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Home राष्ट्रीय

भारत के भविष्य को ध्यान में रखकर बनाया गया है इस वर्ष का बजट

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 5, 2026
in राष्ट्रीय, विशेष
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budget
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prahlad sabnaniप्रहलाद सबनानी


नई दिल्ली:  भारत की वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने भारतीय संसद में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया। इस बजट में की गई घोषणाओं के माध्यम से वैश्विक स्तर पर घटित हो रही उथल पुथल से भारत को बचाने की पुरजोर कोशिश की गई दिखती है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा अपने द्वितीय कार्यकाल में वर्ष 2025 के दौरान पूरे वर्षभर लगातार कई देशों के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर टैरिफ की घोषणाएं की जाती रहीं एवं इसके विरोध स्वरूप कुछ देशों ने अमरीका से इन देशों को होने वाले निर्यात पर प्रतिकारी टैरिफ लगाने की घोषणाएं की जाती रहीं।

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चीन ने तो प्रतिशोध में अमेरिका को दुर्लभ खनिज पदार्थों की आपूर्ति ही रोक दी थी। हालांकि इसके पूर्व अमेरिका ने भी चीन को सेमीकंडक्टर एवं चिप्स की आपूर्ति को प्रभावित करने का प्रयास किया था। कुल मिलाकर, कुछ देश तो आपस में विभिन्न वस्तुओं के आयात एवं निर्यात को रोकने के प्रयत्न करते रहे। इन सभी घोषणाओं से वैश्विक स्तर पर विशेष रूप से आर्थिक क्षेत्र में माहौल विपरीत रूप से प्रभावित होता रहा। ट्रम्प प्रशासन ने भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न वस्तुओं के निर्यात पर भी 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है, जो अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर लगाए गए टैरिफ में संभवत: आज अन्य देशों की तुलना में सबसे अधिक है।

इस वित्तीय वर्ष के बजट में तीन कर्तव्यों को ध्यान में रखा गया है। (1) विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करते हुए भारत की आर्थिक विकास दर को और अधिक तेज किया जाय ताकि भारत को वैश्विक स्तर पर चल रही उथल पुथल से बचाया जा सके; (2) भारतीय युवाओं में कौशल का विकास करना ताकि तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर हो रहे परिवर्तनों के लिए वे अपने आप को तैयार कर सकें; (3) देश में समावेशी विकास हो सके एवं भारत के संसाधनों का उपयोग समस्त नागरिकों की भलाई में किया जा सके और कोई भी नागरिक, नगर एवं राज्य आर्थिक विकास की धारा से बाहर नहीं रहे।

वैश्विक स्तर पर उक्त वर्णित परिस्थितियों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी रही। परंतु, भारत की विकास दर की इस गति को आगामी वर्षों में भी बनाए रखने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई है। भारत आज दुर्लभ खनिज पदार्थों तथा सेमीकंडक्टर एवं चिप्स का भारी मात्रा आयात करता है। चिप्स को तो आज के उत्पादों के निर्माण में तेल की भूमिका के रूप में देखा जा रहा है। इन दोनों पदार्थों पर चीन एवं अमेरिका का लगभग पूर्णत: एकाधिकार है।

भारत अपने आप को इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाना चाहता है, इस दृष्टि से बजट में भारत में ही दुर्लभ खनिज पदार्थों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए ओड़िसा, केरल, तमिलनाडु एवं आन्ध्रप्रदेश स्थित खदानों में से कच्चे माल को निकालकर इसे संसाधित करते हुए भारत में ही दुर्लभ खनिज पदार्थों के निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बजट में उक्त चारों राज्यों में एक कोरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। इसी प्रकार, भारत में ही सेमीकंडक्टर एवं चिप्स के निर्माण हेतु विनिर्माण इकाईयों की स्थापना को प्रोत्साहन देने के लिए बजट में कई उपायों की घोषणा की गई है एवं इस हेतु 40,000 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान भी किया गया है। साथ ही, इसके लिए बजट में सेमीकंडकर मिशन 2.0 को लागू करने की भी घोषणा की गई है। इससे कम्पनियों को भारत में इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में विनिर्माण इकाईयों को स्थापित करने का प्रोत्साहन मिलेगा।

हाल ही में भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते सम्पन्न किए हैं, इन समझौतों में 27 विकसित देशों के समूह, यूरोपीयन यूनियन से किया गया मुक्त व्यापार समझौता भी शामिल है। इसे “मदर आफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है क्योंकि यह समझौता 28 देशों (27+1) के बीच एक साथ किया गया सबसे बड़ा समझौता है। इन मुक्त व्यापार समझौतों से भारत में वस्त्र एवं परिधान उद्योग, समुद्रीय पदार्थ उद्योग, चमड़ा उद्योग, खिलौना उद्योग एवं जेम्स एवं ज्वेलरी उद्योग, आदि को सबसे अधिक लाभ होने जा रहा है।

इन उद्योगों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम भारी मात्रा में कार्यरत हैं। भारत में उक्त वर्णित पदार्थों के निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बजट में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग को रियायतें देने का प्रयास किया गया है ताकि उक्त वर्णित उत्पादों की मांग में होने वाली वृद्धि को पूर्ण किया जा सके। इस उद्देश्य हेतु 10,000 करोड़ रुपए का एसएमई फंड भी बनाया गया है। टेक्स्टायल उद्योग को भी विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि भारत में निर्मित वस्त्र एवं परिधानों को विश्व के पटल पर रखा जा सके। साथ ही, बायोफार्मा क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भी 10,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त फंड की व्यवस्था, बायोफार्मा शक्ति के रूप में, इस बजट में की गई है। इससे भारतीय दवा उद्योग को विश्व के मानचित्र पर और आगे ले जाने में सहायता मिलेगी।

