नई दिल्ली। दुनियाभर की कंपनियां तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर पैसा खर्च कर रही हैं, लेकिन हर कंपनी को इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है. नई रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ एआई टूल खरीद लेने से बिजनेस नहीं बदलता, बल्कि पूरे काम करने के तरीके को बदलना पड़ता है. एक्सेंचर के सीईओ जूली स्वीट ने खुलकर बताया है कि कई कंपनियां एआई अपनाने की दौड़ में तो शामिल हैं, लेकिन उसे सही तरीके से इस्तेमाल करने में पीछे रह रही हैं. उनका कहना है कि आने वाले समय में वही कंपनियां आगे निकलेंगी जो अपने कर्मचारियों और बिजनेस मॉडल दोनों को एआई के हिसाब से बदलेंगी.
एआई पर खर्च बढ़ा, लेकिन रिजल्ट नहीं
लास वेगास में आयोजित ग्रेट प्लेस टू वर्क फॉर ऑल समिट के दौरान एक्सेंचर की सीईओ जूली स्वीट ने कहा कि आज कई कंपनियां एआई टूल्स पर तेजी से पैसा खर्च कर रही हैं, लेकिन इन निवेशों को असली बिजनेस बदलाव में बदलना अभी भी मुश्किल बना हुआ है. उनके मुताबिक एआई सिर्फ एक सॉफ्टवेयर या चैटबॉट नहीं है, बल्कि यह कंपनियों के पूरे सिस्टम और वर्कफ्लो को बदलने वाली टेक्नोलॉजी है. कई कंपनियां एआई खरीद तो रही हैं, लेकिन उनके कर्मचारी और मैनेजमेंट अभी तक इस बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं. यही वजह है कि एआई से उम्मीद के मुताबिक प्रोडक्टिविटी और ग्रोथ नहीं मिल पा रही है.
कर्मचारियों के लिए जरूरी हो रही एआई स्किल
जूली स्वीट ने बताया कि एक्सेंचर ने अपने कर्मचारियों के काम करने के तरीके में बड़े बदलाव किए हैं. अब कंपनी के अंदर प्रमोशन और करियर ग्रोथ को एआई स्किल्स से जोड़ा जा रहा है. यानी आने वाले समय में सिर्फ अनुभव नहीं बल्कि एआई की समझ भी नौकरी और प्रमोशन तय करेगी. उन्होंने कहा कि पहले डिजिटल बदलाव धीरे-धीरे आते थे, लेकिन एआई का असर बहुत तेजी से दिख रहा है. इसी वजह से कंपनियां अब शुरुआत से ही कर्मचारियों को एआई ट्रेनिंग देने पर जोर दे रही हैं. उनका मानना है कि आने वाले सालों में एआई की जानकारी लगभग हर नौकरी के लिए जरूरी स्किल बन जाएगी.
एआई के दौर में कंपनियां बदल रहीं पूरा सिस्टम
एक्सेंचर सीईओ के अनुसार, एआई के कारण कंपनियों को सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि अपना पूरा बिजनेस मॉडल बदलना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी ने कई बार अपनी आंतरिक संरचना में बदलाव किया ताकि एआई के तेज बदलावों के साथ खुद को ढाला जा सके. पहले कंपनी का फोकस केवल सर्विस और रीजन आधारित मॉडल पर था, लेकिन अब एआई आधारित लगातार बदलाव पर काम हो रहा है. जूली स्वीट ने यह भी माना कि इतने बड़े बदलाव कर्मचारियों के बीच असमंजस पैदा कर सकते हैं. इसलिए कंपनियों के लिए साफ कम्युनिकेशन और कर्मचारियों को साथ लेकर चलना बेहद जरूरी हो गया है. एआई का सही इस्तेमाल वही कंपनियां कर पाएंगी जो टेक्नोलॉजी के साथ अपनी सोच भी बदलेंगी.







