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Home विश्व

GMLRS मिसाइल सिस्टम बनाकर दुनिया को चौंकाया, क्या है इसकी खासियत?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 17, 2026
in विश्व
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gmlrs missile system
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नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया, GWEO ग्रुप और ऑस्ट्रेलियाई सेना ने मिलकर दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के Woomera Test Range में एक ऑस्ट्रेलिया में बने गाइडेड मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (GMLRS) मिसाइल की सफल टेस्टिंग कर अपने डिफेंस का लोहा दुनिया में मनवा लिया है। इसका टेस्ट 9 अप्रैल को किया गया और ये ऑस्ट्रेलिया के लिए डिफेंस के क्षेत्र में अब तक सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक है।

इस मिसाइल सिस्टम को बनाने वाली कंपनी के मुताबिक यह पहली बार था जब ऑस्ट्रेलियाई सेना के HIMARS सिस्टम से ऑस्ट्रेलिया में बनी GMLRS मिसाइल को लॉन्च किया गया। इस पूरे लॉन्च को सेना की 10वीं ब्रिगेड के 14वें रेजिमेंट, रॉयल ऑस्ट्रेलियन आर्टिलरी ने सपोर्ट किया। इस टेस्ट का मकसद ऑस्ट्रेलिया की घरेलू GWEO मैन्युफेक्चरिंग क्षमता में हुई प्रगति को दिखाना था। GMLRS एक सटीक-निर्देशित हथियार है, जो HIMARS लॉन्च व्हीकल का मुख्य हथियार माना जाता है और इसकी मारक क्षमता 70 किलोमीटर से भीे ज्यादा है।

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क्यों है खास?

चूंकि ये मिसाइल ऑस्ट्रेलिया में ही बनी है इसलिए युद्ध के दौरान सप्लाई रुकने का डर नहीं होगा। ऑस्ट्रेलियाई सेना इन मिसाइलों को अपने HIMARS (High Mobility Artillery Rocket System) ट्रकों से फायर करती है। ऑस्ट्रेलिया ने कुल 42 HIMARS लॉन्चर खरीदे हैं। इनकी रेंज भले ही अभी 70-80 किलोमीटर के करीब है लेकिन ऑस्ट्रेलिया भविष्य में इसकी मारक क्षमता 1000 किलोमीटर तक ले जा सकता है। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने हर साल तकरीबन 4000 मिसाइल बनाने का टारगेट सेट किया है।

2 साल में बना अमेरिका के बाहर पहला GMLRS

कंपनी ने बताया कि डिफेंस डिपार्टमेंट के साथ मिलकर पोर्ट वेकफील्ड फैसिलिटी को तैयार किया गया और सिर्फ दो साल में अमेरिका के बाहर पहला GMLRS बनाया गया। इस अचीवमेंट में ऑस्ट्रेलिया का साथ अमेरिका ने दिया है। साथ ही, कंपनी ने बताया कि मिसाइलों की फाइनल असेंबली और सेना को डिलीवरी ऑस्ट्रेलियाई इंजीनियरों ने की। इन इंजीनियरों ने पहले अमेरिका में ट्रेनिंग ली थी और फिर ऑस्ट्रेलिया लौटकर पोर्ट वेकफील्ड में प्रोडक्शन लाइन स्थापित की।

टेस्ट पूरी तरह सफल, 2027 के लिए तैयारी

कंपनी ने कन्फर्म किया कि वूमेरा में हुआ यह लाइव-फायर टेस्ट पूरी तरह सफल रहा और सभी टेस्ट उद्देश्यों को हासिल किया गया। इस दौरान जो डेटा इकट्ठा किया गया है, वह 2027 में होने वाले अमेरिकी सर्टिफिकेशन फ्लाइट टेस्ट से पहले सिस्टम की जांच में मदद करेगा। इस टेस्ट की इमेजरी का क्रेडिट ऑस्ट्रेलियाई रक्षा विभाग को दिया गया है।

पहली खेप के साथ पूरा हुआ बड़ा माइलस्टोन

लॉकहीड मार्टिन के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में बनी bमिसाइलों की पहली खेप की डिलीवरी और उसके बाद हुआ लाइव-फायर टेस्ट “Guided Weapons Production Capability Risk Reduction Activity” कॉन्ट्रैक्ट के तहत एक बड़ा माइलस्टोन था। यह सफलता अमेरिका सरकार, ऑस्ट्रेलियाई सरकार, डिफेंस डिपार्टमेंट और लोकल इंडस्ट्री पार्टनर्स की मदद से हासिल हुई।

कंपनी ने साफ किया कि ऑस्ट्रेलिया में GMLRS प्रोडक्शन शुरू होने से देश के “सॉवरेन गाइडेड वेपन्स” लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल के हथियारों का स्टॉक भी बढ़ेगा। साथ ही, इससे वैश्विक स्तर पर GMLRS की उपलब्धता भी बढ़ेगी और MLRS सिस्टम इस्तेमाल करने वाले अन्य देशों को भी फायदा मिलेगा।

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