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Home राष्ट्रीय

देश में रिकॉर्ड पैसा… फिर भी खाली पड़े ATM, नहीं मिल रहा कैश!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 7, 2026
in राष्ट्रीय, व्यापार
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ATM
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नई दिल्ली। ऑनलाइन पेमेंट आने के बाद और यूपीआई का चलन बढ़ने के बाद से ही पिछले कुछ सालों में कैश को लेकर परेशानी बढ़ गई है. भारतीय रिजर्व बैंक के नए आंकड़ों ने कई बड़े खुलासे किए हैं, जिसके अनुसार 29 मई 2026 तक चलन में कैश 42.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक थी. यह पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी की बढ़ोतरी है. इसके बावजूद कुछ एटीएम मशीनों में कैश की कमी होती दिख रही है. लोगों को कैश निकालने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है.

एटीएम ऑपरेटरों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था, एटीएम उद्योग परिसंघ (CATMi) ने भारतीय बैंक संघ (IBA) को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि एटीएम में कैश भरने के लिए उपलब्ध कैश  में कमी आ रही है. लेटर में कहा गया है कि नवंबर 2025 में कैश आपूति 80 प्रतिशत थी. इसका मतलब है कि 20 फीसदी की कमी थी.

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यह कमी लगातार बढ़ रही है, जो मार्च 2026 में 36 फीसदी और अप्रैल में 43 फीसदी थी. आसान शब्‍दों में कहें तो ATM ऑपरेटरों को अप्रैल में अपनी कैश जरूरतों का सिर्फ 57 फीसदी ही मिला. लेटर में कहा गया है कि दिसंबर 225 के अंत से, हमारे सदस्‍यों को कई राज्‍यों में बैंक ब्रांचेज और करेंसी चेस्‍ट से ATM में कैश डालने में लगातार परेशानियां छेलनी पड़ रही है.

क्‍यों घट रहा एटीएम में कैश?

एटीएम से निकासी में गिरावट आई है. CATMi के अनुसार, मासिक एटीएम निकासी जनवरी 2023 में लगभग 57 करोड़ से घटकर सितंबर 2025 तक लगभग 44 करोड़ हो गई है. डिजिटल भुगतान, खासकर यूपीआई की बढ़ती संख्‍या इस गिरावट का मुख्‍य कारण बताया जा रहा है.

CATMi ने कहा कि वर्तमान एटीएम कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स 2.5 प्रतिशत से 3.0 प्रतिशत प्रति साल की मामूली गिरावट पर आधारित थे, जिसे सीपीआई से जुड़ी वृद्धि द्वारा समायोजित किया जाना था. वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है. इसने यह भी बताया कि कस्‍टमर द्वारा फ्री लिमिट से अधिक एटीएम उपयोग के लिए भुगतान किया जाने वाला शुल्क बढ़ गया है, इसने अधिक लोगों को डिजिटल की ओर धकेल दिया है, जिससे गिरावट तेज हो गई है और ऑपरेटरों के राजस्व में कमी आ रही है.

एटीएम ऑपरेट करने की कॉस्‍ट बढ़ी

उद्योग के जानकारों का यह भी कहना है कि बढ़ती लागत ऑपरेटरों पर दबाव बढ़ा रही है. इसमें परिवहन की कुल लागत, ईंधन, साथ ही सुरक्षा गार्डों और अन्य कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन शामिल हैं. विनिमय लागत (यह वह राशि है जो एक बैंक दूसरे बैंक को तब देता है जब कोई ग्राहक एक बैंक के डेबिट कार्ड का उपयोग दूसरे बैंक के एटीएम में करता है) से परिचालन लागत के कुछ हिस्से की भरपाई होने की उम्मीद थी, लेकिन उनका कहना है कि 19 रुपये से 21 रुपये तक की 2 रुपये की वृद्धि बढ़ती लागतों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं रही है.

आरबीआई गवर्नर ने क्‍या कहा?

कैश संकट के बारे में पूछे जाने पर, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने शुक्रवार को कहा कि वे हर साल करेंसी की आवश्यकता का एक प्लान बनाते हैं और आवश्यकतानुसार बैंकों को उपलब्ध कराते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कहीं भी नकदी की कमी होती है, तो वे यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि नकदी शीघ्रता से उपलब्ध कराई जाए.

मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि नकदी की कमी होने पर हमारे पास एटीएम और बैंक शाखाओं को भरने और फिर से भरने के लिए पर्याप्त पैस हो. डिजिटल भुगतान आम होने के कारण, विशेषकर बड़े शहरों में रहने वाले लोग एटीएम में नकदी खत्म होने की स्थिति में शायद ज्यादा चिंतित न हों.

हालांकि, सरकार से डायरेक्‍ट बेनिफिट मिलने वाले लोगों को नकदी की कमी का असर महसूस हो सकता है क्योंकि उनके शहर के एटीएम में पर्याप्त नकदी न हो. कई वरिष्ठ नागरिक अभी भी अपनी दैनिक जरूरतों के लिए नकदी निकालते हैं. छोटे व्यापारी भी आमतौर पर नकदी लेनदेन पर निर्भर रहते हैं. CATMi ने सदस्य बैंकों से एटीएम में नकदी की विश्वसनीय बनाए रखने और बैंकों से इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए कहा है.

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