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Home विश्व

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दुनिया की क्यों है नज़र?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 29, 2024
in विश्व
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nuclear program
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नई दिल्ली: ईरान का परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) इन दिनों काफी चर्चा में रहा है। वजह ईरान-इजरायल संघर्ष के अलावा Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) के विफल हो जाने को भी माना जा रहा है। 2015 में हुए इस समझौते से अमेरिका ने 2018 में खुद को अलग कर लिया था। यह समझौता क्या था और अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम ( Nuclear Program) को लेकर क्या ताज़ा अपडेट्स हैं। आप इस आर्टिकल में पढ़ सकेंगे।

ताज़ा जानकारी यह है कि ईरान JCPOA Agreement को फिर से बहाल करने की कोशिश कर रहा है। ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रावंची  29 नवंबर को फिर से उन देशों के साथ बैठक करने वाले हैं, जो 2015 की बैठक में शामिल हुए थे। यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी और यूके के प्रतिनिधि बैठक में भाग लेने वाले हैं जबकि चीन, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका उपस्थित नहीं होंगे।

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क्यों हुआ था  JCPOA Agreement?

Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) को एक ऐतिहासिक समझौता कहा गया था। इस बैठक में फैसला हुआ था कि ईरान यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को सीमित करेगा। ईरान ने यह आश्वासन दिया था कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है। लेकिन International Atomic Energy Agency (IAEA) ने महत्वपूर्ण चिंताएं व्यक्त की हैं।

हालात पहली बार 2018 में बिगड़ने शुरू हुए थे, जब डोनाल्ड ट्रम्प ने एकतरफा समझौते से हटने और कठोर आर्थिक प्रतिबंधों को बहाल करने का फैसला किया था। अमेरिका के इस फैसले से ईरान की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हुए थे। अब ईरान को उम्मीद है कि यह समझौता एक बार फिर बहाल हो जाएगा।

कैसे शुरू हुआ ईरान का Nuclear Program

1950 के दशक में तेहरान परमाणु अनुसंधान केंद्र की स्थापना हुई है। ईरान के पूर्व शाह, मोहम्मद रज़ा पहलवी ने ईरान का परमाणु कार्यक्रम शुरू किया।

1960 के दशक में ईरान ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर किए और संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों से परमाणु सहायता प्राप्त करना शुरू किया।⁠

1970 के दशक में बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण के साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विस्तार हुआ, जिसे शुरुआत में जर्मन कंपनी सीमेंस द्वारा डिजाइन किया गया था।

1979 में ईरानी क्रांति के कारण देश का परमाणु कार्यक्रम रुक गया।

1980 के दशक में ईरान ने पाकिस्तान और अन्य देशों की सहायता से गुप्त रूप से अपने परमाणु कार्यक्रम को पुनर्जीवित करना शुरू कर दिया।1990 के दशक में नटान्ज़ यूरेनियम संवर्धन संयंत्र सहित नई सुविधाओं के निर्माण के साथ, ईरान के परमाणु कार्यक्रम का विस्तार हुआ।

2002 के दशक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का खुलासा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने हुआ, जिससे देश के इरादों पर चिंता पैदा हो गई।

2003 में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम की जांच शुरू की।

2006 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्रतिबंध लगाया।

⁠2015 में ईरान ने आर्थिक प्रतिबंधों से राहत के बदले अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करते हुए विश्व शक्तियों के साथ Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) पर हस्ताक्षर किए।

2018 में संयुक्त राज्य अमेरिका JCPOA  से हट गया और ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए।

2019 में ईरान ने अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता और भंडार को बढ़ाते हुए JCPOA द्वारा निर्धारित सीमाओं का उल्लंघन करना शुरू कर दिया।

फिलहाल ईरान का परमाणु कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है, देश नए सेंट्रीफ्यूज विकसित कर रहा है और अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता बढ़ा रहा है।

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