित जंगों में किसी एक पक्ष की स्पष्ट और निर्णायक जीत घोषित नहीं हुई। इजरायल ने कई मौकों पर अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाने का दावा किया। ईरान ने जवाबी हमलों के जरिए “संतुलन” बनाने की कोशिश की। अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत और सहयोग से इजरायल को रणनीतिक बढ़त दिलाने का प्रयास किया। विश्लेषकों का मानना है कि ये टकराव “जीत-हार” से ज्यादा “संदेश देने” और “रणनीतिक दबाव” बनाने के लिए लड़े गए।

क्षेत्रीय और वैश्विक असर

हर बार जब इन देशों के बीच टकराव बढ़ा, तब— तेल की कीमतों में उछाल आया, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी, और पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध की आशंका गहराई। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने कई बार युद्धविराम और शांति की अपील की, जिससे संघर्ष सीमित दायरे में ही सिमट गया।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच अब तक कोई औपचारिक, लंबी जंग नहीं हुई है। लेकिन पाँच-छह बार सीधे सैन्य टकराव हो चुके हैं, जिनमें सबसे बड़ा संघर्ष जून 2025 में 12 दिनों तक चला। हर बार परिणाम स्पष्ट जीत के बजाय सामरिक संदेश और शक्ति प्रदर्शन तक सीमित रहा। पश्चिम एशिया में शांति की संभावनाएँ अभी भी नाजुक बनी हुई हैं, और विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भी छोटे लेकिन तीखे टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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