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भारत के पड़ोस में तैनात होंगे अमेरिकी युद्धपोत, बांग्‍लादेश कर रहा ड‍िफेंस डील

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 14, 2026
in विश्व
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ढाका: बांग्लादेश और अमेरिका रणनीतिक रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। दोनों देशों में इस समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। इन समझौतों के तहत अमेरिकी सेना को बांग्लादेश के बंदरगाहों और हवाई अड्डों तक पहुंच मिल जाएगी। हालांकि, इससे भारत की टेंशन बढ़ सकती है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी से चीन के लिए भी उपस्थिति बढ़ाना अनिवार्य हो जाएगा। ऐसे में दशकों से शांत पड़ा यह क्षेत्र वैश्विक महाशक्तियों के बीच जंग का अखाड़ा बन सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, 5-7 मई को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के एक प्रतिनिधिमंडल की ढाका यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने पहले से हस्ताक्षरित ‘पारस्परिक व्यापार समझौते’ (ART) के कार्यान्वयन की शर्तों पर चर्चा की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को लिखे एक निजी पत्र में, भविष्य की आर्थिक रियायतों को दो रक्षा समझौतों के पूरा होने से जोड़ा है: ‘सैन्य सूचना की सामान्य सुरक्षा समझौता’ (GSOMIA) और ‘अधिग्रहण और क्रॉस-सर्विसिंग समझौता’ (ACSA)।

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बांग्लादेश में ठहर सकेंगे अमेरिकी युद्धपोत और विमान

ACSA पर हस्ताक्षर होने से अमेरिकी जंगी जहाज और विमान बांग्लादेश के बंदरगाहों और हवाई अड्डों का उपयोग रखरखाव, ईंधन भरने और री-सप्लाई के लिए कर सकेंगे। इसमें चटगांव और मातारबारी जैसे रणनीतिक बंदरगाह भी शामिल हैं। GSOMIA समझौते के तहत बांग्लादेश और अमेरिका खुफिया जानकारियों का भी आदान प्रदान करेंगे। यह कदम अमेरिका को बंगाल की खाड़ी और चीनी ऊर्जा गलियारों से हिंद महासागर तक जाने वाले मार्गों पर लगातार निगरानी रखने का क्षेत्र प्रदान करेगा।

बांग्लादेश को बदले में क्या देगा अमेरिका?

अमेरिका इसके एवज में बांग्लादेश के कपड़ों पर 19% की रियायती टैरिफ दर और शुल्क-मुक्त व्यापार व्यवस्था को मंजूरी देगा। साथ ही, इस कदम से ढाका का भू-राजनीतिक झुकाव भी काफी हद तक बदल जाएगा, क्योंकि वह लंबे समय से बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे के लिए चीनी निवेश पर निर्भर रहा है और अपने लगभग 70% हथियार चीन से ही प्राप्त करता है।

शेख हसीना ने क्या आरोप लगाया था?

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने आरोप लगाया था कि अमेरिका बंगाल की खाड़ी में सेंट मार्टिन द्वीप पर सैन्य अड्डा बनाने के लिए दबाव डाल रहा था, जिसे न मानने के कारण उनकी सत्ता गई। हालांकि, अमेरिका ने इन दावों को गलत बताया है। हसीना के अनुसार, यह द्वीप उन्हें सत्ता में बने रहने के बदले में मांगा जा रहा था। हसीना का दावा है कि अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए इस द्वीप की जरूरत है, जो भारत के लिए भी सुरक्षा के लिहाज से एक चिंता का विषय है।

चीन के लिए कितना बड़ा झटका?

चीन के लिए, यह घटनाक्रम उसकी मलक्का जलडमरूमध्य को बाईपास करने की रणनीति को कमजोर कर देगा। इससे चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा (CMEC) और क्यौकफ्यू बंदरगाह तक जाने वाली तेल पाइपलाइनों में चीनी निवेश खतरे में पड़ सकता है। इसके अलावा चीन को घेरने की अमेरिका की रणनीतिक क्षमता में जबरदस्त वृद्धि भी होगी।

भारत के लिए कितना नुकसान?

बंगाल की खाड़ी भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। दशकों से यह क्षेत्र वैश्विक महाशक्तियों की नजर से बचा हुआ था। बांग्लादेश की नौसैनिक क्षमता कम होने के कारण भारत इस क्षेत्र में दबदबा बनाए हुए है। भारतीय नौसेना के कई महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे बंगाल की खाड़ी के किनारे बसे हुए हैं। भारत की परमाणु पनडुब्बियों का बेस भी इसी इलाके में स्थित है। ऐसे में अमेरिकी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों की आवाजाही से इस इलाके की शांति खतरे में पड़ सकती है।

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