नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रहे तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच अब एक बड़ी खबर सामने आई है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अपने एनरिच्ड यूरेनियम का खजाना छोड़ने पर सहमति दे दी है. यही वह यूरेनियम भंडार है जिसे अमेरिका और इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम का सबसे बड़ा खतरा मानते रहे हैं.
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि तेहरान ने एक सामान्य सहमति दिया है कि वह अपने पास जमा एनरिच्ड यूरेनियम छोड़ने को तैयार है. हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि यह यूरेनियम किसी तीसरे देश को दिया जाएगा, नष्ट किया जाएगा या किसी अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रखा जाएगा. इस पर आगे की बातचीत में फैसला होना बाकी है.
कितना खतरनाक है यह यूरेनियम?
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुमान के मुताबिक, ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60% तक एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है. इजरायली अधिकारियों का कहना है कि अगर इसे और शुद्ध किया जाए तो इससे कई परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं. यही वजह है कि अमेरिका लगातार इस मुद्दे को बातचीत की सबसे बड़ी शर्त बना रहा था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस यूरेनियम स्टॉक को पहले ‘न्यूक्लियर डस्ट’ कह चुके हैं और साफ चेतावनी दे चुके थे कि अगर बातचीत नाकाम हुई तो सैन्य विकल्प भी मेज पर हैं.
अमेरिका ने कैसे बनाया दबाव?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पहले इस शुरुआती डील में यूरेनियम भंडार पर कोई वादा नहीं करना चाहता था. वह चाहता था कि यह मुद्दा बाद की बातचीत में उठे. लेकिन अमेरिकी बातचीत टीम ने साफ संदेश भेजा कि अगर शुरुआत में ही इस पर कोई सहमति नहीं बनी, तो अमेरिका बातचीत छोड़कर फिर सैन्य हमला शुरू कर सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के कई विकल्प भी तैयार कर रखे थे. इसमें अंडरग्राउंड न्यूक्लियर ठिकानों पर बंकर तोड़ने वाले भारी बमों से हमला, इस्फहान परमाणु केंद्र पर सीधी बमबारी और अमेरिका-इजरायल का संयुक्त कमांडो ऑपरेशन जैसे विकल्प शामिल थे. हालांकि ट्रंप ने कमांडो ऑपरेशन को मंजूरी नहीं दी थी.
पूरी डील में क्या-क्या शामिल है?
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच जो बड़ी डील बन रही है, उसमें सिर्फ न्यूक्लियर मुद्दा नहीं बल्कि पूरे युद्ध को रोकने वाला पैकेज शामिल है. अगर डील डन हुई तो-
- 60 दिन तक युद्धविराम रहेगा.
- होर्मुज जलडमरूमध्य खोला जाएगा.
- ईरान वहां बिछाई गई समुद्री माइंस हटाएगा.
- जहाजों की आवाजाही सामान्य होगी.
- बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाएगा.
- ईरान को तेल बेचने में राहत मिलेगी.







