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इजरायल ने हमास चीफ की हत्या के लिए ईरान को ही क्यों चुना?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 5, 2024
in विश्व
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Ismail Haniya
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तेल अवीव: हमास सरगना इस्माइल हानिया की तेहरान में हत्या के बाद से ही मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। ईरान ने इस हत्या का आरोप इजरायल पर लगाया है। हालांकि, इजरायल ने इन आरोपों को न तो स्वीकार किया है और ना ही खारिज किया है। हानिया हमास के पॉलिटिकल विंग का प्रमुख था और दुनियाभर की सरकारों के साथ बातचीत में शामिल था। अपनी मौत से चंद दिनों पहले हानिया ने चीन का दौरा किया था, जहां उसने अपने प्रतिद्वंदी समूह फतह के साथ शांति के प्रस्ताव पर वार्ता की थी। इसके बाद हानिया ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए तेहरान पहुंचा था। उसकी हत्या ईरानी राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण वाली रात को ही कर दी गई थी।

कहां रहता था इस्माइल हानिया

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इस्माइल हानिया ने अपना पूरा जीवन इजरायल के खतरे से बचने पर खर्च कर दिया। इस्माइल हानिया हमास का पोलिटिकल ब्यूरो चीफ होने के कारण अलग-अलग देशों का दौरा करता रहता था। वह 2007 में फिलिस्तीनी प्राधिकरण के प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त होने के बाद से ही अगल-अलग देशों में गुप्त रूप से रहता था। उसके कतर में शरण लेने का खुलासा 2012 के बाद हुआ था। कतर में हमास के पोलिटिकल विंग का कार्यालय भी है। ऐसे में हानिया अपने इसी कार्यालय से कामकाज करता था और दूसरे देशों के साथ वार्ता भी करता था। वह हाल के इजरायल-हमास संघर्ष विराम वार्ता में भी सक्रिय रूप से शामिल था। इसके अलावा वह तुर्की में भी कुछ समय गुजारता था।

‘इजरायल’ ने हमास चीफ को ईरान में ही क्यों मारा

विशेषज्ञों का कहना है कि हमास सरगना इस्माइल हानिया की हत्या के लिए ईरान की राजधानी तेहरान का चयन एक फुलप्रूफ प्लानिंग का हिस्सा है। इजरायल ने इस घटना को काफी सोच-समझ कर अंजाम दिया है। इजरायल और ईरान की पुरानी दुश्मनी है। ईरान को हमास का कट्टर समर्थक माना जाता है। दूसरी ओर, ईरान की सैन्य ताकत उतनी ज्यादा नहीं है, जिससे इजरायल को अपने अस्तित्व पर खतरा महसूस हो। अप्रैल में ईरान के हमले ने उसकी सैन्य ताकत की पोल खोलकर रख दी थी, जिसमें से 99 फीसदी हथियार अपना लक्ष्य चूक गए। ऐसे में हमास सरगना को तेहरान में मारकर इजरायल ने एक साथ हमास और ईरान दोनों को कड़ा संदेश देने की कोशिश की है।

इजरायल ने कतर में हानिया को क्यों नहीं मारा

इजरायल के कतर में हमास सरगना की हत्या न करने के कई कारण थे। इनमें से पहला कारण कतर खाड़ी देश में अमेरिका का सहयोगी है। इतना ही नहीं, इजरायल कतर की ही मदद से हमास के साथ शांति वार्ता कर रहा था, जिसका उद्देश्य इजरायली बंधकों की सुरक्षित वापसी थी। अगर इजरायल कतर में हमास सरगना को निशाना बनाता तो इससे मध्य पूर्व के बाकी देश खुलकर इजरायल के विरोध में खड़े होते और सैन्य विकल्प भी तलाशते। इजरायल के इस फैसले का अमेरिका भी समर्थन नहीं करता और खुद को अलग कर लेता। ऐसे में इजरायल को भारी नुकसान उठाना पड़ता और अब्राहम संधि के कारण मित्र बने मध्य पूर्व के देशों से भी इजरायल को हाथ धोना पड़ता।

तुर्की में हमास चीफ की हत्या न करने का कारण

इजरायल ने तुर्की में हमास चीफ को इसलिए नहीं मारा, क्योंकि यह देश नाटो सदस्य है। नाटो के किसी एक सदस्य पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता। वर्तमान में रूस से नजदीकी के कारण तुर्की पहले से ही अमेरिका की नजरों पर चढ़ा है। ऐसे में तुर्की में हमास चीफ की हत्या को राष्ट्रपति एर्दोगन युद्ध की चुनौती मानते और हो सकता था कि इस्लामी देशों का खलीफा बनने के चक्कर में छोटे पैमाने पर हमला भी कर देते। तुर्की सैन्य रूप से काफी शक्तिशाली है और उसके साथ युद्ध में इजरायल को नुकसान उठाना पड़ता। दूसरा, तुर्की के नाटो सदस्य होने के कारण अमेरिका खुलकर इजरायल की मदद नहीं कर पाता। पश्चिमी देश भी इजरायल से दूरी बना लेते। ऐसे में इजरायल ने तुर्की में हमास चीफ को निशाना न बनाना ही उचित समझा।

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