कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संसद के शीतकालीन सत्र की रणनीति बनाने के लिए पार्टी के रणनीतिक समूह के साथ बैठक की है। दोनों सदनों के नेताओं के साथ उन्होंने बैठक की और कांग्रेस की रणनीति के बारे में चर्चा की। लेकिन संसद में विपक्ष की क्या रणनीति होगी और सरकार कैसे काम करेगी, इसकी असली रणनीति चुनाव नतीजों के बाद बनेगी। संसद का शीतकालीन सत्र सात दिसंबर से शुरू हो रहा है। उसी दिन दिल्ली नगर निगम के नतीजे आएंगे और उसके अगले दिन यानी आठ दिसंबर को हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आएंगे।
दिल्ली नगर निगम, हिमाचल प्रदेश और गुजरात के चुनाव में सिर्फ तीन पार्टियां सीधे शामिल हैं। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी। लेकिन नतीजों पर इन तीन पार्टियों के अलावा सभी विपक्षी पार्टियों की नजर भी होगी। अगर कांग्रेस का प्रदर्शन औसत से बेहतर होता है। वह हिमाचल प्रदेश में जीतती है और गुजरात में नंबर दो पार्टी रहती है तब विपक्ष की पार्टियां उसकी रणनीति के हिसाब से काम करेंगी। फिर कांग्रेस के साथ विपक्षी पार्टियों की एकजुटता भी बनेगी और संसद में सरकार को घेरने की साझा योजना भी बनेगी।
लेकिन अगर कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं हुआ और वह दोनों राज्यों में विधानसभा का चुनाव हारी और दिल्ली नगर निगम में तीसरे स्थान पर रही तो विपक्षी पार्टियां उसकी अनदेखी करेंगी। ध्यान रहे संसद के बजट सत्र के दौरान पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आए थे और पांचों राज्यों में कांग्रेस बुरी तरह से हारी थी। उसके बाद बजट सत्र के दूसरे हिस्से में कांग्रेस के साथ विपक्ष की कोई साझेदारी नहीं बन पाई थी। विपक्षी पार्टियां अपने अपने हिसाब से राजनीति कर रही थीं। इस बार भी अगर कांग्रेस नहीं जीतती है तो उसे अपनी लड़ाई अकेले लडऩी होगी।
नतीजों का असर सरकार के कामकाज पर भी पड़ेगा। अगर भाजपा दो में से एक राज्य हारती है और दिल्ली नगर निगम गंवाती है तो वह बैकफुट पर आएगी। दिल्ली नगर निगम की जीत आम आदमी पार्टी को बड़ी ताकत दे सकती है। वैसे भी वह विपक्ष से अलग अकेले राजनीति कर रही है। लोकसभा में उसके पास एक भी सांसद नहीं हैं लेकिन राज्यसभा में उसके 10 सांसद हैं। वह दिल्ली की जीत के बाद राज्यसभा में सरकार को ज्यादा आक्रामक तरीके से घेरेगी। जहां तक भाजपा का सवाल है तो वह दोनों राज्य जीतने की उम्मीद कर रही है। अगर दोनों जगह भाजपा जीती तो संसद की कार्यवाही पहले की तरह चलती रहेगी और सरकार विपक्ष के विरोध पर ध्यान नहीं देगी। सो, दो राज्यों और दिल्ली नगर निगम के नतीजों से संसद का मूड तय होगा और आगे की राजनीति की भी दिशा तय होगी।







