Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राज्य

श्रीराम मंदिर: युवाओं की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक चेतना का नया सूर्योदय

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 23, 2026
in राज्य, विशेष
A A
shri ram temple
7
SHARES
247
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

डॉ. लोकेन्द्र सिंह 


अयोध्या : भारत के युवाओं को लेकर देश में अलग-अलग ढंग से विमर्श चल रहे हैं। कुछ ताकतें चाहती हैं कि भारत का युवा अपनी ही संस्कृति एवं जीवन मूल्यों के विरुद्ध खड़ा हो जाए। धर्म-संस्कृति क्रियाकलापों से युवाओं को दूर करने के लिए यहाँ तक कहा गया कि “जो लोग मंदिर जाते हैं, वही लोग महिलाओं को छेड़ते हैं”। यह भी कि “सरस्वती की पूजा करने से कोई आईएएस नहीं बनता”। योलो और वोकिज्म की रंगीन अवधारणाएं भारत की जेन-जी के दिमाग में उतारने के प्रपंच रचे ही जा रहे हैं। परंतु, भारत विरोधी ताकतों को यह स्मरण नहीं रहता कि भारत की संस्कृति के पोषण में वह ताकत है कि उसकी संतति अधिक समय तक उससे दूर नहीं रह सकती। सब प्रकार के प्रपंचों से थक-हारकर, आत्मा के वास्तविक सुख की प्राप्ति के लिए वह अपनी संस्कृति की गोद में ही लौटता है।

इन्हें भी पढ़े

money laundering

कानपुर मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क: 8 लाख की झूठी लूट से खुला 3200 करोड़ के काले धन का राज

June 24, 2026
harkipodi

निर्जला एकादशी स्नान: हरिद्वार जाने से पहले जरूर पढ़ें ट्रैफिक प्लान

June 24, 2026
shiv sena ubt

शिवसेना यूबीटी को लगेगा एक और झटका! छिन सकता है संसद भवन का ऑफिसशिव

June 24, 2026
प्रशासन

मथुरा वृंदावन में मानकों का पालन न करने पर प्रशासन ने की कठोर कार्यवाही!

June 24, 2026
Load More

आज सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक अनुष्ठानों में युवाओं की जिस प्रकार की सक्रिय उपस्थिति दिखायी दे रही है, उसके गहरे निहितार्थ हैं। पिछले कुछ वर्षों में धर्म के प्रति युवाओं में गहरी रुचि पैदा हुई है। उनकी आध्यात्मिक चेतना को मंदिर में उमड़ रही युवाओं की भीड़ में अनुभव किया जा सकता है। ज्ञान की खोज में आश्रमों एवं गुरुकुलों में पहुँच रहे युवाओं के माथे पर उनकी जिज्ञासाओं को पढ़ा जा सकता है। युवाओं में परिवर्तन की इस लहर का प्रमुख केंद्र श्री अयोध्या धाम में, अपने भव्य मंदिर में विराजे रामलला हैं।

भारत की सांस्कृतिक राजधानी श्रीअयोध्या में प्रभु श्रीराम के दिव्य मंदिर के निर्माण, रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, शिखर पर धर्म ध्वजा की स्थापना, ये सब केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, अपितु भारतीय जनमानस की चेतना में युगांतरकारी घटनाएं हैं। कहना होगा कि 22 जनवरी, 2024 के बाद भारत के युवा मन में जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह अभूतपूर्व है। यह घटना सदियों के संघर्ष के विराम के साथ-साथ एक नये और आत्मविश्वास से भरे भारत के उदय का प्रतीक बन गई है। आज श्रीराम मंदिर केवल ईंट-पत्थरों से बना देवालय नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का केंद्र बन गया है।

