चन्दन कुमार
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी प्रमुख एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार्य के आरोप को इस नाटकीय अंदाज मे जनता के सामने पेश करने की कोशिश कर रहे है, जैसे- कोर्ट ने उनको बाइजत बरी कर दिया हो. केजरीवाल का यह खेल बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के उस घटना क्रम से काफी मेल खाता है, जिसमे लालू यादव पर भ्रष्टाचार्य का आरोप लगा एवं उन्होंने अपनी पत्नी श्रीमती राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया.
दोनों की राजनीत मे अंतर सिर्फ इतना है की वो जेल जाने से पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर अपने पत्नी को मुख्यमंत्री बनाए एवं अब अरविन्द केजरिवाल जेल से आने के बाद अपने पार्टी के महिला मंत्री को मुख्यमंत्री बनाए है. जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद लालू यादव भी जनता के बिच गए और जनता का समर्थन एवं जनता का सहयोग उन्हे मिला. भ्रष्टाचार्य का आरोप लगने के बाद भी वे सांसद और केंद्र मे रेल मंत्री भी बने. इसका मतलब ये नहीं हुआ की वो भ्रष्टाचारी नहीं थे, बाद में उन्हे कोर्ट ने सजा सुनाई और लालू प्रसाद यादव को सजा भुगतनी पड़ी.
ठीक इसी तरह केजरीवाल भी जनता के बीच जाकर उनके विश्वास को हासिल करना चाहते है ! दस साल दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर रहने वाद भी केजरीवाल अपने किये गए कार्यों की चर्चा नहीं कर रहे हैं. वे केवल भ्रष्टाचार्य के नाम पर इस बार भी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते है. हम याद करें तो यहीं अरविन्द केजरीवाल है जो सबसे पहले कॉंग्रेस के साथ गठबंधन मे सरकार बनाए एवं जनलोकपाल बिल की बात करते हुए अपना इस्तीफा भी दे दिया. उसके बाद उन्होंने मंच मे माध्यम से ये घोषणा किये कि- “मैं अपने बच्चों की सौगंध खाता हूँ अब कॉंग्रेस से कभी गठबंधन नहीं करूंगा. क्योंकि काँग्रेस पूरी तरह से भ्रष्टाचार्य में लिप्त है.”
अब दस साल सत्ता मे रहने के बाद भी केजरीवाल अपने किये कामों को बताने के बदले, भाजपा और आरएसएस से सवाल पूछने में ही लगे हुए है. अरविन्द केजरीवाल को अपने जनसभाओ के माध्यम से यह बताना चाहिए कि- उन्होंने सरकारी बंगला न लेने की बात कहीं थी फिर करोड़ों का आवास बनाकर क्यों रहे? सरकारी गाड़ी और सरकारी बॉडीगार्ड न रखने की बात कहीं थी फिर उसपर क्यों मुकर गए? दिल्ली मे जन लोकपाल बिल का क्या हुआ? यमुना साफ क्यों नहीं हुई? दिनोंदिन दिल्ली की हवा प्रदूषित क्यों हो रही है? कच्चे कर्मचारियों को पक्का क्यों नहीं किया जा रहा है? इन सब सवालों का जबाब देने की जगह केजरीवाल केवल राजनीति महत्वकांक्षा पूरी करने मे लगे है.







