नई दिल्ली: गुरु पूर्णिमा का अतिपावन पर्व आने वाला है, जिस पर आपकी पूर्ण निष्ठा हो, उन्हें अपना गुरु बनाना चाहिए। एक बार गुरु बनाने पर अथवा गुरु मंत्र प्राप्त करने पर गुरु की आज्ञा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। गुरु मंत्र को अत्यन्त गोपनीय रखा जाता है। नीति एवं नियमों का पालन करते हुए जो शिष्य गुरु के आदेश के अनुसार सुख-दुःख को एक समान मानकर अपना जीवन-यापन करता है, वही जीवन में पूर्ण रूप से सफल होता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बिना पूर्ण निष्ठा के अगर व्यक्ति सभी देवी-देवताओं की पूजा करता है, तो उसे पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं होता, परन्तु निष्ठा के साथ केवल एक ही देवी अथवा देवता की पूजा करने से व्यक्ति के सारे कार्य बन जाते हैं। इसी प्रकार निष्ठा पूर्ण एक गुरु से गुरु मंत्र प्राप्त कर उसी का निरन्तर जाप करने से कल्याण सम्भव है।
धर्मशास्त्र में स्वयं के कल्याण हेतु कुछ बातों को गोपनीय रखने को कहा गया है, जिसमें गुरु से प्राप्त गुरु मंत्र दीक्षा परम गोपनीय है। इसलिए शिष्य को चेतावनी दी जाती है कि, वह ध्यान रखे कि गुरु मंत्र कभी भी किसी को भी नहीं बताना चाहिए।
प्रकृति का नियम है कि जो शक्ति भीतर संचित रहती है, वही समय आने पर सबसे अधिक प्रभावशाली रूप में प्रकट होती है। बीज मिट्टी के भीतर छिपा रहता है, तभी वृक्ष बनता है, गर्भ में पलने वाला जीवन भी पूर्ण विकसित होने तक गोपनीय रहता है। इसी प्रकार गुरु मंत्र भी साधक के अंतःकरण में मौन रूप से विकसित होने वाली आध्यात्मिक शक्ति है।
यदि साधक बार-बार अपने मंत्र की चर्चा करता है, तो उसका मन बाहर की प्रतिक्रियाओं, प्रशंसा, शंका या तुलना में उलझ सकता है। इससे साधना का प्रवाह भीतर से हटकर बाहर की ओर हो जाता है। इसलिए गुरु मंत्र को गोपनीय रखने की परंपरा बनाई गई, ताकि उसकी ऊर्जा निरंतर साधक के भीतर ही परिपक्व होती रहे।
गुरु कृपा से प्राप्त दीक्षा रूपी मंत्र को सार्वजनिक स्थान, परिवार या मित्र समुदाय में भी प्रकट नहीं करना चाहिए। अगर पति ने गुरु मंत्र प्राप्त किया है, तो वह अपनी पत्नी को भी गुरु मंत्र न बताए, इस प्रकार केवल पत्नी ने गुरु मंत्र प्राप्त किया है, तो वह भी पति को न बताए, इसलिए प्रायः पति-पत्नी संग-संग मंत्र दीक्षा प्राप्त करते हैं। गुरु द्वारा गोपनीय निर्देशित मंत्र जाप की विधि, जो गुरु ने शिष्य को दीक्षित कर प्रदान की है, उसे कहीं किसी के सामने किसी भी परिस्थिति में उजागर नहीं करनी चाहिए।






