विकाश शुक्ला
उमरिया ( मध्य प्रदेश)। देश के चर्चित टाइगर रिजर्वों में सुमार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से आई एक बाघिन की मौत की ख़बर ने स्थानीय जनों के साथ ही वन्यजीव प्रेमियों को मायूस कर दिया। डॉटी (T-17) नामक बाघिन की मौत हो गई। उसकी उम्र 14 वर्ष थी। कहा जाता है कि बांधवगढ़ की चर्चित बाघों की पीढ़ी में सुमार ‘डॉटी’ ने अपने जीवनकाल में चार बार शावकों को जन्म देकर बांधवगढ़ में बाघों के साम्राज्य को आबाद किया। लेकिन उसकी मौत की ख़बर सुनकर लोग मायूस हैं। शुक्रवार हाथियों से गस्त के दौरान बीटीआर के मझखेता बीट में उसका शव बरामद हुआ।

माथे पर D का निशान
इस चर्चित बाघिन का जन्म बांधवगढ़ के मग्धी क्षेत्र में वर्ष 2012 में हुआ था। इसके माथे पर ‘डी’ (अंग्रेजी वर्णमाला का शब्द D) जैसा निशान था। और इसके बेखौफ चलने के अंदाज से पर्यटक आकर्षित होते थे। कई बार पर्यटकों को मग्धी क्षेत्र में डॉटी के दीदार होते थे।
मौत की वजह स्पष्ट नहीं
टाइगर रिजर्व के मानपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत हरदिहा कैंप के समीप मझखेता बीट में गस्त के दौरान शुक्रवार को शाम बाघिन का शव बरामद हुआ। जिसकी पहचान डॉटी नामक बाघिन के तौर पर की गई। डॉटी के मौत की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। जबकि वन विभाग के सूत्रों का दावा है, कि उसकी मौत वृद्धावस्था के कारण हुई हो सकती है। फ़िलहाल शनिवार (10 अक्टूबर) को पोस्टमार्टम के बाद डॉटी के शव का दाह संस्कार कर दिया गया।

दो शावकों की सुरक्षा बनी चुनौती
डॉटी की मौत के बाद उसके लगभग 15 से 16 माह के दो शावकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, बाघिन का शव मिलने के बाद घटनास्थल के आसपास शावक नजर नहीं आए। ऐसे में उनकी मौजूदगी और गतिविधियों के निगरानी के लिए बीटीआर की टीम निगरानी में जुटी है।
इन्होंने कहा –
मझखेता बीट में हाथियों से गस्त के दौरान एक मादा बाघिन का शव देखा गया। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना के बाद तत्काल डॉग स्क्वायड बुलाया गया। पीएम के दौरान प्रथम दृष्टया जो साक्ष्य मिले हैं, बता रहे हैं कि मौत का कारण प्राकृतिक है।
– डॉ अनुपम सहाय, क्षेत्र संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व






