नई दिल्ली: चैत्र माह की नवरात्रि चल रही चल रही है. आज नवरात्रि का तीसरा दिन है. 27 मार्च को इस पर्व का समापन हो जाएगा. नवरात्रि के दिनों में भक्त माता के नौ स्वरूपों का विधि-विधान से पूजन करते हैं और उपवास रखते हैं. इस समय भक्त माता आदिशक्ति की उपासना में लीन हैं, लेकिन अक्सर इस दौरान एक बड़ा सवाल उन लोगों के मन में उठता है जो नॉनवेज यानी मांसाहार खाते हैं.
मांसाखार वालों के मन में सवाल आता है कि क्या वो लोग माता का व्रत रख सकते हैं. क्या शास्त्रों में उनके लिए कोई विशेष नियम या मनाही है? अक्सर लोगों ने जो कथाएं सुनी होती हैं उसके आधार पर वो डर जाते हैं, लेकिन धर्म और अध्यात्म का नजरिया थोड़ा अलग और गहरा है, तो आइए जानते हैं कि मांसाहार खाने वाले माता का व्रत रख सकते हैं या नहीं. इस बारे में शास्त्रों में क्या कहा गया है?
शास्त्रों के अनुसार…
भगवद गीता के अनुसार, सात्विक, राजसिक और तामसिक ये तीन तरह के भोजन होते हैं. मांसाहार को तामसिक भोजन माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, तामसिक भोजन से क्रोध और अज्ञानता बढ़ती है. जबकि, व्रत सात्विक उर्जा को जगाने के लिए रखा जाता है. शास्त्र कहते हैं कि आध्यात्मिक अनुष्ठान (जैसे व्रत) के दौरान शरीर और मन का शुद्ध होना जरूरी है. नवरात्रि की कथाओं और विधि में शुद्धि पर जोर दिया गया है. व्रत के नौ दिनों में अहिंसा का पालन करना चाहिए.
क्या मांसाहार खाने वाले व्रत नहीं रख सकते?
शास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति अपनी पुरानी आदतों को छोड़कर शुद्धि की ओर बढ़ सकता है. अगर कोई साल भर नॉनवेज का सेवन करता हैं, तो इसका अर्थ ये नहीं है कि वो नवरात्रि का व्रत नहीं रख सकता, लेकिन नवरात्रि शुरू होने से कम से कम एक दिन पहले से और व्रत के पूरे नौ दिनों तक उसको तामसिक चीजों जैसे मांसाहार और प्याज-लहसुन त्यागना होगा.






