Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home धर्म

पिंडदान क्यों और कैसे किया जाता है? जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 19, 2024
in धर्म
A A
पितृ पक्ष
12
SHARES
412
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली: पिंडदान हिंदू धर्म में पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान होता है. इसका उद्देश्य पितरों की आत्मा को तृप्त करना और उन्हें सुख और मोक्ष प्रदान करना होता है. पिंडदान मुख्य रूप से किसी की मृत्यु के बाद, श्राद्ध पक्ष, अमावस्या, या पवित्र स्थलों जैसे गया, वाराणसी, प्रयाग आदि में किया जाता है. इस अनुष्ठान में “पिंड” (गोलाकार चावल के लड्डू) अर्पित किए जाते हैं, जो मृतक की आत्मा का प्रतीक माने जाते हैं.

पिंडदान क्यों किया जाता है?

इन्हें भी पढ़े

Karwa Chauth

करवा चौथ पर हमेशा देर से क्यों निकलता है चांद?

October 25, 2026
Rashifal

15 दिन बाद कन्या राशि में आएंगे शुक्र, खुशियों से भरेगी 8 राशियों की झोली

October 23, 2026
Kaalratri

झण्डेवाला देवी मंदिर में माँ सिद्धिधात्री की पूजा-अर्चना के साथ नवरात्र संपन्न

October 20, 2026
Jhandewala Devi Temple

झण्डेवाला देवी मंदिर में सबकी मनोकामना पूरी करने वाली मां ‘महागौरी’ की पूर्ण विधि-विधान के साथ हुई पूजा-अर्चना!

October 19, 2026
Load More

पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए

हिंदू धर्म में माता-पिता का ऋण बहुत बड़ा माना जाता है. मान्यता है कि पिंडदान करने से यह ऋण उतरता है और व्यक्ति को पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है.

आत्मा की शांति के लिए

मान्यता है कि पिंडदान करने से मृतक की आत्मा को शांति मिलती है और वह अगले जन्म के लिए मुक्त हो जाती है.

मोक्ष की प्राप्ति

ये भी माना जाता है कि पिंडदान करने से मृत पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है, और वह सभी सुखों से परिपूर्ण हो जाती है

पितृदोष निवारण के लिए

मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली मे पितृदोष है, तो पिंडदान करने से यह दोष दूर हो जाता है.

पुण्य प्राप्ति के लिए

मान्यता है कि पिंडदान करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है.

कुल कल्याण के लिए

कुल की रक्षा और कल्याण के लिए भी पिंडदान किया जाता है. मान्यता है की पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं, जिससे कुल का कल्याण होता है.

वंश वृद्धि

पिंडदान से वंश में वृद्धि होती है और जीवन में समृद्धि आती है. परिवार में कोई बाधा या अशांति नहीं रहती.

पिंडदान कैसे किया जाता है?

पिंडदान करने के लिए सबसे पहले पिंड चावल, जौ का आटा, तिल, दूध और घी से पिंड बनाए जाते हैं. इन पिंडों का रूप गोलाकार होता है, जो जीवन और मृत्यु के चक्र का प्रतीक होता है. पिंडदान से पहले श्राद्ध कर्म किया जाता है, जिसमें पंडित द्वारा विधिवत रूप से मंत्रोच्चार और हवन किया जाता है. इसके माध्यम से पितरों को आह्वान किया जाता है. पिंडदान के दौरान ये पिंड जल, कुशा, और तिल के साथ पवित्र स्थान पर अर्पित किए जाते हैं.

ऐसा माना जाता है कि ये पिंड पितरों तक पहुंचते हैं और उनकी आत्मा को तृप्ति मिलती है. पिंडदान के साथ तर्पण भी किया जाता है, जल और काले तिल का तर्पण पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है. पिंडदान के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसमें अन्न, वस्त्र, और दक्षिणा का दान करने की परंपरा है.

गरुड़ पुराण में पिंडदान का महत्व

गरुड़ पुराण में पिंडदान का विशेष उल्लेख मिलता है. गरुड़ पुराण के अनुसार, अच्छे या बुरे कर्मों के आधार पर पिंडदान करने से मृत आत्मा को स्वर्ग या नरक की प्राप्ति होती है और वह पितृलोक में शांति प्राप्त करती है. इसे करने से मृतक की आत्मा की तृप्ति होती है और उनके जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होने की संभावना भी बढ़ जाती है. हिंदू धर्म में पिंडदान को पितरों के लिए सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण दान माना जाता है. पिंडदान करने से “पितृ ऋण” से भी मुक्ति मिलती है.

गरुड़ पुराण के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसकी आत्मा यमलोक की यात्रा करती है और इस दौरान उसे बहुत कष्टों का सामना करना पड़ता है. पिंडदान और श्राद्ध के माध्यम से आत्मा को इस कष्ट से मुक्ति मिलती है और उसे मो क्ष की ओर बढ़ने में सहायता मिलती है. गरुड़ पुराण के मुताबिक, आत्मा को पुर्नजन्म में 40 दिन का समय लगता है.

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

स्वर्ण मंदिर की स्थापना: गुरु अमर दास की दूरदृष्टि से लेकर विश्व प्रसिद्ध तीर्थ तक !

March 15, 2026
Manmohan Singh's

मनमोहन सिंह के स्मारक स्थल के लिए आवंटित होगी जगह, गृह मंत्रालय ने क्या कहा?

December 28, 2024
NSA अजीत डोभाल

NSA अजीत डोभाल को ‘लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार’, अमित शाह बोले- पीएम मोदी के हर बड़े सुरक्षा फैसले में रही अहम भूमिका

August 1, 2026
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • राजनाथ सिंह ने कांग्रेस को क्यों दी चेतावनी? बोले- ‘व्यक्तिगत मर्यादाओं का उल्लंघन मत कीजिए…’
  • पिथौरागढ़ को CM धामी की सौगात, 284 करोड़ की 67 योजनाएं शुरू
  • यमुना रिवर क्रूज का ट्रायल शुरू, CM रेखा गुप्ता ने किया निरीक्षण

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.