Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home दिल्ली

कैसे रुके प्रदूषण

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
November 9, 2023
in दिल्ली, विशेष
A A
delhi pollution
19
SHARES
623
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

प्रकाश मेहरा


नई दिल्ली: उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में प्रदूषण से हुआ बुरा हाल दुखद है। प्रदूषण से स्थिति इतनी खराब हो गई है कि दिल्ली सरकार ने बुधवार को सभी स्कूलों में 18 नवंबर तक के लिए अवकाश की घोषणा कर दी है। वैसे निचली कक्षाएं तो 3 नवंबर से ही नहीं लग रही है। इसे शीतकालीन सूटियां कहा जा रहा है, पर वास्तव में ये प्रदूषणकालीन छुट्टियों है। राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण लगातार ‘गंभीर’ श्रेणी बना हुआ है। दीपावली तक प्रदूषण पटने की कोई उम्मीद नहीं है, इसके बाद ही प्रदूषण-रोधी नियमों को ठीक से लागू किया जाएगा और पराली जलाने की घटनाओं में भी कमी आएगी।

इन्हें भी पढ़े

गिरफ्तार

दिल्ली : एयरफोर्स ऑफिसर बनकर धोखाधड़ी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश!

May 8, 2026
rekha gupta

सीएम रेखा का एलान: इंदिरा गांधी अस्पताल परिसर में बनेगा मेडिकल कॉलेज

May 7, 2026
Dengue virus

दिल्ली: डेंगू के मामलों ने बढ़ाई चिंता, अप्रैल में ही टूटा कई वर्षों का रिकॉर्ड

May 6, 2026
BJP and TMC

पश्चिम बंगाल : नए सीएम की शपथ पर फंसेगा पेंच? इस्तीफे से इनकार पर बढ़ी सियासी हलचल

May 5, 2026
Load More

हालांकि ज्यादातर स्कूल ऑनलाइन कक्षाएं चलाएंगे और यह जरूरी भी है। कोरोना और लॉकडाउन ने ऑनलाइन पढ़ाई की क्षमता विकसित कर दी है और इसका लाभ लेने में कोई हर्ज नहीं है। अवकाश प्रदूषण से बचने- बचाने के लिए मंजूर हुए है, पर इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे पढ़ना और शिक्षक पढ़ाना छोड़ दें। स्कूलों को सुनिश्चित करना होगा कि पढ़ाई में नुकसान न हो। शिक्षा केवल भविष्य से जुड़ा विषय नहीं है, यह रोजगार से भी जुड़ा क्षेत्र है, अतः प्रदूषण व अवकाश का कम से कम असर शिक्षा पर पड़ना चाहिए।

दिल्ली और उसके आसपास के शहरों में जो धुआं व्याप्त है, उसमें एक तिहाई योगदान पराली का बताया जा रहा है। क्या पंजाब या हरियाणा में भी बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है? वहां शायद दिल्ली की तरह पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है, पर वहां लोगों का स्वास्थ्य तो खतरनाक रूप से प्रभावित हो रहा होगा। क्या वहां के लोग इस बारे में सोच रहे हैं? क्या वहां की सरकारें लोगों के स्वास्थ्य के प्रति पर्याप्त रूप से जागरूक हैं? मोटे तौर पर हवा में प्रदूषण की मात्रा सुरक्षित सीमा से सात से आठ गुना अधिक हो गई है। कुछ पैमानों पर तो दिल्ली में हवा सुरक्षित सीमा से 30 से 40 गुना अधिक है। गंगा के मैदानी इलाकों के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता

खतरनाक बनी हुई है। यह बात बार-बार दोहराने की जरूरत है कि यह प्रदूषण सामान्य नहीं, जानलेवा है। ध्यान रहे, करोड़ों लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है, सुबह-शाम गुलजार रहने वाले उद्यान सुने पड़ गए हैं, लोगों का बाहर टहलना तक बंद हो गया है। ऐसे में, जीवन शैली से जुड़ी अन्य बीमारियों को भी मौका मिलेगा। अच्छी बात है, एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदूषण का संज्ञान

लिया है और तमाम सरकारों को फटकारते हुए उचित ही कहा है कि इस मुद्दे पर हर समय राजनीतिक लड़ाई नहीं हो सकती। शीर्ष अदालत ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पराली जलाने पर तत्काल रोक लगाई जाए। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि वह प्रदूषण के कारण लोगों को मरने नहीं दे सकती। दिल्ली आगे बढ़कर हरियाणा को जिम्मेदार ठहराए और हरियाणा ठीकरा पंजाब के माथे फोड़ दे. अब तक यही तो चलता आ रहा है। यह आम लोगों के लिए भी जागने का समय है। सबको अपने गिरेबान में झांकना चाहिए कि वह इस प्रदूषण में कितना योगदान दे रहा है? महात्मा गांधी ने इस देश के आम लोगों को बहुत पहले ही आगाह किया था कि सिर्फ सरकार के भरोसे मत रहना। वाकई प्रदूषण की चुनौती बहुत बड़ी हो गई है और हमें सोचना चाहिए कि हम व्यक्तिगत रूप से और सम्मिलित रूप से भी अपने प्रदेश, देश के लिए क्या कर सकते है।

यह आम लोगों के लिए भी जागने का समय है। अब सबको अपने गिरेबान में झांकना चाहिए कि वह इस प्रदूषण में कितना योगदान दे रहा है?

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
जनजाति समाज

‘धरतीपुत्र’ जनजाति समाज का भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान

November 4, 2024

जलवायु परिवर्तन होगा महंगाई के लिए जिम्मेदार!

May 30, 2023
India

किस कीमत पर हो सकता है India बदलकर भारत?

September 6, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • प्रभास की Kalki 2 के लिए फैंस को करना होगा लंबा इंतजार!
  • अमित शाह का राहुल और I.N.D.I.A गठबंधन पर हमला, पूछा- क्या हर जगह हुई वोट चोरी?
  • सुपर अल-नीनो को लेकर IMD का अलर्ट जारी, देशभर में पड़ेगी भीषण गर्मी

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.