प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और उनकी Axiom-4 मिशन की टीम 14 जुलाई 2025 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से ड्रैगन कैप्सूल के जरिए पृथ्वी पर वापस लौटेगी। नासा और Axiom Space ने घोषणा की है कि ड्रैगन कैप्सूल 14 जुलाई को भारतीय समयानुसार शाम 4:35 बजे के आसपास ISS से अलग होगा। यह भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण होगा, क्योंकि शुभांशु शुक्ला ISS पहुंचने वाले पहले भारतीय और 1984 में राकेश शर्मा के बाद अंतरिक्ष यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय हैं।
मिशन कब हुआ लॉन्च !
Axiom-4 मिशन 25 जून को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट और ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ‘ग्रेस’ के जरिए लॉन्च हुआ था। 28 घंटे की यात्रा के बाद, यह 26 जून को ISS से जुड़ा। मिशन की अवधि लगभग 14 दिन थी, जिसमें शुभांशु और उनकी टीम ने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए। क्रू: मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं शुभांशु शुक्ला (भारत, पायलट) पैगी व्हिटसन (अमेरिका, कमांडर) स्लावोज उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की (पोलैंड, मिशन विशेषज्ञ) टिबोर कापू (हंगरी, मिशन विशेषज्ञ)।
मिशन की वापसी में देरी
पहले मिशन की वापसी 10 जुलाई को निर्धारित थी, लेकिन फ्लोरिडा तट पर खराब मौसम, ISS में प्रेशर लीक की जांच, और तकनीकी तैयारियों के कारण यह 14 जुलाई तक टल गई। वापसी की तारीख मौसम और तकनीकी परिस्थितियों पर निर्भर है।
शुभांशु ने ISS पर कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोग किए, जो अंतरिक्ष और पृथ्वी दोनों के लिए लाभकारी हैं स्प्राउट्स प्रोजेक्ट मूंग और मेथी के बीजों को पेट्री डिश में उगाकर सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (माइक्रोग्रैविटी) में अंकुरण और पौधों के विकास का अध्ययन किया। ये बीज पृथ्वी पर लौटने के बाद भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा कई पीढ़ियों तक उगाए जाएंगे ताकि उनकी आनुवंशिकी और पोषण प्रोफाइल का विश्लेषण किया जा सके।
- मायोजेनेसिस: माइक्रोग्रैविटी में मांसपेशियों की कमजोरी का अध्ययन, जो भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए बेहतर कसरत और दवाओं के विकास में मदद करेगा।
- स्पेस माइक्रोएल्गी: सूक्ष्म शैवालों पर प्रयोग, जो ऑक्सीजन, भोजन और बायो-फ्यूल के स्रोत के रूप में उपयोगी हो सकते हैं।
- टार्डिग्रेड्स: सूक्ष्म जीवों पर प्रयोग, जो अंतरिक्ष में उनके अस्तित्व और प्रजनन व्यवहार को समझने के लिए किए गए।
- न्यूरो मोशन वीआर प्रोजेक्ट: वीआर हेडसेट का उपयोग कर ध्यान-आधारित कार्यों का अध्ययन, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों की मानसिक गतिविधियों पर नजर रखी गई।
मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा
लंबी अवधि के अंतरिक्ष मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रयोग। अनडॉकिंग ड्रैगन कैप्सूल ISS से स्वचालित रूप से अलग होगा, जिसे शुभांशु और कमांडर पैगी व्हिटसन मॉनिटर करेंगे। यह प्रक्रिया 5-10 मिनट की होगी। कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में 3800 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान झेलेगा और अटलांटिक महासागर में स्प्लैशडाउन करेगा। मौसम की स्थिति, जैसे तेज हवाएं या तूफान, इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। पृथ्वी पर लौटने के बाद शुभांशु और उनकी टीम की मेडिकल जांच होगी।
क्या है मिशन का महत्व !
भारत के लिए गर्व: शुभांशु का मिशन भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान में एक नया अध्याय जोड़ता है और ISRO के गगनयान मिशन की तैयारी का हिस्सा है। उनके प्रयोग अंतरिक्ष में खेती, मानव स्वास्थ्य और लंबी अवधि के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। Axiom-4 एक कमर्शियल मिशन है, जो नासा, स्पेसएक्स और Axiom Space के सहयोग से संचालित है, जो निजी कंपनियों की अंतरिक्ष यात्रा में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
मौसम की अनिश्चितता और चुनौतियां !
फ्लोरिडा तट पर खराब मौसम के कारण वापसी में देरी हो सकती है, जैसा कि Axiom-1 मिशन में हुआ था। ISS में प्रेशर लीक की जांच और कैप्सूल की तकनीकी तैयारियां वापसी को प्रभावित कर सकती हैं। हाइपरसॉनिक री-एंट्री में ड्रैगन कैप्सूल को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान उच्च तापमान और गति की चुनौतियों का सामना करना होगा।
शुभांशु और उनकी टीम ने ISS पर 230 सूर्योदय देखे और 96.5 लाख किलोमीटर की यात्रा की। उन्होंने अपने अंतिम अवकाश दिवस पर तस्वीरें खींचीं, वीडियो बनाए, और पृथ्वी का नजारा देखा। वापसी से पहले क्रू ने ISS पर एक दावत का आनंद लिया, जिसकी तस्वीरें साझा की गईं। शुभांशु शुक्ला की वापसी न केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा भी है कि मेहनत और शिक्षा से बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।







