नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश की एनर्जी सेफ्टी को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर लगाए गए आपातकालीन प्रतिबंधों (Emergency Gas Supply Curbs) को वापस लेने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम (Ceasefire) के बाद दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से एलएनजी (Liquefied Natural Gas – LNG) की आवाजाही फिर से सामान्य होने लगी है। इससे भारत समेत कई देशों को बड़ी राहत मिली है।
दरअसल, इसी साल पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले एलएनजी जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो गई थी। इस संकट के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय गैस आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर (Force Majeure) का हवाला देते हुए अपनी आपूर्ति रोक दी या दूसरे देशों की ओर मोड़ दी। इससे भारत में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई थी। इसी खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में नेचुरल गैस (Supply Regulation) ऑर्डर, 2026 लागू किया था।
उस समय सरकार ने आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए घरेलू गैस और आयातित एलएनजी की सप्लाई को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए सुरक्षित कर दिया था। इस व्यवस्था के तहत घरों में इस्तेमाल होने वाली PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस), वाहनों के लिए CNG, एलपीजी उत्पादन और गैस पाइपलाइन संचालन को उनकी औसत जरूरत के अनुसार 100% गैस आपूर्ति सुनिश्चित की गई थी। वहीं, उर्वरक (Fertilizer) कंपनियों को उनकी जरूरत का 70% और उद्योगों व सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को लगभग 80% गैस उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था। इसके लिए पेट्रोकेमिकल कंपनियों, गैस आधारित बिजली संयंत्रों और कुछ रिफाइनरियों की गैस आपूर्ति में कटौती भी की गई थी।
अब सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में हालात पहले से काफी बेहतर हो चुके हैं। ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम, जारी कूटनीतिक बातचीत और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू होने के कारण आपूर्ति का संकट काफी हद तक खत्म हो गया है। इसी वजह से सरकार ने मार्च में लागू किए गए अधिकांश आपातकालीन प्रावधानों को समाप्त कर दिया है।
भारत के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल (Crude Oil) की जरूरत का लगभग 88% और प्राकृतिक गैस की जरूरत का करीब 50% आयात करता है। इनमें भी लगभग 40-45% कच्चा तेल और करीब 65% एलएनजी पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की बाधा सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
संकट के दौरान सरकार ने केवल गैस आपूर्ति को नियंत्रित नहीं किया था, बल्कि रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और बड़े उपभोक्ताओं को डीजल की बिक्री सीमित करने जैसे कदम भी उठाए थे। हालांकि, हालात सामान्य होने के बाद ये दोनों प्रतिबंध पहले ही हटा दिए गए थे और अब गैस आपूर्ति से जुड़े खास नियम भी वापस ले लिए गए हैं।
एक्सपर्ट का मानना है कि गैस आपूर्ति सामान्य होने से उद्योगों, उर्वरक कंपनियों और बिजली उत्पादन क्षेत्र को राहत मिलेगी। साथ ही ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता आने से देश में उत्पादन लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह वैश्विक परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और भविष्य में जरूरत पड़ने पर फिर से आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एलएनजी आपूर्ति दोबारा शुरू होने के बाद भारत के लिए फिलहाल ऊर्जा संकट का खतरा काफी हद तक टल गया है। इससे न केवल गैस आपूर्ति सामान्य होगी, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।