अंग्रेजी नववर्ष मनाने के लिए भी मंदिर पहुँचे युवा 

हम समूचे राममंदिर आंदोलन का सिंहावलोकन करते हैं, तब भी हमें ध्यान आता है कि भारत के इस महान आंदोलन को परिणाम तक पहुँचाने में युवा शक्ति का बलिदान लगा है। रामद्रोहियों की बंदूकों के सामने युवा तरुणाई अखंड साहस के साथ खड़ी हो गई। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक रामत्व के जागरण की जिम्मेदारी युवाओं ने ही तो निभाई। इसलिए जब श्रीराम जन्मभूमि पर दिव्य मंदिर ने आकार लिया, तब युवा अपनी आध्यात्मिकता को अभिव्यक्त करने के लिए मुखर हो उठा है। कोई भी प्रसंग हो, साप्ताहिक अवकाश हो, तीज-त्यौहार हो या फिर अन्य परंपरा का कोई प्रसंग, युवा आनंद की अनुभूति के लिए रामलला के परिसर में दिखायी दे रहे हैं। यद्धपि ग्रेगोरियन कैलेंडर के जनवरी माह की पहली दिनांक को भारत का नववर्ष नहीं होता है, लेकिन हम भारतीय तो उत्सवधर्मी हैं, इस नववर्ष का भी हमने भारतीयकरण करने का मानस बना लिया है।

एक समय था जब एक जनवरी का उत्सव रंगीन पार्टियां में उतरता था। लेकिन अब युवाओं का रैला मंदिर पहुँच रहा है। जनवरी, 2026 के पहले दिन श्रीअयोध्या के श्रीराम मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ आया था। मीडिया में आए आंकड़े बताते हैं कि एक ही दिन में श्रीराम मंदिर में रिकॉर्ड संख्या (4 लाख से अधिक) में भक्त भगवान श्रीराम के दर्शन के लिए पहुँचे। इस सैलाब में युवावर्ग ही अधिक था। यह एक सकारात्मक परिवर्तन है। ‘नववर्ष’ मनाने का यह बदलता चलन बताता है कि श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा ने भारत के भविष्य को अपनी परंपराओं से जोड़कर आगे बढ़ने के लिए निरभ्र आसमान दिया है।

युवा श्रद्धा का यह उत्सव हमें काशी विश्वनाथ, श्रीकृष्ण जन्मभूमि, खाटू श्याम, वैष्णो देवी मंदिर, बालाजी धाम, केदारनाथ, बद्रीनाथ, रामेश्वरम, तिरुपती से लेकर द्वारिका धाम तक दिखायी देता है। उत्तराखंड के पर्यटन विभाग के सहयोग से अर्थ एवं संख्या विभाग द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, कैंची धाम पहुँचने वाले श्रद्धालुओं में 67 प्रतिशत युवा हैं, जिनकी उम्र 15 से 30 वर्ष के बीच है। हम अवकाश के दिनों में धार्मिक स्थलों पर युवाओं टोलियों को देखकर सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि अपने मानसिक तनाव से मुक्ति एवं राष्ट्र निर्माण में सृजनात्मक योगदान देने के लिए ऊर्जा की प्राप्ति के लिए युवा धार्मिक स्थलों पर पहुँच रहे हैं।

युवाओं के लिए कर्मकांड नहीं, जीवन जीने की कला है धर्म 

युवाओं में आध्यात्मिक चेतना और संस्कारों का उदय, इस परिवर्तन का सबसे सुखद पहलू है। एक समय था जब मंदिरों को केवल बुजुर्गों का स्थान माना जाता था, लेकिन श्रीराम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से युवाओं का एक बड़ा वर्ग अपनी जड़ों की ओर लौटा है। सोशल मीडिया के दौर में आज युवा गर्व से अपनी संस्कृति और धर्म को अपना रहे हैं। वे श्रीराम मंदिर और अन्य तीर्थ स्थलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रभु श्रीराम का जीवन, त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा सीखने का स्रोत है। धर्म उनके लिए केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला बन गया है, जिससे उन्हें अनुशासन और नैतिकता की सीख मिल रही है।

जब युवा वर्ग मंदिरों में पहुँचता है, तब वह केवल दर्शन नहीं करता है अपितु वहां की वास्तुकला और इतिहास को समझने का प्रयास भी करता है। वह अपनी संस्कृति की गौरवशाली परंपरा से जुड़ता है। बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर गुजरात में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन किया गया। इस आयोजन के बहाने युवाओं के बीच में सोमनाथ के वैभव, विध्वंस और नवसृजन की गाथा चर्चा का विषय बनी। भारतीय संस्कृति किस प्रकार के झंझावात झेलकर यहाँ तक आई है, इस बात से युवाओं का सामना हुआ।

सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बना श्रीराम मंदिर 

श्रीराम मंदिर के निर्माण ने देश में ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ का सूत्रपात किया है। इसे केवल हिन्दू मंदिर के रूप में नहीं, बल्कि ‘राष्ट्र मंदिर’ के रूप में देखा जा रहा है। यह मंदिर भारत के स्वाभिमान और सांस्कृतिक स्वतंत्रता का प्रतीक है। जिस प्रकार सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण ने स्वतंत्र भारत में एक नई ऊर्जा भरी थी, उसी प्रकार श्रीअयोध्या धाम का श्रीराम मंदिर ‘विकसित भारत’ के संकल्प को मजबूती दे रहा है। देश के कोने-कोने में लोगों के भीतर अपनी सभ्यता के प्रति गौरव का भाव जागा है, जो राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

श्रीराम मंदिर ने युवाओं के लिए आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोले हैं। ‘आध्यात्मिक पर्यटन’ भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा स्तंभ बनकर उभरा है। अयोध्या में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं का आना स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन और हस्तशिल्प के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि और रोजगार सृजन के रूप में मिल रहा है। श्रीअयोध्या धाम का विकास पूरे क्षेत्र और अंततः राष्ट्र की जीडीपी में सकारात्मक योगदान दे रहा है।

आरएसएस का आग्रह है रामराज्य को साकार करें हम 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने प्राण-प्रतिष्ठा उत्सव के प्रसंग पर देशभर के लोगों से आग्रह किया था कि वर्षों के संघर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर तो बन रहा है लेकिन रामराज्य को साकार करने के लिए हम सबको अपने मन में रामराज्य लाना होगा। उनके आग्रह को भारत की युवा तरुणाई ने माना है। सरसंघचालक जी के आग्रह और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद से ‘राम सबके और सब राम के’, इस भाव से सामाजिक समरसता का अनुपम विचार और अधिक प्रखर हुआ है। श्रीराम मंदिर ने सामाजिक समरसता का एक अद्भुत संदेश दिया है।

आज न केवल सनातन धर्म के अनुयायी, बल्कि जैन, बौद्ध और सिख समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में अयोध्या पहुँच रहे हैं। यह मंदिर विभिन्न पंथों और संप्रदायों को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रहा है। समाज के हर वर्ग, चाहे वह अनुसूचित जाति से हो या अनुसूचित जनजाति से, सभी ने इस महायज्ञ में अपना योगदान दिया है। भगवान श्रीराम का यह मंदिर जाति-पाति और ऊंच-नीच के भेदों को मिटाकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को चरितार्थ कर रहा है।

श्रीराम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के बाद का परिदृश्य यह स्पष्ट करता है कि भारत अब अपनी पुरानी हीनभावनाओं को त्यागकर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में खड़ा है। युवाओं का संस्कारवान होना, समाज का समरस होना और अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ होना, ये सभी भारत के उज्ज्वल भविष्य की ओर संकेत करते हैं। श्रीराम मंदिर ने भारत को उसकी आत्मा से पुनः मिला दिया है, और यही ऊर्जा भारत को विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर करेगी।


लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक हैं।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Pakistan

पाक के नए पीएम पर सेना ने फिर शुरू किया नया खेल

May 31, 2023
Culture, India

सांस्कृतिक राष्ट्रत्व में है अलगाव की समस्या का समाधान

April 27, 2023

श्रीलंका की लाचारी

July 3, 2022
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • निर्जला एकादशी का व्रत कैसे करें? जानें व्रत के नियम    
  • दिल्ली को बाढ़ से बचाने के लिए रेखा सरकार ने कसी कमर, ऐसा है पूरा प्लान
  • कानपुर मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क: 8 लाख की झूठी लूट से खुला 3200 करोड़ के काले धन का राज

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.