प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी केंद्र की एनडीए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक नए राजनीतिक अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं। यह अभियान मुख्य रूप से NEET परीक्षा विवाद और पेपर लीक मामलों पर केंद्रित होगा, जिसकी शुरुआत 17 जून को राजस्थान के कोटा से होने जा रही है।
कोटा से आंदोलन की शुरुआत
कांग्रेस का यह नया कार्यक्रम “छात्रों की गूंज” के नाम से आयोजित किया जा रहा है। राहुल गांधी दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से जन शताब्दी एक्सप्रेस के जरिए कोटा के लिए रवाना होंगे। इस यात्रा को प्रतीकात्मक रूप से छात्रों से जुड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
योजना के अनुसार, यात्रा के दौरान ट्रेन के विभिन्न स्टेशनों पर छात्र और युवा भी जुड़ेंगे और राहुल गांधी उनसे बातचीत करेंगे। इसे कांग्रेस एक “जन संवाद यात्रा” के रूप में प्रस्तुत कर रही है।
NEET और पेपर लीक बना केंद्र बिंदु
इस आंदोलन का मुख्य फोकस NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और देशभर में सामने आए पेपर लीक मामलों पर रहेगा। कांग्रेस का आरोप है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और रद्द परीक्षाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।
राहुल गांधी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि “आज मेहनत का सही परिणाम नहीं मिल रहा और युवाओं के सपनों पर सिस्टम की विफलता भारी पड़ रही है। उन्होंने इसे “व्यवस्था की गंभीर नाकामी” बताया था।
युवा वोट बैंक को साधने की कोशिश
कांग्रेस की रणनीति इस आंदोलन को सिर्फ राजस्थान तक सीमित न रखकर राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की है। पार्टी चाहती है कि इसे युवाओं के बड़े आंदोलन के रूप में विकसित किया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस इस मुद्दे को लगातार बढ़ रहे बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की अनियमितताओं से जोड़कर देख रही है, जिससे युवा वोट बैंक को साधने की कोशिश की जा रही है।
पहले से सक्रिय डिजिटल आंदोलन का असर
इस बीच “कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP)” नामक एक डिजिटल समूह भी NEET और पेपर लीक के मुद्दे पर पहले से अभियान चला रहा है। समूह ने दिल्ली के जंतर-मंतर से विरोध प्रदर्शन शुरू किया था और अब देशभर में अभियान फैला रहा है।
CJP ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। हालांकि इस आंदोलन को लेकर कांग्रेस की आधिकारिक भूमिका स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे माहौल बनाने वाला तत्व माना जा रहा है।
मोदी सरकार पर कितना असर?
विश्लेषकों का मानना है कि “यह आंदोलन विपक्ष को युवाओं के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत करने का अवसर दे सकता है। हालांकि यह सरकार के लिए कितनी बड़ी चुनौती बनेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आंदोलन कितना व्यापक और संगठित रूप लेता है।”
पिछले कुछ अभियानों की तुलना में कांग्रेस का यह प्रयास अधिक “ग्राउंड-लेवल कनेक्ट” पर आधारित बताया जा रहा है, लेकिन इसका राजनीतिक प्रभाव अभी शुरुआती चरण में है।
कोटा से शुरू हो रहा यह नया अभियान कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रयोग माना जा रहा है। अगर यह छात्रों और युवाओं के बीच प्रभावी रूप से अपनी जगह बना पाता है, तो यह आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।







