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सितंबर में आने वाली है ‘सुरसा’, भारत की उड़ी नींद?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 11, 2026
in राष्ट्रीय
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नई दिल्ली। रामायण में सुरसा नाम की एक समुद्री राक्षसी का जिक्र है, जिसने सीताजी की खोज में लंका जाते समय हनुमान जी का रास्ता रोक लिया था। उसका विकराल रूप बेहद भयावह था। सुरसा को नागों की माता कहा जाता है। उस वक्त हनुमान जी सुरसा को अपना रौद्र रूप दिखाकर शांत कर दिया था। अब वही सुरसा अपने नए अवतार अलनीनो के रूप में फिर नजर आ रही है। अलनीनो को मॉन्स्टर या गॉडजिला (काल्पनिक डायनासोर) भी कहा जा रहा है, जिसके बारे में माना जा रहा है कि अलनीनो मौसम पैटर्न के कारण 2026 के आखिर में और 2027 तक दुनिया भर में तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाएगा। प्रशांत महासागर का यह बार-बार होने वाला मौसमी पैटर्न दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में सूखे और जंगल की आग से जुड़ा रहा है। सबसे बड़ा खतरा यह मंडरा रहा है कि इसके चलते मानसून कमजोर हो जाएगा। संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि अलनीनो सितंबर में अपने चरम पर पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अब तक का सबसे शक्तिशाली अलनीनो हो सकता है।

‘गॉडजिला अलनीनो’ क्या है?

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यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, अलनीनो का मतलब है मध्य और पूर्वी ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का गर्म होना। यह अलनीनो सदर्न ऑसिलेशन (ENSO) का हिस्सा है, जो मौसम और समुद्र से जुड़ी एक प्राकृतिक जलवायु घटना है।

अलनीनो हर दो से सात साल में एक बार होता है। इसका दुनिया भर में मौसम के पैटर्न पर बड़ा असर पड़ता है।

अलनीनो के दौरान समुद्र के ऊपर हवा का दबाव कम हो जाता है। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, जब ENSO न्यूट्रल फेज में होता है, तो व्यापारिक हवाएं भूमध्य रेखा के साथ पश्चिम की ओर चलती हैं और दक्षिण अमेरिका से गर्म पानी को एशिया की ओर धकेलती हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन WMO ने सितंबर में अलनीनो के सबसे ज्यादा ताकतवर होने की चेतावनी दी है। इसका मतलब भारत के लिए ये हो सकता है कि मानसूनी बारिश कम हो सकती है।

अलनीनो से समंदर हो जाता है बेहद गर्म

एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी में क्लाइमेट सिस्टम साइंस की प्रोफेसर गैबी हेगरल ने ‘द इंडिपेंडेंट’ को बताया-अलनीनो का दुनिया भर में व्यापक असर होता है और यह आमतौर पर वैश्विक औसत तापमान को बढ़ाता है क्योंकि यह समुद्र की सतह के ज्यादा हिस्से को गर्म पानी के संपर्क में लाता है, इसलिए हमें रिकॉर्ड वैश्विक औसत तापमान की उम्मीद है।

अलनीनो: तापमान 2 डिग्री ज्यादा

  • ट्रॉपिकल महासागर में जमा हुई भारी गर्मी, महासागर से वायुमंडल में और ज्यादा गर्मी पहुंचाकर दुनिया के तापमान को बढ़ा सकती है।
  • अलनीनो वाले साल में तापमान सामान्य से कम से कम 2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहता है, जिससे मौसम पर असर पड़ता है और अक्सर दुनिया का तापमान नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है।
  • WMO ने इस हफ्टे पुष्टि की है कि साल के बीच तक ‘अलनीनो’ (El Nino) के बनने की संभावना लगभग 80 प्रतिशत है, और साल के बाद के समय में यह संभावना बढ़कर 90 प्रतिशत हो जाती है।

अलनीनो से सूखा पड़ने के आसार, मानसून कमजोर

अलनीनो की घटनाओं के दौरान दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और मध्य अफ्रीका जैसी जगहों पर मौसम ज्यादा सूखा रहता है। अलनीनो की वजह से दुनिया भर में भीषण गर्मी की लहरें (हीटवेव), बाढ़ और सूखे की स्थिति बनती है। भारत में अलनीनो वाले सालों में आमतौर पर मानसून कमजोर पड़ जाता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी इस साल मानसूनी बारिश का औसत 92 से घटाकर 90 फीसदी कर दिया है।

UEA में क्लाइमेट साइंस के प्रोफेसर टिमोथी ओसबोर्न ने ‘द इंडिपेंडेंट’ को बताया कि प्रशांत महासागर में बनने वाले अलनीनो के दौरान कन्वेक्टिव तूफानों का विशाल क्षेत्र मौसम के ग्लोबल पैटर्न को तय करता है।

उन्होंने कहा, इससे इक्वाडोर और पेरू के तटीय इलाकों, अमेरिका और मैक्सिको के कुछ हिस्सों में भी ज्यादा बारिश होती है और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

समुद्री सुरसा का एक नाम गॉडजिला भी

एक मजबूत अलनीनो इन जोखिमों को और बढ़ा सकता है, जिससे मौसम और भी ज़्यादा चरम (extreme) हो सकता है। WMO के अनुसार, प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के आसपास समुद्री हीटवेव (oceanic heatwave) बननी शुरू हो गई है।

कुछ मौसम वैज्ञानिक इस साल के चरम मौसम पैटर्न यानी समुद्री सुरसा को ‘गॉडजिला अलनीनो’ भी कह रहे हैं। यह नाम एक काल्पनिक डायनासोर जैसे जीव के नाम पर रखा गया है जो कई मॉन्स्टर फिल्मों में दिखाई दिया है।

हिंद महासागर का एक पैटर्न भी दे रहा साथ

इस घटना को एक और समान मौसम पैटर्न पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) से बढ़ावा मिलेगा। इसके कारण इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में सूखा मौसम लंबा और ज़्यादा शुष्क हो जाता है, जिससे आग लगने और सूखे का जोखिम बढ़ जाता है और दुनिया भर में मौसम पर व्यापक और चरम असर पड़ता है।

IMD बोला-सितंबर तक न्यूट्रल IOD

उम्मीद है कि पॉज़िटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में अलनीनो का सूखा करने वाला असर और बढ़ जाएगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने अपडेट में कहा है कि कम से कम सितंबर तक ‘न्यूट्रल IOD स्थितियां’ बने रहने की उम्मीद है।

अलनीनो कितना खतरनाक होगा?

  • गॉडजिला जैसा अलनीनो कई फसलों के लिए तबाही लाने वाला साबित हो सकता है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से पहले ही खाद की कमी हो गई है। जानकारों का कहना है कि मौसम का यह चरम रूप सूखा और बाढ़ लाकर दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों की सप्लाई व्यवस्था को बिगाड़ सकता है।
  • ‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं और सप्लाई-चेन पर पहले से मौजूद दबाव और भी बढ़ सकता है।
  • समुद्र के बढ़ते तापमान से मछलियों की आबादी पर भी खतरा मंडरा रहा है। इससे मछलियों की मुख्य प्रजातियां या तो मर रही हैं या अपनी आम जगहों से दूर जा रही हैं।
  • जानकारों का कहना है कि अलनीनो की वजह से पड़ने वाले भयंकर सूखे से लोगों को पलायन करना पड़ सकता है, खासकर उन लोगों को जो खेती पर निर्भर हैं।

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