नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने क्लाउड-आधारित दूरसंचार नेटवर्क, मोबाइल टावर और सैटेलाइट गेटवे जैसी संचार सेवा देने वाली कंपनियों को देश के बाहर किसी भी प्रकार का डाटा साझा करने पर रोक लगा दी है। यह जानकारी सरकार की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना से मिली है। दूरसंचार विभाग ने संचार सेवा प्रदाताओं को स्पष्ट कहा है कि संपूर्ण दूरसंचार डाटा भारत के भीतर ही संग्रहित किया जाएगा।
20 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार हर नई अधिकृत इकाई यह सुनिश्चित करेगी कि उसके दूरसंचार नेटवर्क से जुड़े सभी सिस्टम तथा उनसे संबंधित डाटा, लॉग और सूचनाएं केवल भारत में ही संग्रहित हों। इनकी कोई भी प्रति भारत के बाहर न भेजी जाएगी, न साझा की जाएगी और न ही उपलब्ध कराई जाएगी। आदेश के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर, डिजिटल कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर, इंटरनेट एक्सचेंज प्वाइंट प्रोवाइडर, सैटेलाइट अर्थ स्टेशन गेटवे, क्लाउड-होस्टेड टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क प्रोवाइडर और राष्ट्रीय स्तर के मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा प्रदाता आएंगे。
निगरानी के लिए कई अधिकार
नई व्यवस्था के तहत नियमों के अनुपालन की निगरानी के लिए केंद्र सरकार को व्यापक अधिकार दिए गए हैं। सरकार दूरसंचार उपकरण और नेटवर्क स्थापित किए गए स्थलों यहां तक कि उपयोगकर्ता के परिसर का भी निरीक्षण कर सकेगी। अधिकृत कंपनियों की प्रक्रियाओं और प्रणालियों का ऑडिट कर सकेगी। यदि सार्वजनिक हित में तत्काल कार्रवाई आवश्यक समझी जाए तो बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण संभव है।
एजेंसी नहीं कर सकती डाटा एकत्र
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नामित एजेंसी ऐसी कोई जानकारी एकत्र नहीं करेगी और न ही उसका खुलासा करवाएगी, जिससे किसी उपयोगकर्ता या अधिकृत कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित हो। नए नियमों के अनुसार नेटवर्क बिछाने के लिए जरूरी अनुमति संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी होगी। अनुमति मिलने में देरी होती है, तो इसे नियमों के पालन न करने का आधार नहीं माना जाएगा।
डाटा सेंटर उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
डेटा सेंटर कंपनी सबमर इंडिया के प्रमुख और बीएसएनएल के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अनुपम श्रीवास्तव ने कहा कि टेलीकम्युनिकेशन ऑथराइजेशन फॉर टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क नियम, 2026 देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक परिवर्तनकारी कदम हैं। दूरसंचार नेटवर्क सिस्टम, उनसे जुड़े डाटा और लॉग केवल भारत में ही रहेंगे। इस फैसले से डाटा सेंटर उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।







