नई दिल्ली। अमरनाथ धाम की वार्षिक यात्रा 29 जून से शुरू होगी और इसका समापन 19 अगस्त को होगा। अमरनाथ धाम हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थों में से एक है। अमरनाथ धाम को तीर्थों का तीर्थ भी कहा जाता है। अमरनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित है। हर साल आषाढ़ माह की पूर्णिया से अमरनाथ धाम की यात्रा शुरू होती है और रक्षाबंधन तक यह यात्रा यात्रा जारी रहती है।
अमरनाथ धाम दक्षिण कश्मीर में 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार यही वह स्थान है, जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को ब्रह्मांड का रहस्य बताया था। इस दौरान दो कबूतरों ने भी इस कथा को सुन लिया था, जिससे वे भी अमर हो गए। माना जाता है कि वे दोनों कबूतर हर वर्ष सावन माह में इस पवित्र गुफा में देखे जा सकते हैं। अमर नाथ गुफा की लंबाई 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। गुफा करीब 11 मीटर ऊंची है।
यात्रा में आती है कई कठिनाई
अमरनाथ यात्रा कठिन माने जाने वाली यात्राओं में गिनी जाती है। यात्रा के दौरान कई उबड़-खाबड़ रास्ते पड़ते हैं, तो वहीं श्रद्धालुओं को इस दौरान बर्फबारी और बारिश का सामना तक करना पड़ता है। साथ ही कई बार बर्फीली हवाएं भी चलने लगती है। हालांकि, यह सब कठिनाइयां भी भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं ला पाती।
स्वयंभू हिमानी कहलाता है शिवलिंग
गुफा में शिवलिंग का निर्माण प्राकृतिक तरीके से हुआ है। शिवलिंग पर ऊपर से बर्फ की पानी की बूंदे टपकती है। प्राकृतिक बर्फ से निर्मित होने के कारण ही इस शिवलिंग को स्वयंभू हिमानी भी कहा जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा के घटने बढ़ने के साथ ही शिवलिंग का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है, जबकि श्रावण माह की पूर्णिमा को यह शिवलिंग अपने पूर्ण आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता है।







