नई दिल्ली। 18 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब नीदरलैंड्स जाते हुए अबू धाबी में रुकेंगे. ये सिर्फ एक छोटा सा ‘स्टॉपओवर’ नहीं बल्कि पश्चिम एशिया की पूरी राजनीति को पलटने वाला मास्टरस्ट्रोक साबित होगा. इस मुलाकात के दौरान भारत और यूएई मिलकर गुजरात-फुजैराह-अकाबा से गुजरने वाले उस ट्रेड रूट की प्लानिंग आगे बढ़ा सकते हैं, जो दुनिया भर की अर्थव्यवस्था का रुख मोड़वे की ताकत रखेगा.
असल में ये एक ऐसा कूटनीतिक चक्रव्यूह है, जिसके जरिए भारत इस पूरे इलाके में अपनी धाक जमाने की तैयारी कर चुका है. इस रणनीति के बाद चीन का दबदबा कम हो होना तय है और पाकिस्तान जैसे देशों को कोई पूछने वाला नहीं बचेगा.
मुंद्रा से अकाबा: क्या है ये India-UAE का नया ट्रेड एक्सिस?
भारत अब केवल सामान बेचने की नहीं, बल्कि सप्लाई चेन पर कब्जा करने की रणनीति बना रहा है. यूएई ने हाल ही में जॉर्डन में 360 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बनाने के लिए 2.3 बिलियन डॉलर का समझौता किया है. यह रेल लाइन जॉर्डन की रॉक-फॉस्फेट और पोटाश खदानों को लाल सागर के अकाबा पोर्ट से जोड़ेगी.
भारत का बड़ा फायदा: पोटाश और रॉक-फॉस्फेट खाद बनाने के लिए सबसे जरूरी कच्चा माल हैं. भारत एक कृषि प्रधान देश है और उसे इसकी भारी जरूरत रहती है.
पश्चिम एशिया में भारत का असली खेल दो बड़े पिलर्स पर टिका है- IMEC और I2U2.
I2U2 (भारत, इजराइल, यूएई, अमेरिका): इसे ‘पश्चिम एशियाई क्वॉड’ कहा जा रहा है. जॉर्डन में यूएई की रेलवे लाइन और इजराइल के साथ भारत के रिश्ते मिलकर एक ऐसा कॉरिडोर बना रहे हैं जो सुरक्षा और तकनीक के मोर्चे पर अभेद्य है.
IMEC (इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर): प्रधानमंत्री की ये यात्रा इसी कॉरिडोर को जमीन पर उतारने की एक बड़ी कड़ी है. गुजरात के मुंद्रा से UAE के फुजैराह तक, फिर वहां से रेल के जरिए जॉर्डन के अकाबा और इसके बाद इजराइल के हाइफा होते हुए यूरोप तक का रास्ता. ये चीन के ‘वन बेल्ट वन रोड’ (OBRI) का सबसे तगड़ा जवाब है.
कैसे पलट जाएगा पावर गेम?
फूड सिक्योरिटी : जॉर्डन और यूएई के साथ इस साझेदारी से भारत को फर्टिलाइजर्स की कमी कभी नहीं होगी, जिससे करोड़ों किसानों का भविष्य सुरक्षित होगा.
पाकिस्तान का डर: अब तक पश्चिम एशिया में पाकिस्तान खुद को एक ‘ब्रिज’ की तरह पेश करता था, लेकिन भारत-यूएई ने उसे पूरी तरह बायपास कर दिया है. अब अरब देशों के लिए भारत ही एकमात्र और सबसे बड़ा पार्टनर है.
चीन को मात: चीन ने हंबनटोटा और ग्वादर के जरिए भारत को घेरने की कोशिश की थी लेकिन भारत ने यूएई के साथ मिलकर लाल सागर और अरब सागर के बीच अपना खुद का हाईवे तैयार कर लिया है.
मुंद्रा से अकाबा तक की ये नया एक्सिस सिर्फ व्यापारिक रास्ता नहीं है, बल्कि पश्चिम एशिया में भारत के बढ़ते कदमों की आहट है. पीएम मोदी की ये यात्रा साबित करेगी कि भारत अब केवल दुनिया का बाजार नहीं, बल्कि दुनिया की सप्लाई चेन का नया बॉस है.