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में विकसित आधारभूत संरचना की अहम भूमिका रहती है। इस बजट के माध्यम से भारत में आधारभूत संरचना को विकसित करने के उद्देश्य से पूंजीगत खर्चों में भारी भरकम वृद्धि की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूंजीगत खर्चों के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गई थी, इसे वर्ष 2026-27 के बजट में बढ़ाकर 12.20 लाख करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2014-15 के बजट में पूंजीगत खर्चों के लिए केवल 2 लाख करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया गया था। पिछले 13 वर्षों में पूंजीगत खर्चों में 6 गुना से भी अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

पूंजीगत खर्चों में वृद्धि से कई क्षेत्रों में सरकारी निवेश भी बढ़ता है एवं इससे अंततः रोजगार के लाखों नए अवसर निर्मित होते हैं। बल्कि, अब तो सरकार के साथ साथ निजी क्षेत्र को भी अपने पूंजी निवेश को बढ़ाना होगा। क्योंकि, सरकार के पूंजीगत खर्चों में अतुलनीय वृद्धि से देश में ही विभिन्न उत्पादों के निर्माण में तेज गति से वृद्धि होगी और वर्तमान विनिर्माण इकाईयों की उत्पादन क्षमता का उपयोग 80 प्रतिशत से ऊपर निकल जाएगा, जो वर्तमान में लगभग 75 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है, इससे नई उत्पादन इकाईयों को स्थापित करना आवश्यक होगा। अतः भारत में अब निजी क्षेत्र में भी निवेश बढ़ेगा, इसमें विदेशी निवेश भी शामिल है।

भारत में उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में रेल्वे की मुख्य भूमिका रहती है। भारत में इन उत्पादों की गतिशीलता को बढ़ाने के उद्देश्य से 7 नए हाई स्पीड रेल कोरिडोर बनाए जाने की घोषणा भी इस बजट में की गई है। यह कोरिडोर मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बैंगलोर, हैदराबाद से चेन्नई, चेन्नई से बैंगलोर, दिल्ली से वाराणसी एवं वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच विकसित किए जाएंगे। यह क्षेत्र विकास के नए केंद्र बन जाएंगे।

भारत को विश्व में लाजिस्टिक हब के रूप में स्थापित करने के लिए इस बजट में 10,000 करोड़ रुपए का विशेष फंड बनाया जा रहा है ताकि भारत में ही कंटेनर के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में मेडिकल टुरिजम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 5 हब बनाए जाएंगे। इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र एवं राज्यों को भी साथ में लिया जाएगा। इससे भारत में उच्च गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकेंगी एवं अन्य देशों के नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारत की ओर आकर्षित होंगे।

इसी प्रकार, भारत में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बौद्ध सर्किट का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे अन्य देशों के बौद्ध धर्म के अनुयायी भारत में धार्मिक पर्यटन हेतु आकर्षित हो सकेंगे। भारत को पूरे विश्व की आध्यात्मिक राजधानी कहा जाता है क्योंकि भारत में समस्त धर्मों का आदर किया जाता है।

पूरे विश्व में ऐनिमेशन, विजुअल इफेक्ट, गेमिंग एवं कॉमिक क्षेत्र तेज गति से आगे बढ़ रहा है। भारतीय युवाओं को इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर तलाशने एवं इस क्षेत्र को भारत में ही बढ़ाने के उद्देश्य से इस क्षेत्र को प्रोत्साहन देने का निर्णय इस बजट में किया गया है। इस क्षेत्र में वर्ष 2030 तक 20 लाख युवाओं की आवश्यकता पड़ेगी। अतः इस हेतु भारत में ही विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में इस क्षेत्र में शिक्षा एवं कौशल प्रदान करने हेतु उच्च शिक्षा प्रदान किए जाने की व्यवस्था की जा रही है।

आयकर की दरों में किसी प्रकार की वृद्धि प्रस्तावित नहीं है। जबकि आयकर के नियमों को सरल बनाया गया है। आय कर की नई योजना के अंतर्गत अब 12 लाख रुपए तक की आय पर शून्य आयकर लगाया जाएगा। आयकर रिटर्न फाइल करने हेतु समय सीमा को भी बढ़ाया जा रहा है। इस प्रकार, इस संदर्भ में आयकर नियमों को सरल बनाया जा रहा है

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत किए गए बजट की कुछ मुख्य विशेषताओं में वित्तीय अनुशासन का अनुपालन किया जाना भी शामिल है। बजटीय घाटे को 4.5 प्रतिशत के अंदर रखने का प्रयास सफल रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजटीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद का 4.4 प्रतिशत रखने में सफलता हासिल हुई है। जबकि, अमेरिका जैसे विकसित देश में भी आज बजटीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 6 प्रतिशत से अधिक है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में बजटीय घाटे को कम करते हुए इसे 4.3 प्रतिशत तक नीचे लाने का प्रयास किया जा रहा है, हालांकि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान पूंजीगत खर्चों में 1.1 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि भी प्रस्तावित है।

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