Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home विशेष

शिक्षा में संस्कृत अनिवार्य करें

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 4, 2022
in विशेष
A A
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

वेद प्रताप वैदिक

गुजरात के शिक्षामंत्री से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ प्रमुख कार्यकर्ताओं ने अनुरोध किया है कि वे अपने प्रदेश में संस्कृत की अनिवार्य पढ़ाई शुरु करवाएं। यह मांग सिर्फ संघ के स्वयंसेवक ही क्यों कर रहे हैं और सिर्फ गुजरात के लिए ही क्यों कर रहे हैं? भारत के हर तर्कशील नागरिक को सारे भारत के लिए यह मांग करनी चाहिए, क्योंकि दुनिया में संस्कृत जैसी वैज्ञानिक, व्याकरणसम्मत और समृद्ध भाषा कोई और नहीं है। यह दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा तो है ही, शब्द भंडार इतना बड़ा है कि उसके मुकाबले दुनिया की समस्त भाषाओं का संपूर्ण शब्द-भंडार भी छोटा है।

इन्हें भी पढ़े

Supreme court

राम मंदिर चढ़ावा कथित चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र, यूपी सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस!

July 13, 2026
PM modi

पीएम मोदी का ऑस्ट्रेलिया दौरा संपन्न, 40 साल बाद न्यूज़ीलैंड यात्रा पर रवाना

July 10, 2026
Kejriwal

केजरीवाल का मोदी सरकार पर हमला ‘राम मंदिर में बेईमानी और चढ़ावा चोरी करने वालों को बचाया जा रहा’!

July 10, 2026
aiims delhi

AIIMS दिल्ली का बड़ा खुलासा, ऑपरेशन के लिए ढाई साल की वेटिंग, RTI ने उठाए गंभीर सवाल

July 10, 2026
Load More

अमेरिकी संस्था ‘नासा’ के एक अनुमान के अनुसार संस्कृत चाहे तो 102 अरब से भी ज्यादा शब्दों का शब्दकोश जारी कर सकती है, क्योंकि उसकी धातुओं, लकार, कृदंत और पर्यायवाची शब्दों से लाखों नए शब्दों का निर्माण हो सकता है। संस्कृत की बड़ी खूबी यह भी है कि उसकी लिपि अत्यंत वैज्ञानिक और गणित के सूत्रों की तरह है। जैसा बोलना, वैसा लिखना और जैसा लिखना, वैसा बोलना। अंग्रेजी और फ्रेंच की तरह संस्कृत हवा में ल_ नहीं घुमाती है।

‘नासा’ ने अपने वैज्ञानिक अनुसंधानों और कंप्यूटर के लिए संस्कृत को सर्वश्रेष्ठ भाषा बताया है। संस्कृत सचमुच में विश्व भाषा है। इसने दर्जनों एशियाई और यूरोपीय भाषाओं को समृद्ध किया है। संस्कृत को किसी धर्म-विशेष से जोडऩा भी गलत है। संस्कृत जब प्रचलित हुई, तब पृथ्वी पर न तो हिंदू, न ईसाई और न ही इस्लाम धर्म का उदय हुआ था। संस्कृत भाषा किसी जाति-विशेष की जागीर नहीं है। क्या उपनिषदों का गाड़ीवान रैक्व ब्राह्मण था? संस्कृत को पढऩे का अधिकार हर मनुष्य को है।

औरंगजेब के भाई दाराशिकोह क्या हिंदू और ब्राह्मण थे? उन्होंने 50 उपनिषदों का संस्कृत से फारसी में अनुवाद ‘सिर्रे अकबर’ के नाम से किया था। अब्दुल रहीम खानखाना ने ‘खटकौतुकम’ नामक ग्रंथ संस्कृत में लिखा था। तेहरान विश्वविद्यालय में मेरे एक साथी प्रोफेसर कुरान-शरीफ का अनुवाद संस्कृत में करने लगे थे। कुछ ईसाई विद्वानों ने संस्कृत ‘ख्रीस्त गीता’ और ‘ख्रीस्त भागवत’ भी लिखी है। कुछ अंग्रेज विद्वानों ने अब से लगभग पौने 200 साल पहले बाइबिल का संस्कृत अनुवाद ‘नूतनधर्म्मनियमस्य ग्रंथसंग्रह:’ के नाम से प्रकाशित कर दिया था।
लगभग 40 साल पहले पाकिस्तान में मुझे एक पुणे के मुसलमान विद्वान मिले। मैं उनके घर गया। वे मुझसे लगातार संस्कृत में ही बात करते रहे। भारत में पंडित गुलाम दस्तगीर और डा. हनीफ खान जैसे संस्कृत के विद्वानों से मेरी पत्नी डॉ. वेदवती का सतत संपर्क बना रहा। अलीगढ़ मुस्लिम वि.वि. की संस्कृत पंडिता डॉ. सलमा महफूज ने ही दाराशिकोह के ‘सिर्रे अकबर’ का हिंदी अनुवाद किया है। अभी भी मेरे कई परिचित मुसलमान मित्र विभिन्न विश्वविद्यालयों में संस्कृत के आचार्य हैं।

इसीलिए मेरा निवेदन है कि संस्कृत को किसी मजहब या जाति की बपौती न बनाएं। जरुरी यह है कि भारत के बच्चों को संस्कृत, उनकी उनकी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा हिंदी 11 वीं कक्षा तक अवश्य पढ़ाई जाए और फिर अगले तीन साल बी.ए. में उन्हें छूट हो कि वे अंग्रेजी या अन्य कोई विदेशी भाषा पढ़ें। कोई भी विदेशी भाषा सीखने के लिए तीन साल बहुत होते हैं। उसके कारण हमारे बच्चों को संस्कृत के महान वरदान से वंचित क्यों किया जाए?

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
anurag kashyap

अनुराग कश्यप ने ब्राह्मणों पर किया भद्दा कमेंट, मांगनी पड़ी माफी!

April 19, 2025
RSS

संघ द्वारा चलाए जा रहे पंच परिवर्तन कार्यक्रम से संभव है सामाजिक परिवर्तन

March 7, 2026
Siddaramaiah DK Shivakumar

कर्नाटक का किला जीत तो गई कांग्रेस लेकिन अब यहां फंसेगा मामला?

May 13, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • दिल्ली में SIR की तारीख बढ़ी, जानें- अब कब तक भर सकते हैं एन्यूमरेशन फॉर्म
  • सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, वाराणसी एलिवेटिड कॉरिडोर… कैबिनेट मीटिंग में हुए 7 बड़े फैसले
  • चीन हो गया बेचैन, आखिर इस रेस में भारत से कैसे पिछड़ गए?

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.