Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राज्य

उत्तराखंड का वो गांव… कंधार (कंदर), जहां सोने के गहनों पर सख्त पाबंदी

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 25, 2025
in राज्य, विशेष
A A
gold
17
SHARES
577
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

प्रकाश मेहरा
उत्तराखंड डेस्क


उत्तराखंड के जौनसार-बावर जनजातीय क्षेत्र में स्थित कंधार (या कंदर) गाँव वह जगह है, जहाँ महिलाओं द्वारा सोने के गहने पहनने पर एक अनोखी और सख्त पाबंदी लगाई गई है। यह नियम विशेष रूप से शादियों और पारिवारिक समारोहों के दौरान लागू होता है, जिसका उद्देश्य सामाजिक समानता, सरलता और आर्थिक बोझ कम करना है। यह फैसला गाँव की पंचायत ने अक्टूबर 2025 में एक सामुदायिक बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया था।

इन्हें भी पढ़े

army

घाटी में फिर खूनी साजिश! ULC ने जारी की कश्मीरी पंडितों की हिट लिस्ट

August 9, 2026
land purchase

किन राज्यों में बाहरी नहीं खरीद सकते जमीन, क्यों लिया गया ऐसा फैसला?

August 9, 2026
jpsc jssc protest

JPSC आंदोलन: ED जांच के लिए सोरेन सरकार तैयार, 3 परीक्षाएं होंगी रद्द

August 9, 2026
cyber india digital

साइबर सुरक्षा में उत्तराखंड देश के टाॅप पांच राज्यों में शामिल!

August 8, 2026
Load More

जनसंख्या और संस्कृति

देहरादून जिले के चकराता तहसील में जौनसार-बावर क्षेत्र, गढ़वाल मंडल, उत्तराखंड। यह हिमालयी पहाड़ी इलाका है, जो यमुना और टोंस नदियों से घिरा हुआ है। जौनसार-बावर क्षेत्र अपनी अनोखी संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और जौनसारी जनजाति के लिए जाना जाता है, जो मुख्य रूप से कृषि और अर्ध-खानाबदोश जीवनशैली अपनाते हैं। गाँव में ज्यादातर जौनसारी समुदाय के लोग रहते हैं। यह क्षेत्र अनुसूचित जनजाति का हिस्सा है, जहाँ पारंपरिक रीति-रिवाज मजबूत हैं, लेकिन आधुनिक चुनौतियाँ जैसे आर्थिक असमानता भी मौजूद हैं।

सोने के गहनों पर पाबंदी का नियमक्या अनुमति है ?

  • विवाहित महिलाओं को केवल तीन सोने के गहने पहनने की इजाजत है:नाक की फूली (Phuuli या Nose Stud)।
  • कान की बूंदी (Bundey या Earrings)। मंगलसूत्र (Mangalsutra या Wedding Necklace)।

क्या प्रतिबंधित है ?

इनसे अधिक या भारी सोने के आभूषण (जैसे हार, बाजूबंद, पायल आदि) पहनना पूरी तरह वर्जित है। यह नियम केवल शादियों और पारिवारिक आयोजनों पर लागू होता है, ताकि धन-प्रदर्शन की होड़ न हो। यह ‘स्व-शासन’ (self-rule) के तहत हर घर पर बाध्यकारी है।

नियम के पीछे कारण आर्थिक बोझ कम करना

सोने की बढ़ती कीमतों के कारण गरीब परिवार कर्ज में डूब जाते हैं या अपनी बचत खर्च कर देते हैं। अमीर-गरीब के बीच दिखावा की होड़ से सामाजिक तनाव बढ़ता है। शादी को पवित्र संस्कार मानते हुए, इसे धन-प्रदर्शन का मंच बनाने से रोकना। एक बुजुर्ग ने कहा, “शादी रिश्तों का उत्सव है, न कि धन का प्रदर्शन।” अनावश्यक खर्च रोककर आर्थिक असमानता कम करना और समुदाय में सादगी लाना। उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के कई गाँवों (जैसे इंद्रोली) में भी इसी तरह के नियम लागू हो रहे हैं, जो स्थानीय पंचायतों की पहल हैं।

उल्लंघन पर सजा जुर्माना

नियम तोड़ने पर 50,000 रुपये का भारी जुर्माना लगेगा। यह राशि सामुदायिक निधि में जमा होगी, जो गाँव के विकास कार्यों में उपयोग होगी। पंचायत सदस्य आयोजनों की निगरानी करेंगे, और उल्लंघन की शिकायत पर कार्रवाई होगी।शादियों और समारोहों में शराब पर पूर्ण पाबंदी, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण रहें। कुछ रिपोर्टों में उल्लेख है कि “दहेज या अतिरिक्त खर्च पर भी नजर रखी जा रही है, लेकिन मुख्य फोकस गहनों पर है। यह फैसला गाँव की सामूहिक बैठक में लिया गया, जहाँ सभी घरों ने सहमति दी।

उत्तराखंड की सांस्कृतिक प्रगतिशीलता

स्थानीय नेता भारत सिंह राणा ने इसे “सामाजिक क्रांति” बताया, जो आर्थिक असमानता कम करने और सादगी को बढ़ावा देगी। सुरेंद्र सिंह चौहान (चकराता) ने कहा कि “जब शहरों में शादियाँ प्रतिष्ठा का प्रतीक बन गई हैं, तो यह गाँव सादगी का संदेश दे रहा है। कुछ महिलाओं को परंपरा से समझौता लग सकता है, लेकिन समुदाय का समर्थन मजबूत है। यह पहल अन्य गाँवों के लिए प्रेरणा बन सकती है। अक्टूबर-नवंबर 2025 में यह खबर राष्ट्रीय स्तर पर वायरल हुई, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक प्रगतिशीलता को दर्शाती है। यह नियम न केवल आर्थिक सुधार ला रहा है, बल्कि जौनसारी संस्कृति को आधुनिक चुनौतियों से जोड़ रहा है।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

दिल्ली: सरकार इसलिए नहीं दे सकती MSP की गारंटी, वजह जानकर हो जायेंगे हैरान!

February 29, 2024
गंगा विलास’

गंगा से कैसे पार होगा क्रूज

January 26, 2023
Ukraine Medical Students

घातक सिद्ध होती आगे निकलने की होड़

December 27, 2022
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • दिल्ली मेट्रो का दुनिया में डंका, न्यूयॉर्क-हांगकांग और पेरिस को भी छोड़ा पीछे
  • यश रचने जा रहे इतिहास, 1 साल में देंगे दो 100 करोड़ ओपनिंग करने वाली फिल्में?
  • ऑपरेशन सिंदूर पर बोले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह- सुरक्षा के लिए भारत किसी भी हद तक जाएगा

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.