नई दिल्ली। शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी में बड़ी फूट पड़ी. गत दिनों पार्टी के एक्शन से नाराज राघव चड्ढा ने आप को छोड़ने का ऐलान किया है. नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में राघव चड्ढा ने दो अन्य सांसदों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. उन्होंने इस दौरान बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वह आम आदमी पार्टी के सभी पदों से अपने आपको अलग कर रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की.
दरअसल, पिछले दिनों आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपने डिप्टी लीडर राघव चड्ढा को पद से हटा दिया था. इसके बाद राघव चड्ढा ने नाराजगी जताते हुए पार्टी में छोड़ने का ऐलान किया. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि आप के दो-तिहाई राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल होंगे. अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या अपने कार्यकाल के बीच राघव चड्ढा बीजेपी में शामिल हो रहे हैं, तो उनकी सदस्यता प्रभावित होगी या नहीं. क्या राघव चड्ढा को दल बदल कानून के तहत राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा या नहीं. इस बारे में हम अपने आर्टिकल में बात करेंगे…
पहले जानिए राघव चड्ढा ने क्या कहा?
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने कहा कि राज्यसभा में AAP के 10 सांसद हैं, जिनमें से 2/3 से अधिक इस मामले में हमारे साथ हैं. उन्होंने हस्ताक्षर किए हैं और आज सुबह हमने हस्ताक्षरित पत्र और दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए हैं, उनमें से 3 आपके सामने यहां मौजूद हैं.
7 राज्यसभा सांसदों ने छोड़ आप का साथ
हमारे अलावा, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल भी हैं. राघव चड्ढा ने कहा कि हमारे पास सिर्फ दो ही विकल्प थे, या तो राजनीति छोड़ दें और पिछले 15-16 सालों में किए गए अपने जनहित के कामों को छोड़ दें या फिर अपनी ऊर्जा और अनुभव के साथ सकारात्मक राजनीति करें.
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि हमने फैसला किया है कि हम, राज्यसभा में AAP के 2/3 सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को BJP में शामिल कर लेंगे.
दल-बदल कानून से फंसेगा पेच?
भारत में 52वें संवैधानिक संशोधन से लाए गए दल बदल कानून के अनुसार, अगर कोई भी संवैधिनक पद पर बैठा व्यक्ति अपना राजनीतिक दल बदलता है, तो उसकी सदस्यता स्वतः ही समाप्त हो जाती है. लेकिन समय के साथ नेताओं ने इसका भी तोड़ निकाला. साल 1985 में आए कानून में यह प्रावधान था कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद या विधायक पार्टी बदलते हैं, तो उनकी सदस्यता नहीं जाएगी, बल्कि यह किसी अन्य पार्टी में विलय माना जाएगा. समय बीतने के साथ साल 2003 में इस कानून को और सख्त किया गया, जिसके तहत अयोग्य सदस्यों को मंत्री बनाने पर रोक लगा दी गई.
क्या है दल बदल कानून का उद्देश्य?
भारत सरकार ने माना कि इस दल बदल कानून का असली उद्देश्य सरकार की स्थिरता को सुनिश्चित करना है और विधायकों या सांसदों का खरीद फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) को रोकना है. इसके अलावा इस कानून से पार्टी का अनुशासन भी बना रहता है और चुनावी जनादेश को भी पूरी तरीके से सम्मान मिलता है.
क्या राघव चड्ढा की सदस्यता बची रहेगी?
गौरतलब है कि राघव चड्ढा ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वह आम आदमी पार्टी की प्रारंभिक सदस्या को छोड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह और उनके साथ अन्य 7 और राज्यसभा सांसद आप की सदस्यता छोड़ रहे हैं और वह बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. ऐसे में राघव चड्ढा करीब दो-तिहाई AAP सांसदों के साथ बीजेपी में विलय कर रहे हैं. यही कारण है न तो राघव चड्ढा और न ही किसी अन्य आप सांसद की सदस्यता जाएगी.







