नई दिल्ली। कर्नाटक में इस समय डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की तैयारी चल रही है। इस बीच, कांग्रेस के भीतर उप मुख्यमंत्री पद को लेकर एक नई जंग शुरू हो गई है। डिप्टी सीएम पद के जरिए कांग्रेस अलग-अलग सत्ता केंद्रों, जातीय समीकरणों और गुटीय हितों के बीच संतुलन बिठाएगी। रिपोर्टों से पता चलता है कि पार्टी नेतृत्व कई डिप्टी CM बनाने पर विचार कर रहा है। हालांकि अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
इस चर्चा के केंद्र में दो राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण नाम सामने आए हैं। पहला नाम सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया का है। जबकि दूसरा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे का है। कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य और कांग्रेस नेता यतींद्र सिद्धारमैया ने दावा किया है कि उन्हें राज्य में अगले मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिलने की उम्मीद है।
निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे ने दावा किया कि पार्टी आला कमान ने उन्हें मंत्री पद का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा हालांकि अब तक कुछ भी तय नहीं हुआ है। उन्हें अपनी संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। यतींद्र ने कहा कि उन्होंने नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मिलकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दी।
डिप्टी CM पद के लिए यतींद्र के नाम पर चर्चा क्यों हो रही है?
डॉक्टर से राजनेता बने यतींद्र सिद्धारमैया कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के छोटे बेटे हैं। पैथोलॉजिस्ट के तौर पर ट्रेनिंग लेने के बाद उन्होंने 2018 में चुनावी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने वरुणा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीता। यह सीट पहले उनके पिता के पास थी। 2018 से 2023 तक MLA के तौर पर काम करने के बाद वे 2024 में कर्नाटक विधान परिषद (MLC) में चले गए।
यतींद्र सिद्धारमैया को लंबे समय से अपने पिता के राजनीतिक खेमे में सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक माना जाता रहा है। हालांकि, हाल के सालों में उन्होंने ज्यादातर पर्दे के पीछे रहकर काम किया है। फिर भी सिद्धारमैया गुट के अंदर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा है। ऐसी खबरें आ रही हैं कि यतींद्र को कैबिनेट में या किसी और अहम पद पर जगह दी जा सकती है।
प्रियंका खड़गे नंबर 2 क्यों बन सकती हैं?
प्रियांक खड़गे कर्नाटक कांग्रेस के सबसे चर्चित युवा नेताओं में से एक हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक ने अपनी राजनीतिक यात्रा NSUI और यूथ कांग्रेस के जरिए शुरू की। फिर 2013 में चित्तापुर से वह कर्नाटक विधानसभा में पहुंचे। तीन बार के विधायक प्रियांक ने कई अहम विभाग संभाले हैं। यतींद्र के उलट प्रियांक खड़गे का कर्नाटक की राजनीति में पहले से ही एक अहम मुकाम है। वे मंत्री पद की जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वह युवा वोटरों और शहरी इलाकों में पार्टी के सबसे ज्यादा नजर आने वाले चेहरों में से एक बनकर उभरे हैं।
यही एक वजह है कि कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि डिप्टी CM पद के लिए प्रियांक खड़गे का दावा उनके वंश पर कम, बल्कि उनके प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव पर ज्यादा आधारित है। उनकी उम्मीदवारी कांग्रेस को एक और मोर्चे पर भी मदद करती है। प्रियांग अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। पार्टी के भीतर कई लोगों का तर्क है कि किसी भी डिप्टी सीएम फॉर्मूले में दलित प्रतिनिधित्व को भी शामिल किया जाना चाहिए। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि अगर हाई कमान एक से ज्यादा डिप्टी नियुक्त करने का फैसला करता है, तो प्रियांग सबसे मजबूत दावेदारों में से एक बने रहेंगे।
क्या दोनों को शिवकुमार कैबिनेट में जगह मिल सकती है?
यतींद्र और प्रियांक दोनों को कैबिनेट में जगह देना कांग्रेस के हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनता जा रहा है। पार्टी पर कई समुदायों और गुटों का दबाव है। ऐसे में कांग्रेस के रणनीतिकारों को कई डिप्टी CM बनाना एक आसान हल लग रहा है। सिद्धारमैया गुट और खड़गे के खेमे में से किसी एक को चुनने के बजाय कांग्रेस पार्टी सैद्धांतिक तौर पर अलग-अलग समुदायों और सत्ता के केंद्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को एक साथ जगह दे सकती है।
3 जून को सीएम पद की शपथ लेंगे शिवकुमार
कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष डीके शिवकुमार तीन जून को शाम चार बजकर पांच मिनट पर लोक भवन परिसर में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस दौरान कुछ विधायक भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। शिवकुमार को शनिवार को औपचारिक रूप से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया था। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 मंत्रियों को शामिल किए जाने का प्रावधान है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंत्री पद के दावेदारों की लंबी कतार और उपलब्ध पदों की सीमित संख्या के बीच शिवकुमार के सामने संतुलन साधने की बड़ी चुनौती है। उन्हें हर कदम बेहद सावधानी से उठाना होगा, क्योंकि मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले नेताओं की नाराजगी बड़े स्तर पर असंतोष का रूप ले सकती है।







