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Home राष्ट्रीय

हिंदुओं को किसी से माफी मांगने की नहीं जरूरत : RSS महासचिव

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 24, 2026
in राष्ट्रीय, विश्व
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dattatreya hosabale
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू दर्शन और संस्कृति का बचाव करते हुए कहा कि हिंदू श्रेष्ठतावादी नहीं हैं और उन्हें किसी भी ऐतिहासिक कार्य के लिए माफी मांगने की आवश्यकता नहीं है. हडसन इंस्टीट्यूट में बोलते हुए होसबले ने कहा कि हिंदू विचारधारा का मूल दर्शन समावेशी है, जो सभी जीवित और निर्जीव तत्वों में एकता देखता है. उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण के चलते हिंदुओं को वर्चस्ववादी बताना वास्तविकता के विपरीत है.

इतिहास में न आक्रमण, न गुलामी

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होसबले ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से हिंदुओं ने कभी अन्य देशों पर आक्रमण नहीं किया और न ही किसी को गुलाम बनाया. उन्होंने जोर देकर कहा कि जब हिंदू दर्शन ही समावेशी है, तो वर्चस्ववाद का सवाल ही नहीं उठता. हिंदुओं को किसी बात के लिए माफी मांगने की जरूरत नहीं है.

होसबले ने भारत-अमेरिका संबंधों पर दिया जोर

अपने संबोधन में होसबले ने भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी की आवश्यकता पर भी बल दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के लिए आपसी विश्वास, समान अवसर और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाना जरूरी है. उनके अनुसार, यदि अमेरिका भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी चाहता है, तो यह सहयोग पारस्परिक सम्मान और भरोसे के आधार पर ही संभव है. होसबले ने यह भी कहा कि आधुनिकता और सांस्कृतिक मूल्य एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं. उन्होंने बताया कि विशेष रूप से पूर्वी समाजों में दोनों का सह-अस्तित्व स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.

उन्होंने सनातन परंपरा को शाश्वत बताते हुए कहा कि यह समय के साथ विकसित होती रहती है, लेकिन अपनी मूल पहचान और मूल्यों को बनाए रखती है.

होसबले ने RSS की भूमिका का किया जिक्र

होसबले ने आरएसएस को भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत से प्रेरित एक जन-स्वयंसेवी संगठन बताया. उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य चरित्र निर्माण, सामाजिक संगठन और सेवा भावना को बढ़ावा देना है. उन्होंने बताया कि आरएसएस नियमित रूप से दैनिक और साप्ताहिक एक घंटे की सभाओं का आयोजन करता है, जिनके माध्यम से स्वयंसेवकों में अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी विकसित की जाती है. इसके अलावा, संगठन प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में सक्रिय रहता है और स्वयंसेवकों द्वारा करीब 40 नागरिक संस्थानों की स्थापना भी की गई है.

आरएसएस के महासचिव ने भारत की वैश्विक छवि को लेकर अमेरिका में प्रचलित धारणाओं को अधूरा और भ्रामक बताया है. उन्होंने कहा कि भारत आज न केवल एक प्रमुख तकनीकी केंद्र है, बल्कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन चुका है, हालांकि इन तथ्यों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारत की जो आम छवि पेश की जाती है, वह पुराने स्टीरियोटाइप्स पर आधारित है और आधुनिक भारत की वास्तविक तस्वीर को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती.

भारत को सीमित नजरिये से देखा जाता है: होसबले

होसबले ने कहा कि अमेरिका में भारत को अक्सर अत्यधिक आबादी वाला, गरीबी से जूझता और झुग्गी-झोपड़ियों से भरा देश के रूप में देखा जाता है. उन्होंने इस धारणा को चुनौती देते हुए कहा कि भारत अब वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आर्थिक दृष्टि से तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि भारत केवल पारंपरिक छवि तक सीमित नहीं है. यह एक टेक्नोलॉजी हब है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. लेकिन ये बातें आम धारणा में पर्याप्त रूप से दिखाई नहीं देतीं.

होसबले ने RSS पर लगे आरोपों का खंडन किया

आरएसएस को लेकर उठने वाले आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए होसबले ने कहा कि संगठन को अक्सर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है. उन्होंने कहा कि आरएसएस को हिंदू वर्चस्ववादी, अल्पसंख्यक विरोधी, महिला विकास विरोधी और आधुनिकीकरण के खिलाफ बताना वास्तविकता से परे है. उनके अनुसार, यह छवि या तो जानकारी के अभाव में बनी है या फिर किसी विशेष एजेंडे के तहत गढ़ी गई है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आरएसएस एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, जिसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है.

होसबले ने आरएसएस को भारत की सभ्यतागत और सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरित एक जन-स्वयंसेवी संगठन बताया. उन्होंने कहा कि संगठन का मुख्य फोकस चरित्र निर्माण, सामुदायिक सेवा और सामाजिक संगठन को मजबूत करना है. होसबले ने स्पष्ट किया कि आरएसएस हिंदू पहचान को धार्मिक नहीं बल्कि एक व्यापक सभ्यतागत पहचान के रूप में देखता है. उन्होंने कहा कि संगठन का जोर उन सांस्कृतिक मूल्यों पर है, जिनका किसी एक धर्म से सीधा संबंध नहीं है, बल्कि वे भारतीय समाज की साझा विरासत का हिस्सा हैं.

वैश्विक स्तर पर संवाद की आवश्यकता: होसबले

अल्पसंख्यक समुदायों और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों पर बोलते हुए होसबले ने कहा कि समय-समय पर उत्पन्न होने वाले तनाव के पीछे राजनीतिक हित और ऐतिहासिक गलतफहमियां प्रमुख कारण हैं. उन्होंने कहा कि इन गलतफहमियों को दूर करने के लिए निरंतर संवाद आवश्यक है और आरएसएस इस दिशा में प्रयासरत है. संगठन विभिन्न समुदायों के साथ बातचीत कर आपसी समझ और विश्वास बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

होसबले ने कहा कि भारत की वास्तविक तस्वीर और आरएसएस की भूमिका को समझने के लिए व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है. उन्होंने संवाद, सहयोग और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि गलत धारणाओं को दूर किया जा सके और समाज में सामंजस्य स्थापित हो सके. अपने संबोधन के अंत में होसबले ने कहा कि भारत और उसकी सांस्कृतिक पहचान को सही संदर्भ में समझने के लिए वैश्विक स्तर पर संवाद और संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है.

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