नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर आज से दिल्ली में फाइनल दौर की बातचीत शुरू होगी। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा है कि जल्द ही दोनों देशों के बीच बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट के पहले ट्रेंच पर साइन हो जाएंगे। ट्रेड डील के पहले चरण का 99 फीसदी काम पूरा हो गया है। अमेरिकी डेलिगेशन को ब्रेंडन लिंच लीड कर रहे हैं। हालांकि, समझौते की अंतिम रूपरेखा पर अभी भी चर्चा चल रही है,लेकिन अगर दोनों देश बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने,व्यापारिक बाधाओं को कम करने और आर्थिक सहयोग का विस्तार करने में सफल होते हैं तो कई सेक्टरों को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। आइए इन पर डालते हैं एक नजर।
फार्मास्यूटिकल्स
फार्मास्यूटिकल्स भारत से अमेरिका को होने वाले सबसे बड़े निर्यातों में से एक हैं। अगर दोनों देशों में ट्रेंड एग्रीमेंट होता है तो इस सेक्टर को बड़ा फायदा होगा। फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (Pharmexcil) के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका भारत के फार्मास्यूटिकल निर्यात के लिए सबसे बड़ा बाजार है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि रेग्युलेटरी प्रक्रियाओं को आसान बनाने और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने से निर्यात में और अधिक बढ़त हो सकती है।
टेक्सटाइल और अपेरल
टेक्सटाइल और अपेरल इंडस्ट्री एक और ऐसा सेक्टर है जो इस एग्रीमेंट पर हो रही बातचीत बारीकी से नजर रखे हुए है। इस इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी बाजार तक बेहकर पहुंच मिलने से भारतीय निर्यातकों को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अपनी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। भारतीय कपड़ा और परिधान निर्यात के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़े बाजारों में से एक बना हुआ है।
इंजीनियरिंग गुड्स
इंजीनियरिंग गुड्स,अमेरिका को भारत से होने वाले सबसे बड़े एक्सपोर्ट कटेगरी में आते हैं। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) ने मशीनरी,औद्योगिक उपकरण,ऑटो कंपोनेंट्स और मेटल प्रोडक्ट जैसे सेक्टरों के निर्यातकों के लिए व्यापार बाधाओं को कम करने और अनुमानित टैरिफ नीतियों को आसान करने के महत्व पर बार-बार जोर दिया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग
भारत ने उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और सप्लाई चेन में विविधता लाने के प्रयासों के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग को अपनी औद्योगिक रणनीति का एक प्रमुख आधार बनाया है। अगर अमेरिका से साथ कोई ऐसा समझौता होता है जिससे अमेरिकी बाजारों तक भारतीय कंपनियों की पहुंच बेहतर होती है तो इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को फायदा हो सकता है।
ऑटो कंपोनेंट्स
भारत के ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री ने अमेरिका सहित ग्लोबल बाजारों में अपने निर्यात का लगातार विस्तार किया है। इंडस्ट्री का तर्क है कि ट्रेड से जुड़ी बाधाओं में कमी और बाजार तक बेहतर पहुंच से ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियो लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
केमिकल और स्पेशियलिटी केमिकल्स
केमिकल सेक्टर देश के निर्यात में योगदान देने वाला एक और अहम सेक्टर है। इस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि टैरिफ और व्यापार नियमों को लेकर अधिक स्पष्टता आने से केमिकल और स्पेशियलिटी केमिकल्स के निर्यात में बढ़त हो सकती है।
जेम्स एंड ज्वेलरी
संयुक्त राज्य अमेरिका,भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स लंबे समय से ऐसे उपायों की मांग कर रहे हैंजिनसे व्यापार को आसान बनाया जा सके और अमेरिकी बाजार तक पहुंच बढ़ाई जा सके। अगर ऐसा होता है तो इस सेक्टर को फायदा होगा।
किन बातों पर चल रही है चर्चा ?
अधिकारियों ने प्रस्तावित समझौते के अंतिम विवरण का खुलासा नहीं किया है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के बयानों के अनुसार,बातचीत में बाज़ार तक पहुंच,गैर-टैरिफ बाधाएं,सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा,निवेश प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा सहयोग जैसे विषय शामिल हैं। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 1 जून को कहा कि ज्यादातर मुद्दे पहले ही सुलझा लिए गए हैं और चर्चाएं बाकी बचे कुछ ही मामलों पर केंद्रित हैं।
जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ेगी,इससे फायदा पाने वाले इस बात पर निर्भर करेंगे कि समझौते में कौन से अंतिम प्रावधान शामिल किए जाते हैं। हालांकि,एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर दोनों देशों के बीच कोई अच्छा समझौता होता है तो इसके फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कंपोनेंट्स, केमिकल और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।







