नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों के बीच एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) अकाउंट्स की काफी अहमियत होती है। हालांकि, कई ऐसे EPF अकाउंट्स भी हैं जो लंबे समय से निष्क्रिय हैं। ऐसे अकाउंट के बारे में श्रम और रोजगार राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने जानकारी दी है।
क्या कहा मंत्री ने?
शोभा करंदलाजे ने राज्यसभा में बताया कि फाइनेंशियल ईयर 2020-21 से 2023-24 के बीच इनऑपरेटिव (निष्क्रिय) EPF अकाउंट्स की संख्या में 84% की बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 में ऐसे खातों की संख्या 11,72,923 थी, जो 2023-24 में बढ़कर 21,55,387 हो गई। यानी चार साल में इन खातों की संख्या करीब 84 फीसदी बढ़ी। इसके साथ ही सेटल न हुए बैलेंस में भी इजाफा हुआ है और सेटल की गई रकम में कमी आई है। इसके अलावा, यह भी देखा गया कि हर इनऑपरेटिव अकाउंट में औसत रकम चार सालों में 18% बढ़ी है।
फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में यह ₹33,513 थी, जो फाइनेंशियल ईयर 2023-24 में बढ़कर ₹39,460 हो गई। बता दें कि सांसद नीरज डांगी ने करंदलाजे से वित्तीय वर्ष 2020-21 से अब तक निष्क्रिय EPF खातों की संख्या और उनमें जमा राशि के बारे में जानकारी मांगी थी। यह जानकारी साल-दर-साल और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के आधार पर मांगी गई थी।
क्यों बढ़ रहे हैं निष्क्रिय EPF खाते?
शोभा करंदलाजे के मुताबिक, इसका प्रमुख कारण नौकरी छोड़ने के बाद कर्मचारियों की ओर से EPF राशि निकालने या क्लेम करने के लिए आवेदन नहीं करना है। इसके अलावा KYC और आधार सीडिंग अभियान के दौरान ऐसे खाते भी निष्क्रिय श्रेणी में आ गए, जिन्हें पहले सदस्य की जन्मतिथि जैसी जानकारी उपलब्ध नहीं होने के कारण इस श्रेणी में नहीं रखा गया था।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
सरकार ने इनएक्टिव EPF अकाउंट्स की पहचान करने के लिए क्या उपाय किए हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए करंदलाजे ने बताया कि सरकार ने KYC डिटेल्स की उपलब्धता और स्टेटस के आधार पर बिना क्लेम किए गए फंड वाले इनएक्टिव EPF अकाउंट्स की पहचान करने और उन्हें कैटेगरी में बांटने के लिए उपाय किए हैं।
करंदलाजे ने बताया कि संशोधित EPF स्कीम, 2026 में EPF क्लेम को ऑटो-इनिशिएट करने का प्रावधान शामिल किया गया है, ताकि फंड को सीधे आधार-सीडेड बैंक अकाउंट्स में जमा किया जा सके। मंत्री ने आगे कहा कि EPFO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ‘निधि आपके निकट (NAN) 2.0’ कैंप के जरिए एम्प्लॉयर्स और एम्प्लॉईज़ के बीच EPF सेवाओं और इनएक्टिव अकाउंट्स के बारे में जानकारी फैलाने के लिए आउटरीच और जागरूकता अभियान भी चलाए हैं।







