नई दिल्ली : संसद का मानसून सत्र कल यानी 21 जुलाई से शुरू हो रहा है. यह संसद सत्र भी खूब हंगामेदार रहने वाला है और इसकी बानगी रविवार को बुलाई सभी दलों की बैठक में ही देखने को मिल गई. इस बैठक में विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में बयान देने की मांग की. बैठक में विपक्षी दलों ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर को अचानक रोके जाने और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम पर दिए गए विवादास्पद बयान जैसे अहम विषयों को जोरशोर से उठाया.
बैठक की अध्यक्षता राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने की, कुल 51 दलों में से 40 प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया और अपनी बात रखी. वहीं सरकार की तरफ से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पक्ष रखा.
बैठक के बाद रिजिजू ने क्या कहा?
रिजिजू ने बैठक के बाद कहा कि संसद के सुचारु संचालन की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं बल्कि पूरे विपक्ष की भी है. उन्होंने कहा, ‘हर बार प्रधानमंत्री को घसीटना उचित नहीं है. संबंधित विभाग के मंत्री सदन में उपस्थित रहते हैं और आवश्यक जवाब देते हैं.’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीएम मोदी हमेशा ही सदन में उपस्थित रहते हैं, केवल विदेश यात्रा या कुछ विशेष परिस्थितियों में ही उनकी गैरमौजूदगी होती है.
विपक्ष की क्या मांग?
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि उनकी पार्टी डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच कथित संघर्षविराम मध्यस्थता के दावे, पहलगाम हमले में हुई चूक और बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी के संसद में स्पष्टीकरण की मांग करती है. उनका कहना था कि यह प्रधानमंत्री का संवैधानिक दायित्व है कि वह ऐसे गंभीर मामलों पर संसद को जवाब दें.
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी बिहार में एसआईआर को लेकर कथित ‘चुनावी घोटाले’ का मुद्दा उठाया और ट्रंप के विवादित दावे पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ‘इंडिया’ गठबंधन में लोकसभा चुनाव के लिए शामिल है लेकिन राज्य चुनावों में वह स्वतंत्र रूप से लड़ेगी.
विपक्षी दलों ने इस बैठक के माध्यम से यह संकेत दिया कि मानसून सत्र में सरकार को इन मुद्दों पर कड़ी बहस और सवालों का सामना करना पड़ेगा. ‘इंडिया’ गठबंधन के 24 दलों ने पहले ही तय कर लिया है कि वे संसद के इस सत्र में इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे.
सरकार ने क्या कहा?
सरकार की ओर से हालांकि यह आश्वासन दिया गया कि सभी महत्वपूर्ण विषयों पर नियमों के तहत चर्चा कराई जाएगी और सभी दलों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाएगा. साथ ही छोटी पार्टियों की तरफ से अधिक समय देने की मांग को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में उठाने की बात भी कही गई.
सरकार इस सत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी लाने वाली है. इस महाभियोग के प्रस्ताव पर सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिया है. रिजिजू ने कहा कि फिलहाल इस विषय पर किसी प्राथमिकता के आधार पर टिप्पणी करना संभव नहीं है क्योंकि यह मामला अभी बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) और अध्यक्ष की स्वीकृति पर निर्भर है.
जस्टिस वर्मा के महाभियोग पर क्या बोले रिजिजू?
रिजिजू ने कहा, ‘मैं किसी भी काम के प्राथमिकता के आधार पर तब तक कोई टिप्पणी नहीं कर सकता जब तक कि वह BAC से पारित न हो जाए और अध्यक्ष की स्वीकृति न मिल जाए. तब तक इस पर बाहर कोई औपचारिक घोषणा करना मुश्किल है.’ उन्होंने यह भी पुष्टि की कि प्रस्ताव पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया चल रही है और “100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर पहले ही हो चुके हैं.’
ऐसे में यह साफ है कि मानसून सत्र के दौरान संसद का माहौल काफी गरम रहने वाला है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है.







