पटना। सारण दीपावली नजदीक आते ही सारण के बाजारों में रौनक बढ़ गई है। इस बार मिट्टी के दीयों की अच्छी मांग से कुम्हारों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई है। वर्षों से मिट्टी के दीये और बर्तन बनाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले कारीगरों के लिए दीपावली बेहतर आमदनी की उम्मीद लेकर आई है। बाजारों में बड़ी संख्या में लोग मिट्टी के दीयों की खरीदारी करते नजर आ रहे हैं।
अलग-अलग डिजाइन के दीयों से सजे बाजार
दीपावली को लेकर बाजारों में पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ रंग-बिरंगे और आकर्षक डिजाइन वाले दीये भी उपलब्ध हैं। लोग अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार इनकी खरीदारी कर रहे हैं। घरों की सजावट के लिए छोटे-बड़े आकार के दीयों की मांग देखने को मिल रही है।
चाइनीज लाइटों के बजाय मिट्टी के दीयों पर जोर
इस बार कई लोग चाइनीज लाइटों और कृत्रिम सजावटी सामान के बजाय मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दे रहे हैं। खरीदारी करने पहुंचे लोगों का कहना है कि दीपावली का वास्तविक महत्व पारंपरिक तरीके से दीप जलाने में है। मिट्टी के दीये हमारी संस्कृति, आस्था और परंपरा से जुड़े हैं। इन्हें खरीदने से स्थानीय कुम्हारों को भी रोजगार मिलता है।
अर्नब चक्रवात की बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें
हालांकि, इस बार कुम्हारों के लिए दीपावली की तैयारी आसान नहीं रही। अर्नब चक्रवात के प्रभाव से हुई लगातार दो दिनों की बारिश ने उनके कामकाज को प्रभावित किया। बारिश के कारण मिट्टी में नमी बनी रही, जिससे दीयों को सुखाने और तैयार करने में परेशानी हुई। चाक पर बनाए गए और सांचे से निकाले गए कई दीये बारिश के पानी में भीग गए। त्योहार नजदीक होने के कारण कुम्हारों के सामने समय पर दीयों को पूरी तरह तैयार करने की चुनौती भी रही। मौसम की मार के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दीये तैयार करने में जुटे रहे।
अच्छी बिक्री से कुम्हारों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
बारिश से हुई परेशानी के बीच बाजार में मिट्टी के दीयों की अच्छी बिक्री ने कुम्हारों को राहत दी है। दीये बेचने वाले कुम्हारों का कहना है कि इस बार ग्राहक लगातार बाजार पहुंच रहे हैं और अपनी जरूरत के मुताबिक दीये खरीद रहे हैं। उनके मुताबिक, बिक्री में कोई खास कमी नहीं है। ग्राहकों का मिल रहा साथ उनकी मेहनत को सफल बना रहा है और परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद जगा रहा है।
कुल मिलाकर, इस दीपावली सारण के बाजारों में मिट्टी के दीयों की चमक कुम्हारों के लिए खुशियों की रोशनी लेकर आई है। बारिश की मुश्किलों के बावजूद लोगों का बढ़ता रुझान पारंपरिक कला और संस्कृति को संजोने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों की आजीविका को भी मजबूती देने का संदेश दे रहा है।







