नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के लाल डोरा के अंदर आने वाले गांवों के लोगों के लिए राहत भरी खबर है. अब दिल्ली सरकार इन दिल्ली देहात के निवासियों को उनकी संपत्तियों का आधुनिक, पारदर्शी और सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने जा रही है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में राजस्व विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्वामित्व (SVAMITVA) योजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई. इस योजना के तहत गांवों में व्यापक सर्वेक्षण कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं और जल्द ही लोगों को स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड बांटे जाएंगे.
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि वर्षों से लाल डोरा क्षेत्रों में संपत्तियों का कोई प्रमाणिक रिकॉर्ड न होने के कारण स्थानीय निवासियों को छोटी-मोटी जरूरतों और प्रशासनिक कामों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. अब दिल्ली सरकार आधुनिक तकनीक के जरिए हर एक संपत्ति की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित कर रही है, जिससे भविष्य में जमीनी रिकॉर्ड बेहद सुरक्षित और पारदर्शी हो जाएंगे.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार जल्द ही एक कार्यक्रम आयोजित कर पात्र नागरिकों को उनके स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड सौंपेगी. सीएम ने स्पष्ट किया कि यह योजना केवल कागजी दस्तावेज तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से एक हाई-टेक डिजिटल प्रणाली पर आधारित है.
48 गांवों को किया गया है शामिल, 30 गांवों के कार्ड तैयार
मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, भारतीय सर्वेक्षण विभाग के साथ हुए समझौते के तहत वर्तमान में कुल 48 गांवों को इस योजना के दायरे में लाया गया है. इनमें से 30 गांवों का ड्रोन और जमीनी सर्वे पूरा हो चुका है, और उनके अंतिम प्रॉपर्टी कार्ड भी बनकर तैयार हो चुके हैं. इन कार्डों पर डिजिटल हस्ताक्षर जोड़ने और स्मार्ट कार्ड्स की छपाई का काम अब अपने अंतिम चरण में है. अब तक कुल 12,232 संपत्तियों का सफल सर्वेक्षण किया जा चुका है.
इनमें से 8,423 संपत्तियां पूरी तरह से विवाद-मुक्त पाई गई हैं, जो कुल सर्वेक्षित संपत्तियों का लगभग 69 प्रतिशत हिस्सा है. इन विवाद-मुक्त संपत्तियों के लिए स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को तुरंत शुरू किया जा रहा है. सरकार के मुताबिक, दक्षिण और उत्तर-पश्चिम जिलों में सर्वे की गई सभी संपत्तियां पूरी तरह से विवाद-मुक्त हैं, जबकि अन्य जिलों में भी आ रहे मामलों का तेजी से निपटारा किया जा रहा है.
दिल्ली सरकार नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाले प्लास्टिक के स्मार्ट पीवीसी कार्ड देने जा रही है. इन कार्डों पर संपत्ति की विशिष्ट पहचान संख्या (पीआईडी), जारी करने की तारीख, गांव का नाम, जिला, कब्जाधारी का नाम, कुल क्षेत्रफल, निर्मित व खुला क्षेत्र, भू-आधार नंबर और संपर्क नंबर जैसी तमाम जानकारियां दर्ज होंगी. इस कार्ड की सबसे खास बात इस पर बना क्यूआर कोड होगा. इस कोड को अपने मोबाइल फोन से स्कैन करते ही संपत्ति का पूरा डिजिटल ‘फॉर्म-13’ खुलकर सामने आ जाएगा. इसमें संपत्ति का नक्शा, चारों दिशाओं की सटीक सीमाएं, खसरा नंबर, परिवार का विवरण, तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर और वैध कब्जा प्रमाणपत्र पलभर में उपलब्ध हो जाएगा.
सात चरणों में पूरी हो रही है तकनीकी प्रक्रिया
- सीमाओं का चिन्हांकन: सबसे पहले लाल डोरा क्षेत्र की राजस्व सीमाओं को तय किया जाता है.
- ड्रोन सर्वे: भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा आधुनिक ड्रोन्स की मदद से पूरे गांव का हवाई सर्वेक्षण किया जाता है.
- वास्तविक मिलान: राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर ड्रोन नक्शों का जमीनी स्थिति से मिलान करते हैं.
- सुधार प्रक्रिया: यदि कोई अंतर या विसंगति मिलती है, तो उसे सर्वे विभाग को भेजकर ठीक कराया जाता है.
- प्रॉपर्टी आईडी: हर संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड बनाकर उसे एक विशिष्ट संपत्ति पहचान संख्या दी जाती है.
- प्रॉपर्टी कार्ड निर्माण: इस डेटा के आधार पर आधिकारिक प्रॉपर्टी कार्ड तैयार होता है.
- डोरिस (DORIS) से लिंकेज: पूरे रिकॉर्ड को दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इन्फॉर्मेशन सिस्टम से रियल-टाइम में जोड़ा जाता है, ताकि डेटा हमेशा अपडेट रहे.







