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PM मोदी का सरकार के लिए 23 प्‍वाइंट वाला रोडमैप: विकसित भारत बनेगा मास मूवमेंट

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 22, 2026
in राष्ट्रीय
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pm modi
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के कामकाज को विभागों की अलग-अलग सीमाओं से बाहर निकालकर ‘पूरी सरकार’ यानी Whole of Government के नजरिये से आगे बढ़ाने का व्यापक खाका तैयार किया है. इसमें विकसित भारत@2047 को केवल सरकारी कार्यक्रम के बजाय जन आंदोलन बनाने, युवाओं को इससे जोड़ने, स्कूल स्तर से खेल प्रतिभाओं की पहचान करने, व्यावसायिक शिक्षा को रोजगार से जोड़ने और प्रशासन में निजी सलाहकारों पर निर्भरता कम करने जैसे लक्ष्य शामिल हैं.

प्रधानमंत्री मोदी की ओर से पिछले महीने केंद्र सरकार के सचिवों के साथ हुई बातचीत में सामने आए इन सुझावों को अब कैबिनेट सचिव ने सभी सचिवों को भेजे विस्तृत पत्र में 23 प्रमुख कार्य बिंदुओं के रूप में दर्ज किया है. इन निर्देशों में खेल, कौशल विकास, कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, दवा उद्योग, सरकारी खरीद, विदेशों में रोजगार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रशासनिक सुधार जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं.

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विकसित भारत को सरकारी योजना नहीं, जन आंदोलन बनाने पर जोर

रोडमैप का सबसे अहम हिस्सा विकसित भारत@2047 को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ना है. प्रधानमंत्री का मानना है कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं हो सकता. इसे आम नागरिकों के साझा संकल्प में बदलना होगा. इसके लिए स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हुए व्यापक जनसंगठन की तर्ज पर एक जन आंदोलन खड़ा करने और यूनिवर्सिटीज तथा कॉलेजों के जरिये युवा आंदोलन को गति देने की बात कही गई है. ‘माई भारत’ अभियान और पोर्टल को भी युवाओं से जुड़े अभियानों के लिए इस्तेमाल करने का सुझाव है. नशे की लत से युवाओं को दूर रखने के लिए प्रेरणा आधारित तंत्र विकसित करने की संभावना भी जताई गई है.

2036 ओलंपिक की तैयारी स्कूलों से

खेलों को लेकर सरकार की सोच में लंबी अवधि की तैयारी पर जोर दिया गया है. 2036 में भारत में होने वाले संभावित ओलंपिक में जिन बच्चों के खिलाड़ी के रूप में सामने आने की संभावना है, उनमें आज के 5 से 10 वर्ष की उम्र के बच्चे भी शामिल हैं. इसी वजह से स्कूल और कॉलेज स्तर से खेल प्रतियोगिताओं और प्रतिभाओं को बढ़ावा देने की रणनीति पर जोर दिया गया है.

प्रधानमंत्री ने खेलों को केवल खेल मंत्रालय तक सीमित रखने के बजाय इसे ‘पूरी सरकार’ का विषय बनाने की जरूरत बताई है. खेल और पर्यटन मंत्रालय को मिलकर स्पोर्ट्स टूरिज्म विकसित करने की दिशा में काम करने का सुझाव दिया गया है. एमएसएमई, तकनीकी विभागों और स्टार्टअप को भी खेलों के विकास और प्रचार से जोड़ने की योजना है. ऑफिसों में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है. इसका उद्देश्य कर्मचारियों में खेल संस्कृति विकसित करने के साथ टीम भावना को मजबूत करना है.

स्कूल से ही कौशल विकास

सरकार ने स्कूली शिक्षा में व्यावसायिक कौशल को अधिक जगह देने की जरूरत बताई है. स्कूल स्तर पर कौशल विकास के अवसर बढ़ाने के साथ आईटीआई पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर उन्हें रोजगार की जरूरतों के अनुरूप बनाने का प्रस्ताव है. आईटीआई डिप्लोमा हासिल करने वाले छात्रों के लिए आगे डिग्री प्राप्त करने के रास्ते तलाशने की बात भी कही गई है. इससे व्यावसायिक शिक्षा और उच्च शिक्षा के बीच मौजूद अंतर को कम किया जा सकता है.

इसके साथ ही दुनिया के अलग-अलग देशों में कुशल श्रमिकों की मांग का ग्‍लोबल लेवल पर मैपिंग करने और उसी के अनुरूप भारत में प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने का सुझाव दिया गया है. उदाहरण के तौर पर पूर्वोत्तर भारत के प्रशिक्षित युवाओं को जापान जैसे देशों में उपलब्ध रोजगार अवसरों से जोड़ने की बात कही गई है. विदेशों में भारतीय कामगारों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण के साथ सॉफ्ट स्किल और डिजिटल तकनीक पर भी अधिक जोर देने की जरूरत बताई गई है.

खेती में क्षेत्रीय जरूरत के हिसाब से शिक्षा

कृषि क्षेत्र में भी शिक्षा और खेती के तौर-तरीकों में बदलाव का सुझाव दिया गया है. कृषि विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों की क्षेत्रवार समीक्षा करने को कहा गया है, ताकि यह देखा जा सके कि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं या नहीं. सिंचाई सुविधाओं का विस्तार कर क्रॉप डायवर्सिफिकेशन को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाशने का सुझाव है. हालांकि, इसके साथ पानी की अधिक खपत वाली फसलों से बचने जैसी शर्तों का ध्यान रखने की बात कही गई है. कृषि छात्रों को खेतों की मेड़ या सीमाओं पर सौर पैनल लगाने जैसी योजनाओं से जोड़ने का प्रस्ताव भी सामने आया है. इससे किसानों के लिए अतिरिक्त और अपेक्षाकृत सुनिश्चित आय का स्रोत विकसित किया जा सकता है.

