प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: 3 जुलाई से शुरू होने वाली पवित्र अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था 2 जुलाई को जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से रवाना हो चुका है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर इस जत्थे को कश्मीर के लिए रवाना किया। इस दौरान ‘हर हर महादेव’ और ‘बम बम भोले’ के जयकारों से माहौल गूंजायमान रहा। यह 38 दिनों की यात्रा 9 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी।
पहले जत्थे में लगभग 4,000 से 5,485 श्रद्धालु शामिल हैं, जो बालटाल और पहलगाम मार्गों से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर बढ़ेंगे। श्रद्धालुओं में बाबा बर्फानी के दर्शन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया। देशभर से आए भक्तों ने जयकारों के साथ यात्रा शुरू की।
उपराज्यपाल का बयान
मनोज सिन्हा ने कहा कि “श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने यात्रा के लिए बेहतरीन व्यवस्थाएं की हैं, और यह यात्रा विश्वभर में आस्था का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता बताया।”
इस बार 3.5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 14 अप्रैल से शुरू हुई थी और 14 जून को समाप्त हुई। ऑन-स्पॉट रजिस्ट्रेशन की सुविधा जम्मू, श्रीनगर, कटरा, नुनवान, पंथा चौक, बालटाल और पहलगाम में उपलब्ध है। रजिस्ट्रेशन शुल्क 220 रुपये प्रति व्यक्ति है।
यात्रियों को मेडिकल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, यात्रा परमिट, और RFID कार्ड साथ रखना अनिवार्य है। 13 वर्ष से कम और 70 वर्ष से अधिक आयु के लोग, साथ ही 6 सप्ताह से अधिक गर्भवती महिलाएं यात्रा नहीं कर सकतीं। यात्रा दो मुख्य मार्गों से होती है पहलगाम मार्ग 36-48 किमी लंबा, आसान लेकिन समय लेने वाला। इसमें चंदनवाड़ी, पिस्सू टॉप, शेषनाग और पंचतरणी जैसे पड़ाव शामिल हैं। 14 किमी, छोटा लेकिन चुनौतीपूर्ण।
क्या हैं व्यवस्थाएं ?
दोनों मार्गों पर 125 लंगर स्थापित किए गए हैं, जो मुफ्त भोजन, पानी, और अन्य सुविधाएं प्रदान करेंगे। 50 मेडिकल स्टेशन, 26 ऑक्सीजन बूथ (16 बालटाल, 10 पहलगाम), और बेस अस्पताल उपलब्ध हैं। जम्मू और कश्मीर रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (JKRTC) ने बुकिंग काउंटर स्थापित किए हैं। हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं। लखनपुर से बनिहाल तक 106 आवास केंद्रों में 50,000 से अधिक लोगों के ठहरने की व्यवस्था है।
सुरक्षा व्यवस्था हाईटेक सुरक्षा
इस बार सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जम्मू-श्रीनगर हाईवे (NH-44) पर मल्टी-लेयर सुरक्षा सेटअप लागू किया है। जैमर, चेहरा पहचानने वाला सिस्टम (FRS), K-9 डॉग स्क्वॉड और सीसीटीवी निगरानी का उपयोग हो रहा है। प्रत्येक यात्री की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक करने के लिए RFID कार्ड अनिवार्य हैं।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) 180 कंपनियां (लगभग 18,000 जवान) तैनात की गई हैं, जो पिछले साल से 30 अधिक हैं। यात्रा मार्ग को नो फ्लाई जोन घोषित किया गया है। कैंपों और लंगर स्थलों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए सफाई कर्मियों की तैनाती की गई है।
यात्रा का धार्मिक महत्व !
अमरनाथ गुफा, जो 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव ने देवी पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिमलिंग (बर्फ का शिवलिंग) चंद्रमा के चरणों के अनुसार बढ़ता-घटता है। इस यात्रा को 23 तीर्थों के दर्शन के समान पुण्यदायी माना जाता है।
2 जुलाई को पवित्र गुफा में प्रथम पूजा और दर्शन होंगे, जिसमें उपराज्यपाल मनोज सिन्हा शामिल हो सकते हैं। 15 जून से लंगर सामग्री के ट्रक जम्मू-कश्मीर पहुंचने शुरू हो गए और जुलाई अंत तक सभी लंगर स्थापित हो जाएंगे। यात्रा के दौरान मौसम की स्थिति पर नजर रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
यात्रियों के लिए सुझाव व् शारीरिक तैयारी !
यात्रा से एक महीने पहले 4-5 किमी की दैनिक सैर और प्राणायाम शुरू करें। प्रतिदिन 5 लीटर पानी पिएं और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन लें। ऊंचाई से संबंधित बीमारियों के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी मेडिकल सुविधा से संपर्क करें। शराब, कैफीन, और धूम्रपान से बचें। गर्म कपड़े, मजबूत जूते और आवश्यक दस्तावेज साथ रखें।
अमरनाथ यात्रा 2025 का शुभारंभ भक्तों के उत्साह, कड़ी सुरक्षा और व्यापक व्यवस्थाओं के साथ हुआ है। यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड और प्रशासन ने इसे सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगी।







