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Home राजनीति

बीजेपी या सीपीसी, कौन है सबसे बड़ी पार्टी और क‍िसके पास क‍ितनी ताकत ?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 13, 2026
in राजनीति, विश्व
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नई दिल्ली: चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के नेता भारत आए तो सिर्फ सरकारी अफसरों से नहीं मिले, बल्कि वे सीधे बीजेपी मुख्यालय गए और उससे भी बड़ी बात उन्होंने आरएसएस के नेताओं से भी मुलाकात की. कूटनीति के जानकार कह रहे क‍ि इसका साफ मतलब साफ है क‍ि ‘ड्रैगन’ अब समझ चुका है कि भारत में सत्ता का असली केंद्र साउथ ब्लॉक के साथ-साथ अब दीनदयाल उपाध्याय मार्ग (बीजेपी ऑफिस) और नागपुर (संघ मुख्यालय) में भी है. लेकिन जब दुन‍िया की दो सबसे बड़ी पार्टियां मिलती हैं तो सवाल उठता है कि इनमें से ‘बड़ा’ कौन है? क‍िसके पास क‍ितनी ताकत है?

कौन कितना भारी?

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  • सबसे पहले बात करते हैं ‘फौज’ की. बीजेपी दुनिया का सबसे बड़ा राजनीत‍िक परिवार है. इसके 18 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं. यह संख्या रूस, जापान या ब्रिटेन की कुल आबादी से भी ज्यादा है.
  • बीजेपी ओपन डोर पॉलिसी अपनाती है. यानी बीजेपी का दरवाजा सबके लिए खुला है. एक मिस्ड कॉल कीज‍िए, एक फॉर्म भर‍िये और आप दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का हिस्सा बन सकते हैं.
  • बीजेपी एक मास मूवमेंट की तरह काम करती है. हर जाति, हर धर्म को जोडने की कोशिश जारी है. पार्टी का मकसद हर क्षेत्र के व्यक्ति को इसमें जोड़ने का है. इसमें कामयाबी भी मिली है.

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC)

  • चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में 9.91 करोड़ सदस्य हैं जो चीन की आबादी का सिर्फ 7% हैं. इसका फोकस ज्या दातर लोगों को अपने साथ जोड़ने का उस तरह नहीं रहा, ज‍िस तरह बीजेपी का है.
  • चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का मॉडल ‘VIP ओनली’ है. यानी सीपीसी में घुसना हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने से भी ज्यादा मुश्किल है. इसल‍िए बहुत से लोग चाहकर भी इसमें शामिल नहीं हो पाते.
  • सीपीसी में शामिल होने के ल‍िए पहले अर्जी दो. फिर आपकी जांच होगी क‍ि क्या आप पार्टी के प्रति वफादार हैं?. इसके बाद कई साल तक प्रोबेशन पर रहना होगा. अगर आप क्लास में टॉपर हैं, बड़े बिजनेसमैन हैं या खास टैलेंट हैं, तभी आपको एंट्री मिलेगी.
  • चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का एक ही मंत्र है क‍ि उन्हें भीड़ नहीं, सिर्फ क्रीम चाहिए. वे मानते हैं कि ये 10 करोड़ लोग बाकी के 130 करोड़ चीनियों पर राज करने के लिए चुने गए हैं.
  • एक तरह से आप कह सकते हैं क‍ि बीजेपी ‘समुद्र’ है जिसमें कोई भी समा सकता है. चीनी कम्युनिस्ट पार्टी एक ‘किला’ है जिसके दरवाजे बंद हैं.

‘कंट्रोल’ किसके हाथ में है?

बीजेपी

ये दोनों पार्टियां अपनी-अपनी सरकारें चलाती हैं, लेकिन तरीका बिल्कुल उल्टा है. बीजेपी का स्ट्रक्चर अनोखा है. यहां एक पार्टी है, जो राजनीत‍ि करती है. सरकार बनाती है. लेकिन कहा जाता है क‍ि आरएसएस की आवाज सुनी जाती है. इसील‍िए चीनी नेता अगर आरएसएस के नेताओं से मिलने गए, तो वे जानते हैं कि बीजेपी को वैचारिक खुराक, अनुशासन और सबसे वफादार कार्यकर्ता यहीं से मिलते हैं.

सीपीसी
चीन में पार्टी और सरकार अलग नहीं है. शी जिनपिंग पार्टी के भी प्रमुख हैं, सेना के भी प्रमुख हैं और देश के राष्ट्रपति भी. वहां मीटिंग में बहस नहीं होती, सिर्फ आदेश सुने जाते हैं. अगर पार्टी ने कहा कल से यह शहर बंद, तो बंद. कोई कोर्ट नहीं जा सकता, कोई धरना नहीं दे सकता. चीन की हर कंपनी, हर कॉलेज, हर मोहल्ले में एक ‘पार्टी सेल’ होता है जो जासूसी करता है कि कोई पार्टी के खिलाफ तो नहीं बोल रहा.

चुनाव लड़ने की मशीन vs राज करने की मशीन

  • यहीं पर सबसे बड़ा फर्क है. बीजेपी को हर 5 साल में जनता के पास जाना पड़ता है. जनादेश लेना पड़ता है, जबक‍ि चीनी कम्युोन‍िष्टज पार्टी को जनता का गला पकड़ना आता है.
  • BJP: 24×7 इलेक्शन मोड में रहती है. एक चुनाव खत्म होते ही वे अगले की तैयारी में लग जाते हैं. ह्वाट्सऐप ग्रुप्स, पन्ना प्रमुख सरल ऐप से कनेक्टन रहते हैं. उन्हें मीडिया के सवालों का जवाब देना पड़ता है. गठबंधन के साथियों के नखरे उठाने पड़ते हैं. महंगाई बढ़ने पर डर लगता है कि चुनाव हार न जाएं.
  • CPC: 24×7 सर्विलांस मोड में रहती है. सीपीसी को चुनाव हारने का डर नहीं है, उन्हें तख्तापलट का डर है. इसलिए वे विकास पर जोर देते हैं ताकि जनता खुश रहे, और सेंसरशिप पर जोर देते हैं ताकि जनता चुप रहे. वे फेशियल रिकग्निशन कैमरे, सोशल क्रेडिट सिस्टम पर भरोसा करते हैं. वे तकनीक का इस्तेमाल चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि जनता पर नजर रखने के लिए करते हैं.

राष्ट्रवाद के दो रंग

  • BJP का राष्ट्रवाद: भारत को एक प्राचीन सभ्यता मानना, हिंदुत्व की जड़ों को मजबूत करना और इंडिया फर्स्ट की नीति. इनका लक्ष्य भारत को विश्वगुरु बनाना है.
  • CPC का राष्ट्रवाद: चीन को दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति बनाना. पुरानी बेइज्जती का बदला लेना. इनका लक्ष्य अमेरिका को पछाड़कर नंबर 1 बनना है.

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