भारतीय डिजिटल और एआई प्लेटफॉर्म को बढ़ावा

सरकारी कामकाज में घरेलू डिजिटल, एआई और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है. इसका उद्देश्य डेटा सुरक्षा को मजबूत करना और भारतीय डिजिटल विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ाना है. दस्तावेज में Zoho, Sna’m और Arattai जैसे भारतीय प्लेटफॉर्म का उल्लेख किया गया है. संकेत साफ है कि सरकारी संस्थानों में विदेशी डिजिटल सेवाओं पर निर्भरता कम करने और घरेलू तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करने की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश है.

वरिष्ठ नागरिकों और इंजीनियरिंग छात्रों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल

रोडमैप में अनुभवी पेशेवरों और वरिष्ठ नागरिकों को भी उपयोगी संसाधन के तौर पर देखने की बात कही गई है. आईटीआई में वरिष्ठ नागरिकों को मेंटर के रूप में जोड़ा जा सकता है और उन्हें मानदेय दिया जा सकता है. इसके लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ जैसी व्यवस्था को मॉडल बनाया जा सकता है. इसी तरह अंतिम वर्ष के इंजीनियरिंग छात्रों को दो से तीन महीने तक आईटीआई में मानदेय के आधार पर स्वैच्छिक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने का सुझाव है. इससे आईटीआई में नई तकनीक और उद्योग से जुड़ा ज्ञान पहुंचाने में मदद मिल सकती है.

सरकारी विभागों में विशेषज्ञता बढ़ाने की कवायद

प्रशासनिक सुधार के तहत सरकार अपने अधिकारियों की आंतरिक विशेषज्ञता बढ़ाना चाहती है. टेंडर तैयार करने, कानूनों का मसौदा बनाने, विवादों से निपटने और अन्य विशेषज्ञ कार्यों के लिए लगातार निजी सलाहकार कंपनियों पर निर्भर रहने के बजाय सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया गया है. अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार के iGOT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकता है. सरकार के खर्च से जुड़ी शब्दावली पर भी पुनर्विचार का सुझाव है. खास तौर पर ऐसे खर्च, जिनसे स्थायी परिसंपत्तियां बनती हैं, उन्हें केवल ‘व्यय’ के रूप में देखने के नजरिये पर विचार करने की बात कही गई है.

फार्मा और उद्योग में नियमन आसान करने पर जोर

फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में प्रक्रिया सुधार और नियमन को आसान बनाने की जरूरत बताई गई है. वैज्ञानिक क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ नियमों को अद्यतन रखने और कारोबार करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार ने मंत्रालयों और विभागों से यह भी कहा है कि वे उन नियमों, प्रक्रियाओं और व्यवस्थागत कमियों की पहले से पहचान करें, जो भविष्य में विकास की राह में बाधा बन सकती हैं. यानी सुधार समस्या सामने आने के बाद नहीं, बल्कि संभावित अड़चन बनने से पहले किए जाएं.

जटिल परियोजनाओं के लिए घरेलू क्षमता

सरकार की प्राथमिकता केवल कुशल श्रमिक तैयार करने तक सीमित नहीं है. ऐसे भारतीय निर्माण संस्थानों की संख्या बढ़ाने पर भी जोर है, जो जटिल और बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट को पूरा करने की क्षमता रखते हों. इसके साथ भारी और अत्याधुनिक मशीनरी तथा उपकरणों के घरेलू निर्माण की क्षमता विकसित करने की जरूरत बताई गई है. उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को भी मजबूत करने का सुझाव है. विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के पाठ्यक्रमों को तकनीकी बदलावों और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार लगातार अपडेट करने की बात कही गई है.

विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर काम करने का संदेश

रोडमैप का सबसे बड़ा प्रशासनिक संदेश शीर्ष नौकरशाही के लिए है. सचिवों से कहा गया है कि वे विभागीय हितों के प्रतिनिधि के बजाय व्यापक सार्वजनिक हित के नेता की भूमिका निभाएं. स्वच्छता, स्वदेशी, नियमन में कमी और गैर-जरूरी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे विषयों पर विभागीय सीमाओं से आगे बढ़कर सामूहिक सोच के साथ काम करने पर जोर दिया गया है. मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी रेखांकित की गई है. किसी प्रस्ताव को मंत्रिमंडल के सामने रखने से पहले संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों के साथ पर्याप्त विचार-विमर्श करने को कहा गया है, ताकि बाद में निर्णय के क्रियान्वयन में देरी या मतभेद सामने न आएं.

23 सूत्रीय रोडमैप

कुल मिलाकर, 23 सूत्रीय यह रोडमैप सरकार की योजनाओं को अलग-अलग मंत्रालयों की जिम्मेदारी मानने के बजाय उन्हें एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ने की कोशिश है. इसकी खासियत यह है कि इसमें विकसित भारत की तस्वीर में पांच साल के बच्चे से लेकर आईटीआई छात्र, किसान, विदेश जाने वाला कुशल कामगार, इंजीनियरिंग छात्र और वरिष्ठ नागरिक—सभी को संभावित भागीदार के रूप में देखा गया है. लक्ष्य केवल सरकारी नीतियां लागू करना नहीं, बल्कि समाज के अलग-अलग वर्गों को 2047 के भारत के निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से जोड़ना है

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