नई दिल्ली. अपने सख्त फैसलों के लिए जाने जाने वाले असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को यानी जुम्मे के दिन राज्य के लिए एक विवादित फैसला लिया. उन्होंने असम में जुम्मे की नमाज के लिए दो घंटे के ब्रेक को खत्म कर दिया है. सीएम ने इस बात का ऐलान करते हुए कहा कि इस तरह का नियम बनाना मुस्लिम लीग की सोच थी. हमने उपनिवेशवाद के बोझ को अब खत्म कर दिया है.
बीजेपी के फायरब्रांड नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “2 घंटे के जुम्मा ब्रेक को खत्म करके, असम विधानसभा ने उत्पादकता को प्राथमिकता दी है और औपनिवेशिक बोझ के एक और निशान को हटा दिया है. यह प्रथा मुस्लिम लीग के सैयद सादुल्ला ने 1937 में शुरू की थी. इस ऐतिहासिक फैसले के लिए स्पीकर बिस्वजीत दैमारी और हमारे विधायकों का मैं आभार व्यक्त करता हूं.”
‘चाहे तो मेरा घर उड़ा दो’
हिमंत बिस्वा सरमा ने दो दिन पहले असम विधानसभा में कहा था कि विपक्ष मेरी निजी सुरक्षा से परेशान है. सुरक्षा की मुझे कोई चिंता नहीं, मुझे राज्य की सुरक्षा की चिंता है. जब अलगाववादी बम विस्फोट की धमकी देते हैं, तो सबसे पहले इन्वेस्टर डरते हैं, जिससे युवाओं की नौकरियों पर खतरा पैदा हो जाता हैं. तुम चाहो तो 15 अगस्त या 26 जनवरी को मेरा घर उड़ा दो. अगर मुझे उजड़ना पड़े तो मैं उजड़ जाउंगा, लेकिन असम में टाटा के प्लांट को छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होने दूंगा.
ममता बनर्जी से भी लिया पंगा
असम के सीएम ने एक दिन पहले ही बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से भी पंगा लिया था. उनके राज्य में अशांति की कथित धमकी उन्होंने कहा था कि दीदी आपकी हिम्मत कैसे हुई हमें धमकाने की. हमें अपनी लाल आंखे मत दिखाइये. ममता बनर्जी अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए जनता को भड़काने की कोशिश कर रही हैं. आरजी कर अस्पताल कांड की ट्रेनी डॉक्टर की रेप के बाद हत्या से बंगाल सुलग रहा है







