Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home दिल्ली

शीघ्र, सुलभ और सस्ता न्याय कब?

देश में प्रति 10 लाख की जनसंख्या पर 100 न्यायाधीशों की नियुक्ति का कानून बनाने की केंद्र सरकार से मांग।

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 9, 2023
in दिल्ली, राष्ट्रीय
A A
court
21
SHARES
685
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

मुरार कण्डारी


वर्तमान समय में भारत में न्यायालयों में दर्ज मुकदमों का निर्णय होने में 10 से 20 वर्ष का समय लग जाता है। हजारों मुकदमे 30 वर्ष से अधिक समय से लंबित पड़े हैं। अंग्रेजी में कहावत है – Justice delayed is justice denied. अर्थात न्याय में हुई देरी, न्याय से इंकार जैसा है।

इन्हें भी पढ़े

Delhi Traffic

दिल्ली की मंडियों को मिलेगी जाम और बेतरतीब ट्रैफिक से मुक्ति, MCD ने राहत देने बनाया यह धांसू प्लान

June 27, 2026
cm rekha gupta

दिल्ली की महिलाओं को ‘सुरक्षा कवच’ देने जा रही रेखा सरकार!

June 27, 2026
examination system

भारत की परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ते सवाल, परीक्षाओं में गड़बड़ी का ज़िम्मेदार कौन?

June 27, 2026
Delhi University

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, 67 कॉलेज और 73 कोर्स में होगा दाखिला

June 27, 2026
Load More

2018 में भारत सरकार के नीति आयोग ने एक दस्तावेज प्रकाशित किया था। जिसमें लिखा था – ‘अगर वर्तमान गति से न्यायालयों में मुक़दमों का निर्णय होता रहा, तो मुक़दमों को निपटाने में 324 वर्ष लग जाएंगे।’ सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के अनेक सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने इसी प्रकार के वक्तव्य गत वर्षों में दिये हैं। दस वर्ष पूर्व न्यायालयों में 3 करोड़ मुकदमे लंबित पड़े थे अब 2022 समाप्त होते समय लंबित मुक़दमों की संख्या लगभग 5 करोड़ हो चुकी है। अगर लंबित पड़े मुक़दमों की संख्या इसी प्रकार बढ़ती रही, तो लोगों को न्याय मिलना दुर्लभ हो जाएगा। न्यायालयों में मुक़दमों के निर्णय में होने वाली भयंकर देरी के कारण आम जनता के लिए न्याय पाना अत्यंत महंगा भी हो गया है। न्यायालयों में लोगों का समय और संसाधनों का अपव्यय न्याय व्यवस्था की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल है।

1987 में न्यायिक आयोग ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया था – ‘बढ़ते मुक़दमों की संख्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को 10 लाख की जनसंख्या पर 50 न्यायाधीशों की नियुक्ति की व्यवस्था करनी चाहिए।’ 2012 में सर्वोच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका के आधार पर न्यायिक आयोग के उस सुझाव को लागू करने का निर्देश भी केंद्र सरकार को दिया था। 1987 में 10 लाख की जनसंख्या पर केवल 10 न्यायाधीश थे। अब 2022 में विभिन्न स्रोतों के अनुसार 10 लाख की जनसंख्या पर 15 न्यायाधीश हो पाए हैं। जब कि मुक़दमों की संख्या 1.5 करोड़ से बढ़कर 5 करोड़ तक पहुंच गई है।

विश्व के अनेक लोकतांत्रिक देशों में न्यायालयों में मुक़दमों का निर्णय 1 से 2 वर्ष में हो जाता है। वहां होने वाले इस शीघ्र न्याय में प्रमुख कारण न्यायाधीशों की पर्याप्त संख्या है। अमेरिका (USA) में 10 लाख की जनसंख्या पर 150 न्यायाधीश हैं और यूरोप के अनेक लोकतांत्रिक देशों में 10 लाख की जनसंख्या पर 200 न्यायाधीशों की व्यवस्था है।

उपरोक्त सब बातों पर विचार करके राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन ने 8 अगस्त 2022 को केंद्र सरकार से मांग की थी – ‘शीघ्र, सुलभ और सस्ता न्याय के लिए प्रति 10 लाख की जनसंख्या पर 100 न्यायाधीशों की नियुक्ति का कानून बनाये।’ आज 8 फरवरी 2023 को उसको 6 महीने हो गए हैं। अभी तक केंद्र सरकार द्वारा इस मांग पर किसी सकारात्मक पहल का संदेश नहीं मिला है। अतः अब राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन ने इस मांग के समर्थन में जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया है। चरणबद्ध तरीके से आम लोगों के समर्थन से सरकार पर जनदबाव बनाया जाएगा। हमारा यह अभियान और आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत होगा।

हम केंद्र सरकार से फिर मांग करते हैं – ‘शीघ्र, सुलभ और सस्ता न्याय के लिए प्रति 10 लाख की जनसंख्या पर 100 न्यायाधीशों की नियुक्ति का कानून बनाये। साथ ही खाली पड़े न्यायाधीशों के पदों को 6 महीने के अंदर भरने का भी कानून बनाये।’ देश की समस्याओं के प्रति संवेदनशील प्रबुद्धजनों और आम नागरिकों से हम इस अभियान की सफलता के लिए हर प्रकार से सहयोग करने का अनुरोध करते हैं।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
hafiz saeed

लाहौर में हाफिस सईद के ठिकाने का पर्दाफाश, पाक का तय विनाश !

April 30, 2025
Uttarakhand festival

उत्तराखंड महोत्सव का आयोजन एक ओर अवध के श्रीराम तो दूसरी ओर बद्री विशाल व चारों धाम की संयुक्त शक्ति का प्रतीक : CM योगी

November 17, 2025

मालीवाल का सवाल, दिल्ली में उबाल! स्वाति मालीवाल ने अपने साथ हुई बदसलूकी पर साधी चुप्पी!

May 16, 2024
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • दिल्ली की मंडियों को मिलेगी जाम और बेतरतीब ट्रैफिक से मुक्ति, MCD ने राहत देने बनाया यह धांसू प्लान
  • 5 मिनट में करें अप्लाई, 3 दिन में मिल जाएगा NPS में जमा सारा पैसा
  • दिल्ली की महिलाओं को ‘सुरक्षा कवच’ देने जा रही रेखा सरकार!

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.