Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

नामकरण की माया

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 18, 2023
in राष्ट्रीय, विशेष
A A
Supreme court
23
SHARES
754
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

अजय दीक्षित


राजनीतिक दलों की नजर सिर्फ वोट बैंक पर लगी रहती है, फिर इसके लिए चाहे जैसे भी हथकंडे क्यों न अपनाने पड़े । पिछले दिन सुप्रीम कोर्ट ने शहरों और स्थलों के नया नाम देने पर टिप्पणी की हैं।

इन्हें भी पढ़े

HAL

HAL ने तैयार किया नया स्टील्थ क्रूज़ मिसाइल कॉन्सेप्ट, भारत की मारक क्षमता को मिलेगी और मजबूती

March 25, 2026
Railway

रेल टिकट रिफंड नियमों में बड़ा बदलाव, इस तारीख से होगा लागू

March 25, 2026
pm modi

लोकसभा में इन 4 चार बिल पर चर्चा करेगी मोदी सरकार!

March 24, 2026
gas cylinder

अब हर घर तक पहुंचेगा सिलेंडर, सरकारी कंपनियां बना रही हैं ये धांसू प्लान

March 24, 2026
Load More

वोटों के ध्रुवीकरण के मकसद से दायर की गई एक जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करके यह साबित कर दिया कि व्यर्थ के विवादों को जन्म देने से देश का भला नहीं होने वाला । यह याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि देश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक-धार्मिक स्थलों के मूल नामों का पता लगाने और उनके वर्तमान नाम से आक्रांताओं के नाम को हटाने के लिए एक नामकरण आयोग का गठन किया जाये । याचिका में यह भी कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट पुरातत्व विभाग को पुराने नामों को प्रकाशित करने के लिए निर्देश दें । याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि यह उन मुद्दों को जीवंत करेगा, जो देश में बवाल करवा सकते हैं ।

फैसला सुनाते हुए बेंच ने कहा कि देश के इतिहास को उसकी वर्तमान और आने वाली पीढिय़ों के लिए छेडऩ नहीं चाहिये । कोर्ट ने कहा, हिन्दू धर्म एक धर्म नहीं है बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है । इस धर्म में कोई कट्टरता नहीं है । खंडपीठ का कहना था कि अतीत को खोदने से केवल दुश्मनी ही पैदा होगी । शीर्ष कोर्ट के इस आदेश से स्पष्ट है कि नया नामकरण करने के निहित  ! राजनीतिक स्वार्थ हैं । इसका मकसद वोट आधारित राजनीति है । राजनीतिक दल देश में मौजूदा समस्याओं के समाधान और विकास की नई तस्वीर पेश करने के बजाय जन भावनाओं को भुनाने के लिए ऐसे विवादित मुद्दे भुनाते रहे हैं । इसमें राष्ट्रीय दल के साथ ही क्षेत्रीय दल भी पीछे नहीं हैं । आजादी के बाद से अब तक 21 राज्यों ने कुल 244 जगहों के नाम बदले हैं । सबसे ज्यादा 76 जगहों के नाम आन्ध्र प्रदेश में बदले गये हैं । तमिलनाडु ने 31और केरल ने 26 जगहों का नाम बदला है । महाराष्ट्र ने भी 18 जगहों का नाम बदला है । उत्तर प्रदेश में आजादी के बाद से अब तक 8 शहरों का नाम ही बदला गया है ।

आजादी के बाद से अब तर्क देश के 9 राज्यों और 2 संघशासित प्रदेशों का भी नाम बदला गया है । किसी भी शहर या जिले का नाम बदलने के लिए सबसे पहले किसी विधायक या एमएलसी द्वारा इसके लिए सरकार से मांग करना बेहद जरूरी होता है । आम लोगों को इस बदलाव की भारी कीमत चुकानी पड़ती है ।  औसतन एक शहर का नाम बदलने में 300 करोड़ रुपये तक खर्च होते हैं ।  अगर शहर बड़ा हो तो यह राशि 1000 करोड़ तक भी पहुंच सकती है ।  यह खर्च देश और दुनिया में किसी भी शहर की प्रसिद्धि पर निर्भर करता है कि नाम बदलवाने पर कितने पैसे का खर्च आयेगा ।

शहर के नए नाम के साथ ही वहां स्थित हर आधिकारिक स्थानों के नामों में बदलाव किया जाता है ।  तब जाकर किसी शहर का नाम बदलता है ।  जब भी किसी शहर या जगह का नाम बदला जाता है तो उसमें करोड़ों रुपयों का खर्चा आ जाता है ।  इसकी वजह है कि बदले गए नाम को हर जगह बदलना पड़ता है ।  जैसे जब किसी शहर का नाम बदला जाता है तो सभी दस्तावेजों में यह नया नाम दर्ज करना पड़ता है ।  रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन आदि जगहों पर भी नया नाम लिखा जाता है। इन्हीं सब प्रक्रिया के चलते नाम बदलने में करोड़ों रुपयों का खर्च आ जाता है। नाम बदलने में हुआ व्यय लोगों की गाढ़ी कमाई से चुकाये गये टैक्स से पूरा होता है । ऐसे में दूसरी जरूरी विकास योजनाओं के बजट में कटौती करके इस राशि का प्रावधान किया जाता है ।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
new parliament

नए संसद भवन की क्या जरूरत, बेकार है वहां जाना…

May 27, 2023
special intensive revision

वोटर लिस्ट, SIR और भारतीय लोकतंत्र की सियासत : एक निष्पक्ष विश्लेषण

August 19, 2025
Swami Avimukteshwarananda

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक, हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

February 27, 2026
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • मीन राशि में शनि-मंगल-बुध की युति, त्रिग्रही योग करेगा इन राशियों पर खुशियों की बौछार
  • मिनटों में खाना पचाता है पान का शरबत, जानें कैसे बनाएं?
  • क्रिमिनल जस्टिस’ को फेल करती है 8 एपिसोड वाली सीरीज, अब आ रहा नया सीजन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.